मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Wednesday, 6 October 2010

मुशर्रफ ने माना

भारत के खिलाफ पाकिस्तान अपन जन्म के समय से ही षड़यंत्र करता आ रहा है इस बात को अभी तक विश्व बिरादरी मानती तो थी पर उसके बारे में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं होती थी. पाक आज भी हर अंतर्राष्ट्रीय मंच से कश्मीर की बात उठाने से नहीं चूकता है और भारत सरकार हमेशा ही संयम से काम लेती रहती है. एक जर्मन पत्र को दिए गए साक्षात्कार में पाक के पूर्व तानाशाह परवेज़ मुशर्रफ ने इस बात को खुले तौर पर माना है कि भारत में एक रणनीति के तहत पाक चरमपंथियों को मदद करता रहा है यहाँ तक कि पाक ने इन उग्रवादियों को प्रशिक्षण दिलवाने की व्यवस्था भी सेना के माध्यम से कर रखी है. कारगिल घुसपैठ के समय जब पाक के हाथ के सबूत भारत की तरफ से दिए जा रहे थे तो मुशर्रफ खुले आम झूठ बोलकर यह कह रहे थे कि पाक का इसमें कोई हाथ नहीं है और यह आज़ादी की लड़ाई है.
             पाक के किसी बड़े नेता ने आज तक यह कभी स्वीकार ही नहीं किया था कि भारत के उग्रवाद से उसका कुछ भी लेना देना है यहाँ तक मुंबई हमलों के सबूत पाक मानने से साफ़ मुकर गया था. भारत को मुशर्रफ के इस बयान के बाद पाक से सभी तरह के रिश्ते ख़त्म कर देने चाहिए और अब किसी भी वार्ता का कोई भी प्रयास नहीं किया जाना चाहिए, आखिर कब तक वार्ता करने का ज़िम्मा केवल भारत ही निभाता रहेगा ? यह सही है कि मुशर्रफ का कोई ह्रदय परिवर्तन नहीं हुआ है उन्होंने अपनी राजनैतिक पार्टी बनाकर २०१३ के चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है तो ऐसे में उन्हें अब वोटों की ज़रुरत पड़ेगी और वोट आदमी से किसी भी तरह का बयान दिलवा सकते हैं हालांकि मुशर्रफ ने जो भी कहा सही कहा और इससे पाक में कट्टर पंथियों में उनके वोटों में इजाफा होने वाला है.
       पाक की ग़लत नीतियों के कारण ही बांग्लादेश का जन्म हुआ और आज भी वह केवल इस्लाम के नाम पर पाक को एक रखना चाहता था जो कि उसकी ग़लत फहमी ही साबित हुई ? पाक ने कभी भी मूलभूत सुविधाओं की तरफ़ ध्यान ही नहीं दिया और जब उसे असंतोष का अंदाज़ा हुआ तब तक बहुत देर हो चुकी थी. मुशर्रफ ऐसी बातें करते समय असलियत भी भूल गए उन्होंने कहा कि अमेरिका और अन्य देशों ने पाक के टुकड़े होते समय कुछ भी नहीं किया जबकि वास्तविकता यह थी कि इंदिरा गाँधी के कड़े तेवरों के कारण ही हिंद महासागर में भारतीय तट के काफी समीप आने के बाद भी अमेरिका इस बात की हिम्मत नहीं जुटा पाया था कि वह खुले आम भारत पर पाक के समर्थन में हमला कर दे. अब जब मुशर्रफ राजनीति में आ रहे हैं तो वे और भी बहुत कुछ कहने वाले हैं जिसको सुनना अमेरिका को कभी अच्छा नहीं लगता क्योंकि अमेरिका भारत को संयम का पाठ पढ़ाने से नहीं चूकता है और साथ ही वह इस बात को भी भूल जाता है कि संयम की भी एक हद होती है और अब कुछ लोग कहना शुरू कर चुके हैं कि अगर अब मुंबई जैसा कोई हमला होता है तो भारत पाक में घुसकर वार भी कर सकता है.   

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