मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Monday, 7 February 2011

जमात-उद-दावा का दुस्साहस


            पाक अभी तक सच का सामना करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया है जिसका ताज़ा उदाहरण लाहौर में कश्मीर के समर्थन में किये गए एक सम्मलेन से मिला जिसमें जमात-उद-दावा के प्रमुख ने भारत को ललकारा और पाक सरकार उनकी बातों को केवल सुनती ही रही. वैसे यह कोई नयी बात नहीं है क्योंकि पाक में धार्मिक नेता, सेना और सरकार के लोग बराबर ही भारत के खिलाफ़ ज़हर उगलते रहते हैं पर इस बार जिस तरह से सईद ने सीधे भारतीय प्रधानमंत्री को यह कहने का दुस्साहस किया कि वे या तो कश्मीर छोड़ दें या फिर युद्ध के लिए तैयार रहें ? किसी के कुछ भी कहने से कुछ नहीं होने वाला है पर जिस तरह के संकेत इन जेहादियों से मिलते रहते हैं वे पूरी दुनिया के लिए चिंता की बात हैं.  कल को ये जेहादी पाक के परमाणु हथियारों पर कब्ज़ा कर लें तो आख़िर क्या होगा ? हर समय पाक के साथ रहने वाला अमेरिका भी तब क्या कर लेगा ?
         जिस तरह से सईद ने कश्मीर के लिए एटमी जंग तक छेड़ने की बात कि वह क्या पाक सरकार के समर्थन के बिना कही जा सकती है ? आज पाक जिन हथियारों का निर्माण अपनी सुरक्षा के नाम पर कर रहा है वही आमने वाले समय में उसके लिए सबसे बड़ी मुसीबत बनने वाले हैं. पाक में जिस तरह से अराजकता बढ़ती जा रही है उसको देखते हुए कभी भी वहा के हालत अफगानिस्तान और इराक जैसे हो सकते हैं ? उस स्थिति में जेहाद की घुट्टी पिये हुई पाक की सेना का कोई जेहादी मानसिकता वाला अधिकारी इन परमाणु हथियारों का दुरूपयोग भारत के खिलाफ़ कर सकता है ? अभी भी अमेरिका को यह सब दिखाई नहीं दे रहा है उसके पीछे उसके अपने स्वार्थ छिपे हुए हैं ? आने वाले समय में कोई भी अमेरिका की किसी भी नीति का समर्थन नहीं करेगा क्योंकि इसकी नीतियां केवल स्वार्थ से ही भारी होती हैं ? जब अमेरिका पाक के बारे में सोचना शुरू करेगा तब तक पाक बम चलाने के लिए उलटी गिनती शुरू कर चुका होगा ?
                                        अब भी समय है कि इन जेहादी तत्वों पर पाक सरकार पूरी तरह से रोक लगाये वरना जब वो इनके खिलाफ़ कुछ करना चाहेगी तब तक बहुत देर हो चुकी होगी और तब वह चाहकर भी कुछ नहीं कर पायेगी ? जिस जंग के दम पर सईद भारत से युद्ध करने का दावा करता है वह उसकी जमात समेत पूरे पाकिस्तान को बारूद के ढेर से उठाकर राख में तब्दील करने में एक और कदम ही साबित होगा. सभी जानते हैं कि आज की तारीख़ में पाक एक पूरी तरह से असफल राष्ट्र हो चुका है जिसकी पूरी की पूरी धुरी अमेरिका की सहायता पर टिकी हुई है और जिस तरह से पूरी इस्लामी दुनिया के देशों में लोगों के हकों को मारकर वहां के शासक इस्लाम के नाम पर राज कर रहे थे अब लगता है लोकतंत्र की बयार ने पूरे अरब जगत को छूने का मन बना लिया है ? यह सही है कि लोकतंत्र के माध्यम से कई बार ग़लत लोग भी शासक बन जाया करते हैं पर अधिकतर जगहों पर सुधार ही होता है. जनता के हाथ में शक्ति आने पर वह अपने भले बुरे के बारे में अच्छे से सोचना भी शुरू कर देती है.  
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

2 comments:

  1. काश देश की आजादी के समय कथित कर्णधारों ने नेहरु के बजाय सरदार पटेल की सुनी होती तो आज ये दिन ना देखने पड़ते.......

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