मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Saturday, 29 March 2014

भारतीय सेनाएं और दुर्घटना

                                          विगत कुछ समय से जिस तेज़ी के साथ पहले नौसेना और फिर वायुसेना के आधुनिकतम परिवहन और आक्रमण में उपयोग किये जाने वाले उपकरणों और वाहनों पर एक तरह से संकट ही आया हुआ है उस स्थिति में सुपर हरक्यूलिस विमान का दुर्घटनाग्रस्त होना अपने आप में बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है. आज भी भारतीय सेना के हर तरह के पोतों और विमानों का अधिकतर हिस्सा विदेशों से ही आयात किया जाता है और उस स्थिति में इस तरह से हरक्यूलिस का जाना भी अपने आप में वायु सेना के लिए एक बड़ा झटका तो है साथ ही वायु सेना के पांच वीरों का दुर्घटना का शिकार होना भी बहुत कठिन समय की तरह है क्योंकि देश में आज भी अभी तक पूरी तरह से निरापद प्रशिक्षण की व्यवस्था नहीं की जा सकी है. बेहतर हो कि इस तरह के संवेदनशील मसले पर किसी भी तरह की राजनीति से नेता दूर ही रहें क्योंकि जिन लोगों ने अपने परिजनों को खोया है यह समय उनके साथ खड़े होने का है न कि कमियां खोजने का क्योंकि यह तो स्पष्ट ही है कि कुछ तो अवश्य ही हुआ होगा तभी तो यह दुर्घटना घटी है.
                                         अपनी तरह के बहुत ही सुरक्षित चार इंजनों से लैस इस विमान की खूबी के बारे में पूरी दुनिया जानती है पर यह अपनी एक नियमित प्रशिक्षण उड़ान पर था और प्रारंभिक सूत्रों के अनुसार यह काफी नीचे उड़कर अपने प्रशिक्षण को पूरा कर रहा था पर जिस तरह से अचानक ही यह दुर्घटना ग्रस्त हुआ उस परिस्थिति में विमान उड़ाने वाले किसी भी सैनिक को कुछ भी कहने तक का अवसर नहीं मिल पाया. यह वही विमान था जिसने लद्दाख के दौलत ओल्डी बेग सेक्टर में दुनिया की सबसे ऊंची हवाई पट्टी पर उतर कर चीन को भारतीय सामरिक तैयारियों के बारे में आगाह करने का काम भी किया था. ज़ाहिर है इतने सुरक्षित विमान को बनाने वाली कम्पनी दुर्घटना की जांच भी करेगी और सम्भवतः वह अपने को सुरक्षित रखते हुए किसी मानवीय भूल पर अधिक और तकनीकी बात पर कम ही ही टिकेगी. भारतीय वायु सेना भी अपने अनुसार हर प्रयास करेगी जिससे दुर्घटना का कारण जाना जा सके और आने वाले समय में इस तरह की किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए उचित कदम उठाने के बारे में सोचा जा सके.
                                      पूरा देश अपने उन सैनिकों के लिए दुखी है जो इस दुर्घटना का शिकार हो गए हैं और साथ ही पूरे देश की संवेदनाएं उनके परिवारों के साथ ही हैं. देश की वायु सेना ने जिस तरह से अपने विमानों और जांबाज़ सैनिकों को खोया है उस स्थिति में अब एक ऐसी नीति की आवश्यकता है तो वायु सेना की वास्तविक चुनौतियों के साथ निरापद प्रशिक्षण के बारे में भी बनायीं जाये. कारण चाहे जो भी होते हों पर पहले मिग फिर जगुआर और अन्य विमानों के दुर्घटनाग्रस्त होते रहने के बीच ही इस तरह से हरक्यूलिस की दुर्घटना अपने आप में देश की सामरिक तैयारियों के साथ वायुसेना के मनोबल पर भी असर डालने का काम करती है. यह सही है कि आज भी हमारी वायु सेना अपने वीर सैनिकों के बल पर बहुत कुछ करने का दम रखती है फिर भी इस तरह की दुर्घटनाओं से उस पर बहुत ही विपरीत असर भी पड़ता है. सरकार को भी एक बार फिर से प्रशिक्षण के क्षेत्र में भारतीय प्रदर्शन को देखते हुए कुछ और सुरक्षित तरीका अपनाने के बारे में सोचना ही होगा क्योंकि आर्थिक क्षति को तो झेला जा सकता है पर शांति काल में सैनिकों का इस तरह से जाना किसी भी तरह से आधुनिक भारत में स्वीकार करने योग्य नहीं है. 
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