मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Friday, 9 April 2010

दिल्ली में विकिरण

यह सही है कि देश ने अपने परमाणु कार्यक्रम को बहुत अच्छे और सुरक्षित ढंग से चलाया है पर कल शाम दिल्ली के मायापुरी इलाके में एक कबाड़ी के पास किसी तरह से संदिग्ध रेडियोधर्मी (?) पदार्थ कहाँ से आया इसने पूरे ख़ुफ़िया तंत्र और सरकार की नींद उड़ा दी है. किसी भी तरह से ये पदार्थ खुले बाज़ार में उपलब्ध नहीं हैं तो आखिर किस तरह से ये कितने ही जगहों से होते हुए दिल्ली तक पहुँच गया ? इस तरह के पदार्थ का उपयोग कहीं किसी आतंकी घटना को अंजाम देने और देश की छवि बिगड़ने के लिए तो नहीं किया जाने वाला था ? क्या कबाड़ व्यवसाय से जुड़े किसी व्यक्ति को यह पता भी था कि इस डिब्बे में कितना ख़तरनाक पदार्थ भरा हुआ है ? शायद ये ऐसे बहुत सारे प्रश्न हैं जिनका उत्तर अभी ढूँढने में बहुत समय लगने वाला है फिर भी इतनी सुरक्षा के बाद ऐसे संवेदनशील पदार्थ का दिल्ली तक पहुंचना अपने आप में बहुत बड़ी सुरक्षा चूक तो है ही ? यह भी सही है कि कुछ रुपयों के लालच में पुलिस कोई भी समान कहीं भी ले जाने की पूरी छूट दे देती है जिसका इसी तरह से गलत काम करने वाले फायदा उठा लेते हैं.
    देश में अभी दिल्ली में ही राष्ट्रमंडल खेल होने वाले हैं कहीं ऐसा तो नहीं कि किसी आतंकी संगठन ने इस तरह के पदार्थों की पूरी खेप ही दिल्ली अलग अलग रास्तों से भेज दी हो ? यह सही है कि उनके लिए परमाणु बम बनाना आसान तो नहीं है फिर भी खेलों से पहले दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर वे एक प्रश्न चिन्ह लगाने में वे सफल तो हो ही सकते हैं. यहाँ आने वाले खिलाड़ी, दर्शक इस तरह के विकिरण भरे माहौल में क्या दिल्ली आना चाहेंगें ? हो सकता है कि जिस तरह से पाक में खेलों का ढांचा पूरी तरह से चरमरा गया है उसको देखते वहां के भारत विरोधी तत्व राष्ट्रमंडल खेलों में बाधा डालने का प्रयास कर रहे हों ? अच्छा ही हो कि इस तरह के सारे अंदेशे गलत ही हों क्योंकि अगर एक डिब्बे का पता चला है तो हो सकता है ऐसे कई और डिब्बे भी भेजे गए हों ? अब ऐसे समय में हम नागरिकों की ज़िम्मेदारी बहुत बढ़ जाती है. हम सभी को अपने आस पास कि सभी गतिविधियों पर पैनी नज़र रखनी ही होगी तभी हम देश को और अपने को सुरक्षित कर पाने में सफल हो सकेंगें. देश कि सुरक्षा में लगी पुलिस और अन्य ख़ुफ़िया तंत्र से बहुत अधिक की आशा करने के स्थान पर हमें अपने कर्तव्यों का भी पालन करना ही होगा क्योंकि अगर हमारा आस पड़ोस सुरक्षित है तभी हम सुरक्षित हैं और जब हम सुरक्षित हैं तभी हमारा देश भी सुरक्षित है.    

मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

1 comment:

  1. 10/- me truck sadko per logo ki jaan se khelte hain...saria logo k seene me ghusti hai...qanoon 10/- me patloon ki jeb me chala jata hai...Cobalt-60 ki kya baat...????
    radio nawab

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