मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Monday, 19 September 2011

भूकंप और आपदा प्रबंधन

सिक्किम में आये भूकंप के बाद से एक बार फिर से यह बात सामने आ गयी है कि आपदा प्रबंधन के मामले में देश को अभी भी बहुत कुछ किया जाना शेष है किसी भी तरह की आपदा आने पर हम जिस तरह से बदहवासी में भगदड़ मचाते हैं उससे आपदाओं की तीव्रता बढ़ ही जाया करती है. देश में आम नागरिकों को आज तक यह बताया तो जाता है कि किसी भी तरह से भूकंप आने पर हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए पर जनता उस पर कितना अमल कर पाती है यह कभी भी सामने नहीं आ पाया है. देश का उत्तरी भाग भूकंप के हिसाब से अति संवेदनशील मन जाता है जिससे यहाँ पर बहुत बार बड़े भूकम्पों के आने से बड़ी तबाही मचती रही है फिर भी अभी तक कुछ ऐसा नहीं किया जा सका है कि इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में हमारी जनता शिक्षित हो सके और अपने साथ दूसरों की भी जान बचा सके और कई बार इन बातों से अनभिज्ञ होने के कारण भी हमारे क़दम हमारे किये समस्या पैदा कर दिया करते हैं.
   आपदा प्रबंधन से जुड़े विषय को हर तरह से बच्चों की शिक्षा में शामिल किया जाना चाहिए जब हम ऐसे स्थान पर रह रहे हैं कि भूकंप कभी भी आ सकता है तो इसका सही उपाय यही है कि हम इसके आने पर किस तरह से अपने जीवन को सुरक्षित रखें इस बात पर अधिक जोर दिया जाना चाहिए. अगर बच्चों को विद्यालयों में यह सिखाया जाता रहेगा तो वे आवश्यकता पड़ने अपर इस पर अमल भी कर सकेंगें वरना अनजाने में कई बार कुछ ऐसा भी हो जाया करता है जिससे जान ख़तरे में भी पड़ सकती है. बच्चों के सीखने  की उम्र में उन्हें अगर कुछ भी सिखाया जायेगा तो वे अच्छी तरह से सीख कर उस पर अमल भी करने की स्थिति में होंगें पर देश में इस मामले में जिस तरह से खानापूर्ति की जाती है उसका कोई लाभ नहीं मिला करता है. इस मामले में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता होती है जबकि हम केवल रस्म अदायगी में ही विश्वास किया करते हैं. यह सही है कि सरकार हर जगह जाकर नहीं बता सकती है पर नागरिकों को इसके लिए तैयार तो किया ही जा सकता है जिससे समय आने पर हम ज़िम्मेदार नागरिकों की तरह व्यवहार कर सकें.
   आपदा को केवल भूकंप तक ही सीमित नहीं रखा जाना चाहिए क्योंकि देश के अधिकांश भागों में अचानक आई बाढ़ भी कहर बनकर लोगों के लिए मुसीबतें खड़ी किया करती है तो इस बाढ़ के समय भी बचाव के क्या उपाय किये जाने चाहिए यह भी इस स्थानों में रहने वाले लोगों को सिखाया जाना चाहिए. बाढ़ आने वाले स्थानों पर नागरिकों को किन वस्तुओं के सहारे बचा जा सकता है यह भी बताया जाना चाहिए यहाँ पर अन्न का भंडारण भी किस तरह से किया जाए जिससे बाढ़ आने पर अन्न का नुकसान न हो ? गांवों में कुछ ऊंचे स्थान चिन्हित करके उन्हें मनेरगा के तहत मज़बूत रहने का प्रयास भी किया जाना चाहिए जिससे बाढ़ आने पर लोग वहां पर शरण भी ले सकें. यह ऐसे छोटे छोटे क़दम हैं जिन पर अमल करके हम किसी भी प्राकृतिक आपदा का सामना अच्छे से कर सकते हैं. अब भूकंप आने के बाद एक बार फिर से टीवी और अख़बारों में विज्ञापन दिखाई देने लगेंगें पर वास्तव में इनसे कोई लाभ नहीं मिलने वाला है क्योंकि इस तरह के अभ्यास को साल नें दो बार अवश्य ही कराया जाना चाहिए कि भूकंप आने पर क्या करें और क्या न करें ? देश हित में सभी संचार माध्यमों के लिए यह आवश्यक कर दिया जाना चाहिए कि वे आपदा प्रबंधन से जुड़े जागरूकता कार्यक्रमों के लिए नि:शुल्क स्थान और समय देंगें जिससे उनके द्वारा भी इस काम में सहयोग किया जा सके. यह देश हित से जुड़े मुद्दे हैं तो इस पर किसी भी तरह से सरकार को आवश्यक रूप से पैसे नहीं खर्च करने चाहिए.

मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

1 comment:

  1. आपने सही कहा है। किसी भी प्रकर्तिक आपदा से बचने के लिए ज़रूरी है की बच्चों को इसके लिए तयार किया जाना चाहिए। मगर केवल यही नहीं ऐसी कई स्मसियायें नहीं है, हमारे देश में तो ना जाने कितनी ऐसी छोटी बड़ी स्मसियाँ हैं जिंनका समाधान किया जा सकता है। मगर जागरूकता के अभाव के कारण कुछ हो ही नहीं पता है....
    बढ़िया पोस्ट समय मिले कभी तो आयेगा मेरे पोस्ट पर आपका स्वागत है
    http://mhare-anubhav.blogspot.com/

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