मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Sunday, 17 March 2013

बैंकिंग पर सवाल ?

                  एक स्टिंग ऑपरेशन में जिस तरह से देश में निजी क्षेत्र के तीन बैंकों पर हवाला के ज़रिये काले धन को सफ़ेद करने के गोरखधंधे की बात सामने आई है वह किसी भी तरह से तेज़ी से विकास की तरफ बढती हुई देश की अर्थ व्यवस्था के लिए कहीं से भी अच्छी नहीं कही जा सकती है क्योंकि अभी तक यही माना जाता था कि देश के कानून का सम्मान करते हुए ये निजी क्षेत्र के बैंक नियमानुसार ही काम करते रहेंगें पर उनकी इस हरक़त से जहाँ आम लोगों का एक बार फिर से निजी क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों पर से विश्वास कम हो जायेगा वहीं दूसरी तरफ नए बैंकों को मिलने वाले लाइसेंस के बाद उनके लिए काम करने में बड़ी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं क्योंकि इस तरह से वित्तीय क्षेत्र में एक दम से इस तरह का खुलासा लोगों को सरकारी बैंकों की तरफ जाने को मजबूर भी कर सकता है. देश में हर क्षेत्र में तेज़ी से विकास हो इस उद्देश्य को ध्यान में ही रखते हुए इस तरह से निजी क्षेत्र के बड़े बैंकों की परिकल्पना की गयी थी साथ ही यह आशा भी लगायी गयी थी कि इससे उत्पन्न होने वाली प्रतिस्पर्धा से सरकारी क्षेत्र के बैंकों में काम काज और प्रभावी तरह से ग्राहक सेवा में बदलाव लाया जा सकेगा.
                        यह भी सही है कि इन निजी क्षेत्रों के बैंकों द्वारा कारोबार शुरू करने की कोशिश के साथ ही सरकारी बैंकों में भी एक कार्य करने की संस्कृति विकसित होनी शुरू हुई है और ग्राहकों को वे सुविधाएँ प्रतिस्पर्धा के कारण जल्दी ही मिलने लगीं जो संभवतः मिलने में काफी समय लग जाने वाला था पर साथ ही इन बैंकों के बारे में इस खुलासे के बाद अब इन पर नियंत्रण रखने वाले तंत्र पर ही सवालिया निशान लग गया है ? ऐसा नहीं है कि इन बैंकों के चंद अधिकारियों द्वारा जो कुछ भी अनियमितताएं की गयी हैं उनमें पूरे बैंक का कोई जुड़ाव हो पर इस तरह से बैंक जैसे प्रतिष्ठित संसथान से हवाला कारोबार को बढ़ावा देने की यह कोशिश आख़िर किस तरह से सही ठहराई जा सकती है ? देश में बैंकिंग क्षेत्र के विकास की असीमित संभावनाएं हैं क्योंकि आज भी आम आदमी की पहुँच से ये बैंक दूर ही हैं और उस स्थिति में निजी क्षेत्र के बैंकों में इस तरह से कुछ भी सामने आने से बाज़ार और वित्तीय क्षेत्र में अफरा तफरी का माहौल बनता है जो लम्बे समय में इस क्षेत्र के लिए बहुत नुकसान देह साबित हो सकता है.
                  ऐसा भी नहीं है की सरकारी क्षेत्र के बैंकों में सारा काम ठीक ढंग से ही किया जा रहा हो और वहां पर भी इस तरह की वित्तीय अनियमितताएं दिखाई देती रहती हैं पर उसका मतलब पूरे बैंक को ज़िम्मेदार ठहराकर नहीं निकला जाना चाहिए क्योंकि इस तरह से अनैतिक काम करके कुछ हासिल करने वाली मानसिकता वाले लोग हर जगह और हर क्षेत्र में पाए जाते हैं इसलिए अब आवश्यकता इस बात की है कि देश में आर्थिक निगरानी तंत्र को और मज़बूत किया जाए जिससे आने वाले समय में कोई भी बैंक इस तरह के काम करने पर आसानी से पकड़ में आ सकें ? देश में पहले से ही बहुत सारे कानून और नियम मौजूद हैं पर उन पर सही तरह से अमल किया जाना हम आज तक सीख ही नहीं पाए हैं और जब तक देश में कानूनों पर स्वेच्छा से चलने की संस्कृति विकसित नहीं हो पायेगी तब तक किसी भी परिस्थिति में देश के किसी भी क्षेत्र को केवल डंडे के जोर से सुधारने में पूरी सफलता नहीं मिल पायेगी ? अब समय है कि हम अपने आस पास की आर्थिक गतिविधियों को सही करवाने में सरकार की मदद करने की कोशिश करें क्योंकि सरकार भी वही कर पायेगी जो हम उससे करवाने में सफल हो सकेंगें.  
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1 comment:

  1. ऊपर वालों के बिना कुछ भी नहीं होता.

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