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Saturday, 23 August 2014

क्लोन चेक और आईएसआई

                                                                         यूपी एसटीएफ ने इस साल १ जुलाई और २० अगस्त को जिस तरह से क्लोन चेक के माध्यम से लाखों रूपये बैंकों से निकालने के मामले में चेक रैकेट के लोगों को गिरफ्तार करने में सफलता पायी है वह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है पर उनके सम्बन्ध संदिग्ध रूप से पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई से जुड़ते नज़र आने के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है. पहले तो एसटीएफ को यही लगा रहा था कि यह स्थानीय रूप पर काम करने वाले जालसाज़ों का ही काम है पर जिस तरह से खाते खोलने के लिए इन लोगों को अलग अलग शहरों तक जाने के लिए हवाई टिकट भी उपलब्ध कराये गए उसके बाद मामले की गंभीरता भी पता चली. अभी तक की यह जाँच एसटीएफ द्वारा की जा रही थी पर अब इसकी जांच में उसे और अधिक अधिकार न होने के कारण यह जाँच सीबीआई की बैंकिंग फ्रॉड शाखा को दिया जा सकता है जिससे इस मामले में पूरे खुलासे किये जा सकें और आगे से क्लोन चेक के मामले में ग्राहकों को भी सचेत किया जा सके.
                                                                       पूरे काम को अंजाम देने में ये जालसाज पहले किसी बड़े व्यापारी के पुराने चेक से हस्ताक्षर कॉपी करते हैं और फिर उसी नाम से दूर दराज़ के किसी शहर में उसी बैंक में उस व्यापारी की फ़र्ज़ी आईडी लगाकर एक नया खाता खोल लेते हैं. नए खाते की चेक बुक हासिल होते ही उसके माइकर कोड और खाता संख्या बदलने का काम किया जाता है. इस तरह से अब इनके पास क्लोन चेकबुक उपलब्ध हो जाती है जिसमें वे अपनी सुविधा के अनुसार लाखों रूपये भरकर अपने नाम से खोले गए फ़र्ज़ी खातों में जमा कर लेते हैं तथा रुपया खाते में आते ही पूरी रकम निकाल लेते है और किसी को भी यह पता नहीं चल पाता है कि रुपया कहाँ चला गया ? इस पूरी कवायद में एक बार फिर से बड़े व्यापारियों के सामने चेकबुक की सुरक्षा का प्रश्न उठा खड़ा हुआ है क्योंकि उनको अपने काम निपटाने के लिए रोज़ ही लाखों रुपयों का लेन देन चेक के माध्यम से ही करना पड़ता है और फिलहाल इसका कोई अन्य विकल्प भी नहीं दिखाई देता है.
                                                                   वैसे देखा जाये तो इस मामले में कहीं न कहीं बैंक और ग्राहक दोनों की ही लापरवाही होती है क्योंकि ग्राहक द्वारा कोई भी चेक किसी को दी जाती है तो सामान्य परिस्थितियों में वह सम्बंधित व्यक्ति और बैंक के कब्ज़े में ही रहती है पर जालसाज़ों को इस तरह से ये चेक कहाँ से मिल रही हैं यह भी सोचने का विषय है. किसी भी बैंक में खाता खोले के लिए जिस तरह से आज पेपर वर्क करना पड़ता है तो उस परिस्थिति में बैंक की लापरवाही के बिना कोई फ़र्ज़ी खाता कैसे खोल सकता है ? बैंकों को भी नए स्थानों पर खुलने वाली अपनी शाखाओं में सुरक्षा और पहचान से जुड़े मामलों में अधिक सख्ती बनाये रखनी चाहिए क्योंकि कई बार अधिक खाते खोलने के दबाव में इस तरह के आवश्यक प्रपत्रों की जांच पर ध्यान नहीं दिया जाता है. बैंकों को सुरक्षा के और बड़े स्तर पर ध्यान देना चाहिए और इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के लिए ग्राहकों को प्रोत्साहन और सेवा शुल्क में छूट देने के बारे में सोचना चाहिए जिससे आने वाले समय में इस तरह की समस्या से बचा जा सके. ग्राहकों को भी चेकबुक संभाल कर रखनी चाहिए और किसी भी चेक के बारे में सचेत रहकर ही अपने को सुरक्षित रखा जा सकता है.    
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