मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

गुरुवार, 1 मार्च 2012

दिल्ली पर आतंकी नज़रें

        एक बार फिर से जिस तरह से दिल्ली में संदिग्ध आतंकियों की गिरफ़्तारी हुई है उससे यही पता चलता है कि आतंकी किसी भी सूरत में वहां पर हमले करने की फ़िराक़ में हैं. पहले के मुकाबले अब देश और दिल्ली में ख़ुफ़िया तंत्र की पकड़ कुछ मज़बूत हुई है जिससे कई ऐसे संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया गया है जिनसे सुरक्षा सम्बन्धी ख़तरे होने की आशंका थी. आज भी जिस तरह से आम नागरिक अपनी इन सुरक्षा चिंताओं के बारे में पहले की तरह ही लापरवाह बना हुआ है उसके कारण ही देश का कोई भी हिस्सा इस तरह के खतरों से अछूता नहीं है ? जिस तरह से आम नागरिकों की तरफ से पुलिस द्वारा सुझाये गए सुरक्षा उपायों की लगातार अनदेखी की जा रही है उससे यही लगता है कि आज भी दिल्ली जैसी जगहों पर रहने वालों को इस बात से कोई मतलब नहीं है कि उनके आस पास कौन रहने आया है या फिर कौन किस तरह के कामों में लगा हुआ है ? दिल्ली समेत पूरे देश में इस तरह के सुझाव पुलिस द्वारा दिए गए हैं कि किसी को भी अपने यहाँ काम करने या किरायेदार के रूप में रखने से पहले उसकी पुलिस द्वारा आवश्यक जांच करवा लें या पुलिस को उस बारे में सूचित करे पर आम लोग इस बात पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं जिस कारण से भी इन आतंकियों को रुकने तारने में आसानी होती रहती है.
      यहाँ पर यह ध्यान देने वाली बात है कि इस तरह से घनी आबादी के बीच कहीं से भी आकर रहने वाले लोग ही संदिग्ध हो सकते हैं या फिर वे अपने इस तरह के किसी संक्षिप्त प्रवास के दौरान स्थानीय लोगों को आतंकियों के बारे में बताकर उनके मन में आतंकियों के बारे में सहानुभूति पैदा करने का काम कर सकते हैं ? आज जिस तरह से आतंकी संगठन समाज के हर वर्ग पर अपना जाल फ़ेंक रहे हैं तो ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि किसी को छोड़ देंगें क्योंकि उनका सारा ताना बाना अब स्थानीय निवासियों और अपने स्लीपिंग सेल पर ही टिका हुआ है. इस्राइल दूतावास की गाड़ी पर हमले के बाद से दिल्ली में पुलिस की गतिविधियाँ बढ़ी हुई हैं जिससे भी किसी भी तरह की संदिग्ध हरकतों पर पुलिस का ध्यान अधिक है. अब आतंकी जिस तरह से दिल्ली के कालेज जाने वाले युवा वर्ग को अपना निशाना बनाने की फ़िराक़ में हैं उससे बहुत सावधानी से बचने की आवश्यकता है क्योंकि इन स्थानों पर बड़ी संख्या में विद्यार्थी रहते हैं और बेहतर पढ़ाई और भविष्य की तलाश में कश्मीर समेत पूरे भारत से बच्चे यहाँ पर आते हैं ऐसे में इनको किसी बात पर बहलाना आसान होता है. आतंकियों का कोई ईमान नहीं होता है तभी वे इस तरह से पढ़ाई के लिए आने वाले बच्चों में अपने माड्यूल स्थापित करने की कोशिश करते हैं. 
         अब सबसे बड़ी बात यह है कि जो अभियान आतंकियों ने कश्मीर घाटी में चलाकर उसे पूरे देश से काटने का प्रयास किया था अब वे वहां पर सामान्य होती जिंदगी में कुछ बहुत बड़ा कर पाने में सफल नहीं हो पा रहे हैं जिससे उन्हें कश्मीर को लेकर पूरे देश में संदेह बनाये रखने में दिक्कतें हो रही हैं ऐसे में वे देश भर में पढ़ने जाने वाले कश्मीरी विद्यार्थियों पर अपनी उम्मीदें टिकाये हुए हैं. अब इस बात की ज़िम्मेदारी जम्मू कश्मीर सरकार समेत पूरे प्रान्त पर है कि वहां से जो भी लोग जिस काम से देश के किसी भी हिस्से में जा रहे हैं उनके बारे में सही सूचना उपलब्ध कराएँ क्योंकि इनमें से ही कुछ लोग देश में कश्मीर का नाम बदनाम करने में लगे हुए हैं. बहुत दिनों के बाद अब कश्मीर घाटी में कुछ अमन है और देश भर से पर्यटक वहां पर जाने लगे हैं तो ऐसे में संदेह का कोई भी काम वहां का पर्यटन उद्योग के लिए बहुत नुकसानदेह साबित होने वाला है. देश के लोगों में कश्मीरियों को लेकर जो संदेह आतंकी बनाये रखना चाहते हैं अब उसको ख़त्म करने की ज़िम्मेदारी भी कश्मीरियों की ही है. आतंकियों को खून खराबा चैये पर अब कश्मीरियों को यह तय करना है कि क्या वे अब भी पिछले २० वर्षों की तरह आतंकियों के साए में जीना चाहते हैं या फिर आज के माहौल को बनाये रखना चाहते हैं ? बहुत खून बह चुका है झेलम में अब वहां पर केवल विकास की बातें ही होनी चाहिए क्योंकि देश के साथ अब कश्मीर की भी यही ज़रुरत है.      
 
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

1 टिप्पणी:

  1. आम आदमी ही सब कुछ कर लेगा तो खास की आवश्यकता क्या है. कश्मीर में कश्मीरी पण्डित लौटने लगे क्या??

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