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Tuesday, 23 September 2014

पीएम के कार्यक्रम की शालीनता

                                                                              कर्नाटक के तुमकुर में पीएम के बुधवार के दौरे को लेकर जिस तरह से भाजपा ने अपने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किया हैं उससे यही लगता है कि कम से कम वहां की इकाई ने इस बात को गंभीरता से लिया है कि पीएम के किसी भी आधिकारिक कार्यक्रम को किसी भी तरह की राजनीति से पूरी तरह से मुक्त रखा जाये. इससे पूर्व महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखण्ड में पीएम के सरकारी कार्यक्रमों में जिस तरह से स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं ने गैर भाजपाई दलों के सीएम के भाषणों में व्यवधान डाला और उन्हें बोलने का अवसर नहीं दिया उसकी सभी दलों ने कड़ी आलोचना की थी पर भाजपा ने इस तरह की घटनाओं का यह कहकर बचाव किया था कि जनता अन्य लोगों को सुनना नहीं चाहती है ? लोकतंत्र को पार्टियों कि सुविधा के अनुसार हांका नहीं जा सकता है और अभी तक भाजपा लोकतंत्र को कुछ इस तरह से ही अपनी सुविधानुसार आगे बढ़ाना चाहती है.
                                                                   पीएम के रूप में कोई भी व्यक्ति देश का प्रतिनिधित्व करता है और जब कोई भी सरकारी कार्यक्रम हो तो उसमें अभी तक इस तरह की छिछली राजनीति कभी भी नहीं की जाती रही है फिर भी भाजपा ने अपनी स्थानीय इकाइयों की इस तरह की हरकतों को नज़रअंदाज़ किया उसके बाद से ही अन्य जगहों पर भी यही घटनाक्रम दोहराया गया जिसके बाद भाजपा ने इसको रोकने के स्थान पर बड़ी ही बेशर्मी से इसका बचाव किया था. देश में स्थापित लोकतंत्र है और उसका सम्मान पूरी दुनिया के लोग किया करते हैं पर इस तरह से लोकतंत्र में किसी को दबाने का काम करने वाले सत्तारूढ़ दल की मानसिकता किस स्तर तक काम करती है यह भी पता चल जाता है ? जो विपक्ष में हैं उनको भी इस तरह के हथकंडों से बचना ही चाहिए क्योंकि सीएम और पीएम राज्य व देश में लोकतंत्र के सर्वोच्च प्रतिनिधि हुआ करते हैं जिनकी अवमानना करना किसी भी स्तर पर शोभा नहीं देता है.
                                                                    वरिष्ठ भाजपा नेता आर अशोक ने जिस तरह से पार्टी कार्यकर्ताओं को इस कार्यक्रम के लिए स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किये हैं वे अपने आप में महत्वपूर्ण हैं अब यह तो बुधवार को ही पता चल पायेगा कि उस पर वास्तव में कितना अमल किया जाता है और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की मंशा किस हद तक इस तरह की अभद्रता रोकने में है ? पार्टियों के पास लोकतंत्र में अपने बात कहने का पूरा हक़ है और यदि भाजपा अपने इस उत्साही कार्यकर्ताओं का साथ देना चाहती है तो उसे भी पीएम के सरकारी कार्यक्रम के साथ ही उसी शहर में भाजपा का एक कार्यक्रम भी आयोजित करवा लेना चाहिए जिससे इस तरह की अशोभनीय स्थिति से बचा जा सके और भाजपा कार्यकर्ताओं के अहम की संतुष्टि भी हो सके. वैसे कुछ भी हो पहली बार भाजपा ने इस तरह का निर्देश जारी किया है जिससे यह पता चलता है कि संभवतः वह भी इस मसले पर गंभीर है क्योंकि यदि दूसरी पार्टियों ने भी यह रवैया अपना लिया तो पीएम के कार्यक्रम और भाजपा के लिए नयी समस्याएं खड़ी हो सकती हैं.            
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