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Monday, 24 February 2014

खाता एकीकरण और बैंकिंग सुधार

                                          रिज़र्व बैंक ने जिस तरह से एक नए आदेश के तहत सभी बैंकों को यह निर्देश दिए हैं कि वे अपने ग्राहकों से उसी बैंक में खोले गए सभी खातों का विवरण मागें और उनके एकीकरण की प्रक्रिया पर काम शुरू करें उससे आने वाले समय में गुमनान खातों या कई खातों के माध्यम से काले धन के प्रवाह पर कुछ हद तक अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है क्योंकि अभी तक टैक्स चोरी करने या अन्य कारणों से भी कर चोरी में लगे हुए लोग कई खातों के माध्यम से इस तरह का काम करते रहते हैं. अभी प्राथमिक स्तर पर एक बैंक के विभिन्न स्थाओं पर खोले गए खातों के एकीकरण के लिए ग्राहकों से २८ फरवरी तक मैंडेट फॉर्म भरने के लिए कहा जा रहा है जिससे उनके सभी खाते एक ही केवाईसी के माध्यम से आसानी से सामने आ जायेंगें और उनके लेन देन के बारे में अधिकारियों को को आसानी से पता चल सकेगा. कहने के लिए यह देश में खातों के एकीकरण की प्रारंभिक प्रक्रिया भर है पर इसका लम्बी अवधि में बहुत लाभ मिल सकता है क्योंकि आज भी देश में बैंकिंग सेवाओं का गलत लाभ उठाया जा रहा है.
                                           रिज़र्व बैंक की इस कवायद के बारे में एक बात तो स्पष्ट ही है कि आने वाले समय में जब इस योजना के दुसरे चरण की बात शुरू की जायेगी तो ग्राहक को एक विशिष्ट खाता संख्या भी दे दी जायेगी जिसके अंतर्गत वह देश में कहीं भी उसी पहचान के दम पर किसी भी बैंक में खाता खोल सकेगा और उसे हर जगह पर अलग अलग पहचान नहीं सिद्ध करनी पड़ेगी. आज कई तरह की आवश्यकतों के चलते ग्राहक एक ही शहर या अन्य शहर में भी अपने खाते रखते हैं जिनमें बहुत बार तो वे कई खातों को सरकार या आयकर विभाग से छिपाने के लिए ही खोला करते हैं तो इस तरह से अपने काम को निकालने वालों के लिए अब बुरा समय शुरू होने वाला ही है. आने वाले समय में हर व्यक्ति के लिए किसी भी तरह के खाते को छिपा पाना लगभग नामुमकिन ही होने वाला है और उस स्थिति में जब किसी भी व्यक्ति पर नज़र रखना आसान हो जायेगा तो इस तरह के काले धन को प्रवाहित करने पर कुछ हद तक अंकुश लग पायेगा.
                                          वैसे देखा जाये तो यह सरकारी कवायद केवल लोगों के खातों का सच सामने लाने के लिए ही की जा रही है पर इसका दूसरा सुखद पहलू यह भी है कि इसके माध्यम से खाताधारकों को नये शहर में जाने पर दुनिया भर की कवायद भी नहीं करनी पड़ेगी क्योंकि वे अपने विशिष्ट पहचान संख्या के माध्यम से ही अपनी पहचान को साबित कर सकेंगें और नए खाते के लिए उन्हें उस बैंक के किसी खाताधारक की सिफारिश नहीं करवानी पड़ेगी. हर व्यवस्था के दो पहलू हुआ करते हैं इससे जहाँ नौकरी करने वाले लोगों को बहुत आसानी हो जायेगी वहीं बैकों के लिए भी यह आसान हो जायेगा कि वे फ़र्ज़ी पहचान पर खाता खोलने वालों से आसानी से बच पायेंगें क्योंकि आज भी इतनी तरह की सुरक्षा करने के बाद भी बेईमान लोग अपने फ़र्ज़ी खाते खोलने में सफल हो जाया करते हैं. देश में कोई भी बड़ा सुधार एकदम से नहीं लागू किया जा सकता और नए सुधारों को सरकारी अंकुश की तरह देखना भी अब जनता की सोच बन चुकी है पर आने वाले समय में इस तरह के सुधार देश में बेहतर आर्थिक परिदृश्य के लिए बड़े प्रभावी साबित होने वाले हैं और यह समय के साथ ही सिद्ध भी हो जायेगा.    
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