मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Thursday, 21 July 2011

अमेरिका और भारत

       भारत आयीं अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने जिस तरह से भारत का आह्वाहन करते हुए यह कहा है अब समय आ गया है कि भारत को एशिया में आगे बढ़कर अपने दम को दिखाना चाहिए उससे ये लगता है कि कहीं न कहीं अब अमेरिका भी भारत की वास्तविक भूमिका को मानने और समझने लगा है. आज के वैश्विक परिवेश में इस तरह से भारत की हजारों सालों से चली आ रही परम्पराओं और नैतिक मूल्यों को मान्यता मिलने के कारण एक शांति प्रिय देश की छवि भी इसमें बहुत बड़ा योगदान कर रही है. दुनिया जानती है कि भारत ने आज पिछले ५ हज़ार वर्षों में अपनी तरफ से किसी पर भी युद्ध नहीं थोपा है जो कि शायद पूरी दुनिया में इतने बड़े और प्रभावशाली किसी दूसरे देश के बस की बात नहीं थी. किसी के पास कुछ थोड़ा सा भी आ जाता है तो वह अपने प्रभाव से दूसरों को सताने से नहीं चूकता है पर भारत ने अपने विश्व बंधुत्व के मंत्र के कारण हमेशा से ही दूसरों की इज्ज़त की है. अब लोगों को यह लगने लगा है कि यह ही एक मात्र देश है जो आने वाले समय में विश्व को हर तरह से नेतृत्व प्रदान कर सकता है.
      ऐसा नहीं है कि अमेरिका का स्नेह भारत पर ऐसे ही उमड़ा पड़ रहा है आज के समय में जिस मजबूती के साथ भारत दुनिया में आने वाले हर सामाजिक आर्थिक संकट से दृढ़ता के साथ निपटने के साथ अपनी तय स्थिति को नहीं छोड़ता है उससे भी पूरी दुनिया में उसके प्रशंसकों में बढ़ोत्तरी होती जा रही है. भारत की जिस बात को कभी दुनिया कमजोरी समझती थी आज उसे उसकी ताक़त का अंदाज़ा हो गया है. आज अगर अमेरिका को यह लगता है कि भारत को अपनी भूमिका पूरे एशिया में निभानी चाहिए तो यह सही भी है पर इसके पीछे अमेरिका की अपनी समस्याएं भी हैं. एशिया में आकर वह चीन का मुकाबला नहीं कर सकता है और भारत से अच्छा विकल्प उसे दूसरा कहीं से भी नहीं मिलने वाला है. जैसा कि अमेरिका हमेशा से ही करता रहा है जहाँ पर वह खुद कुछ नहीं कर पाता है वहां अपर वह दूसरे के कन्धों का उपयोग करके अपने हितों को साधना चाहता है पर बहुत से मामलों में आज तक उसे ऐसा करने में सफलता नहीं मिली है जिस कारण से वह भारत को और आगे और दुनिया की नज़रों में और स्वीकार्य स्थिति में लाना चाहता है जिससे आने वाले समय में उसे एक विश्वसनीय और प्रभावशाली सहयोगी के तौर पर एक देस मिल जाये.
     ऐसा भी नहीं है कि हिलेरी के कह देने से कुछ अचानक ही बदलने वाला है यह अमेरिका की दूरगामी नीति का हिस्सा है जिसके तहत वह आने वाले समय में पाकिस्तान से पीछा छुड़ाना चाहता है और इसके लिए उसे भारत के करीब आना ही होगा. पाक की तरह भारत में किसी भी सरकार के लिए कुछ भी करना आसान नहीं होता है और इसके कारण किसी भी समय भारत सरकार अमेरिका के मन की बात आसानी से नहीं कर सकती है. आज भारत ने अपने विकास से पूरी दुनिया को चौंका दिया है जिससे सभी को भारत की आवश्यकता समझ में आने लगी है. दुनिया के अधिकतर विकसित देश भारत के बड़े बाज़ार का दोहन कर अपने आर्थिक हितों को साधना चाहते हैं और जिसके कारण वे आज कहीं न कहीं से भारत का गुणगान करने से भी नहीं चूकते हैं. भारत के आत्मसम्मान और स्वाभिमान के सामने इन देशों की कुछ भी नहीं चल पाती है और वे चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते हैं जबकि अधिकतर वे भारत को इस तरह से आगे बढ़ता हुआ देखकर मन से खुश भी नहीं हो पाते हैं पर मजबूरी में भारत की प्रशंसा करके अपने संबंधों को मज़बूत भी बनाना चाहते हैं. अब हमारे चेतने और जागने का समय है जब दुनिया हमें बुला रही है तो हमें अपने स्वार्थ और यहाँ पर व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त कर पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवाने की तरफ छलांग लगानी ही होगी.         
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

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