मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Saturday, 26 January 2013

नाबालिग और कानून ?

                           दिल्ली गैंग रेप के सबसे बड़े और पीड़िता के साथ सबसे जघन्यतम हरक़त करने वाले छठे आरोपी ने नाबालिग होने की ओट में जिस तरह से अपने को बचाने की कोशिश की है उसके बाद आम जनता का आक्रोश इस तरह के कानूनी कमज़ोरी और दांव पेंचों से बचने की जुगत के कारण बढ़ना तय ही है. सभी जानते हैं कि इस छठे आरोपी ने ही जिस तरह से उस काली रात को दोनों को आवाज़ लगाकर बस में बैठाया था और सभी की तरह उस लड़की के साथ घिनौनी हरक़त करने के बाद उसने ही लड़की के साथ क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं थीं फिर भी यदि हमारा कानून इस तरह से किसी क्रूर अपराधी को केवल नाबालिग होने के कारण ही छोड़ दे तो आने वाले समय में इस तरह की नज़ीर भी बन सकती है भविष्य में भी कोई नाबालिग इसी तरह से किसी के साथ दुष्कर्म करके केवल ३ साल की सज़ा काटकर आराम से घर जा सकता है और वह अपनी उम्र के साथ बचाव की कोई राह निकाल ही लेगा क्योंकि उस रात उस बस में जो कुछ भी हुआ उससे उस अपराधी का अपराध उम्र कम होने के कारण कुछ कम नहीं हो जाता है ?
              यहाँ पर विचार करने योग्य यह बात ही हो सकती है कि आख़िर किन परिस्थितियों में इस तरह के अपराधियों के अपराध को कम करके आँका जा सकता है और जब भी इस तरह का कोई घृणित अपराध होता है तो अपराधियों को उससे बचने की कोई राह इतनी आसानी से क्यों दिखाई दे जाती है ? चाहे जो भी हो इस बिरले मामले में अब सरकार और कोर्ट को भी कुछ खुद ही प्रयास करके उस दिवंगत लड़की के प्रति कुछ सम्मान दिखाना ही होगा क्योंकि जब तक ऐसे कठोर क़दम सभी के साथ नहीं उठाये जायेंगें तब तक इस तरह से महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाले अपराधों में कोई कमी नहीं आने पाएगी फिर कानून और समाज चाहे जितने भी प्रयास कर ले क्योंकि जब एक जैसी परिस्थितियों में अपराधियों पर एक जैसा मुक़दमा ही नहीं चलाया जा सकता है तो इस तरह के कानून से क्या समाज में आक्रोश पैदा नहीं होगा ? पहले ही जिस तरह से इस पूरे मामले में देश की युवा पीढ़ी ने बढ़ चढ़ कर सरकार पर दबाव बनाने का काम किया है उसे देखते हुए इस अपराध में शामिल सबसे क्रूर इस कथित नाबालिग को केवल ३ साल की सज़ा देकर कैसे छोड़ना उसे गवारा होगा ? क्या इतने बड़े अपराधी को ३ साल में खुलेआम घूमने की आज़ादी दी जा सकती है ?
             यदि यह अपराधी केवल अपराध में शामिल ही होता और अन्य लोगों की तरह उसने भी केवल लड़की के साथ बलात्कार ही किया होता तब भी उसे छोड़ने का कोई मतलब नहीं बनता था और जिस तरह से आज के समय में बच्चे जल्दी ही बड़े हो रहे हैं तो उस स्थिति में तो यह समाज और सरकार के लिए बड़ा सरदर्द बन सकता है क्योंकि किसी के साथ इतना घृणित काम करने के बाद कोई भी नाबालिग अपनी उम्र के हवाले से आसानी से बड़ी सज़ा से बच जायेगा ? किसी से बदला लेने के लिए भी कोई नीच मानसिकता का व्यक्ति अपने नाबालिग बच्चे को इस तरह से भड़काकर उसे आराम से ३ साल के बाद जेल से घर ल सकता है जबकि जिसके साथ यह अपराध किया जायेगा और जो भी पीड़ित होगा उसके लिए यह पूरे जीवन भर का नासूर बन जायेगा ? अब समय आ गया है कि अपराधियों की श्रेणियों का काम करने वाले इस तरह के तथाकथित नाबालिगों पर कानून का शिकंजा कसा ही जाना चाहिए देश के कानून में यदि इस तरह के अपराधों से बचाव की सुविधा बच्चों को दे दी गयी तो हो सकता है कि आने वाले समय में आतंकी इन बच्चों का दुरूपयोग करके अपने मंसूबों को कमज़ोर कानून के सामने ही पूरा करने में लग जाएँ तब क्या कानून किसी बाल आतंकी को इस तरह से केवल ३ साल की सज़ा देकर ही छोड़ देगा ? घिनौने और क्रूरतम काम को अंजाम देने वाले के साथ कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए और उसे भी वही सज़ा मिलनी चाहिए जो अन्य आरोपियों को दी जाए.           
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

1 comment:

  1. विपक्षी दलों की राजनीति के बारे में इस लेख में कुछ भी नहीं लिखा.

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