मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Sunday, 26 May 2013

महेंद्र कर्मा का जाना

                     छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर जिस तरह से नक्सालियों ने घात लगाकर हमला किया और उसके बाद पूरी यात्रा को घेरकर दो घंटे तक उन पर अंधाधुंध गोलीबारी की उससे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में राज्य और केंद्र के राजनैतिक दलों और नेताओं की सुरक्षा पर एक बार फिर से संकट मंडराने लगा है क्योंकि चुनावों के समय या उससे पूर्व की सामान्य तैयारियों के चलते नेता लोग अधिक सुरक्षा वाले घेरे को तोड़कर अक्सर ही जनता के बीच तक जाने का प्रयास करते रहते हैं जिस कारण से आतंकियों के लिए इस तरह के हमले कर पाना आसान हो जाता है. देश के इतिहास में किसी भी भी राजनैतिक दल के नेताओ और कार्यकर्ताओं में नक्सालियों द्वारा पहली बार इस तरह का हमला किया गया है जिसमें बड़े नेताओं समेत १७ लोगों की मौत हो गयी है और बहुत अन्य गंभीर रूप से घायल भी हैं. देश में नक्सल समस्या ने पहली बार इस तरह से राजनैतिक दलों को चुनौती दी है और चुनावी वर्ष होने के कारण नेताओं का राज्य में निकलना ही होगा जिससे वे और भी बड़े ख़तरे के पास पहुँचते हुए दिखाई देंगें.
                    नक्सलियों ने जिस तरह से पूरी प्लानिंग के साथ इस हमले को अंजाम दिया उसके बाद हमारे राजनेताओं और उनकी सुरक्षा में लगे हुए तंत्र की विफलता पूरी तरह से खुलकर सामने आ गयी है इस यात्रा में मुख्य निशाने पर महेंद्र कर्मा ही थे क्योंकि उन पर इससे पहले नक्सलियों ने कई बार हमला कर उनकी जान लेने की कोशिशें की हैं पर वे अपने मक़सद में कामयाब नहीं हो पाए थे. इस बार जिस बेरहमी से आतंकियों ने उन पर दो सौ से अधिक गोलियां दागीं उससे यही पता चलता ही कि नक्सली उनकी जान लेने के लिए किस तरह से बेताब थे क्योंकि यह वही महेन्द्र कर्मा थे जिन्होंने छत्तीसगढ़ में सबसे पहले सलवा जुडुम की शुरुवात की थी और उसकी उपयोगिता और आम लोगों की सुरक्षा में सफलता को देखते रमण सिंह की सरकार ने इसे सरकारी तौर पर मान्यता दे दी थी जिससे नक्सलियों के प्रभाव वाले क्षेत्रों में उनके आतंक से लड़ने के लिए आम लोगों को भी कुछ हथियार मिलने लगे थे और इन हथियारों के भरोसे कई बार सुरक्षा बलों के पहुँचने तक ग्रामीणों ने नक्सलियों से खूब मोर्चे संभाले थे. सलवा जुडुम शुरू से ही विवादों में घिरा रहा है और इस पर तरह तरह के आरोप भी लगते रहे हैं पर निहत्थे ग्रामीणों के हाथ में अपनी सुरक्षा करने के लिए इससे कुछ तो हासिल ही हुआ था.
                      फिलहाल इस हमले ने जहाँ नेताओं को और सचेत रहने को मजबूर किया है वहीं सलवा जुडुम से जुड़े हुए लोगों के लिए भी एक चेतावनी जारी कर दी है इस स्थिति में अब केंद्र और नक्सल प्रभावित राज्यों की सरकारों को मिलाकर प्रयास करने के बारे में सोचना ही होगा क्योंकि नक्सलियों ने आज कांग्रेस पर हमला किया है तो कल वे किसी अन्य राजनैतिक दल पर भी इसी तरह से आक्रमण कर सकते हैं क्योंकि नेताओं की सुरक्षा बलों के समान उतनी सुरक्षा लेकर चल पाना भी लगभग असंभव ही है इसलिए इस आन्दोलन को कुचलने के प्रयास के साथ ही नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास को सही तरह से पहुँचाने की आवश्यकता पर भी ध्यान देना होगा क्योंकि विकास के लिए समान अवसर न मिल पाने के कारण ही कुछ लोगों को नक्सली अपने कैडर के माध्यम से जोड़ने का काम किया करते हैं. यदि विकास की सही धारा इन क्षेत्रों तक पहुँचाने में हम सफल हो सके तो नक्सली विचारों को हम आम लोगों पर हावी होने से रोकने में कुछ सफलता पा सकेंगें वरना कभी न रुकने वाला यह निरर्थक संघर्ष हमें विकास के आयामों से दूर ही करता रहेगा.         
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