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Tuesday, 4 June 2013

नया रेल बुकिंग सिस्टम

                                          भारतीय रेलवे के सूत्रों के अनुसार जिस तरह से यह सामने आया है कि रेलवे ने अपने बुकिंग सिस्टम को पूरी तरह से बदलने और इसमें अधिक गति लाने के उद्देश्य से पूरी व्यवस्था को ही नए सिरे से उन्नत बनाने के काम पर अमल करना शुरू कर दिया है. आज के समय में आईआरसीटीसी के माध्यम से ऑनलाइन टिकट बनवाने के लिए यात्रियों को जिस तरह से मशक्कत करनी पड़ती है यह नयी व्यवस्था शायद उससे निजात दिलवाने का काम कर सके. वर्तमान में जो भी सिस्टम काम कर रहा है उसे २००५ में बनाया गया था और उसके बाद से उसे केवल उच्चीकृत ही किया जा रहा है जबकि तब से आज में इस सिस्टम से अपना टिकट बुक कराने वालों की संख्या में बहुत वृद्धि हो चुकी है. आज भी किसी सामान्य यात्री के लिए घर बैठे सामान्य टिकट बुक कराना एक सपने जैसा हुआ पड़ा है और यदि बात तत्काल की हो तो थोड़ी देर की माथापच्ची के बाद पूरा सिस्टम ही जवाब दे जाता है जिससे एक तरफ़ यात्रियों को सुविधा नहीं मिल पाती है वहीं दूसरी तरफ़ उनके लम्बे समय तक साईट पर बने रहने से उस पर भी दबाव बनता है.
                               अच्छा हो कि जिस साईट पर रेलवे की ऑनलाइन बुकिंग कर सारा दबाव है उसे प्रति वर्ष आवश्यकता के अनुस्सर उच्चीकृत किया जाना आवश्यक कर दिया जाए जिससे आम यात्रियों को सुविधा हो और रेलवे को भी सीधे ग्राहकों से संपर्क बनाये रखने में मदद मिल सके. देश में सरकारी तंत्र की क्या स्थिति है यह इससे ही समझा जा सकता है कि लालू के ४ वषों और ममता समेत तृणमूल के कई वर्षों के बाद बंसल के समय में मंत्रालय को यह सुध आई कि इस व्यवस्था को और आधुनिक बनाया जाना चाहिए. रेलवे को अपने यात्रियों के बैंक खाते को भी अपने इस खाते से जोड़ने की दिशा में काम करना चाहिए जिससे टिकट की औपचारिकतायें पूरी करने बाद किसी कारण से साईट बाधित होने पर भी उसके टिकट की धनराशि यात्री के बैंक से प्राप्त की जा सके. इस तरह की व्यवस्था से जहाँ यात्रियों के साईट पर बने रहने का कारण समाप्त हो जायेगा वहीं उन्हें आसानी से टिकट भी मिल जायेगा पर इस सब के लिए यदि नए सिस्टम में कुछ ठोस किया जा सका तो आने वाले समय में टिकट बुकिंग की पूरी परिकल्पना में ही बड़ा बदलाव आ जायेगा.
                                 रेलवे को अपने यात्रियों से निरस्तीकरण शुल्क के बारे में भी पुनर्विचार करना चाहिए क्योंकि जब उसके पास इतनी लम्बी वेटिंग लिस्ट होती है तो चार्ट बनने के समय तक उसे केवल आरक्षण शुल्क की कटौती ही करनी चाहिए और निरस्तीकरण की किसी भी प्रक्रिया में यदि उस ट्रेन में वेटिंग लिस्ट है तो केवल आरक्षण शुल्क काटना चाहिए और यदि कोई यात्री अपने टिकट को मॉडिफाई करना चाहता है तो भी उसे पूरी सुविधा प्रदान की जानी चाहिए और उसकी धनराशि को केवल आरक्षण शुल्क काटकर अगले टिकट में व्यवस्थित करने के बारे में भी सोचना चाहिए. यदि किसी टिकट में वेटिंग लिस्ट नहीं चल रही है तो उस दशा में यात्री से कटौती भी वसूल की जा सकती है क्योंकि रेलवे को उससे नुकसान हो जाता है. पूरी व्यवस्था में बदलाव के साथ यदि हर स्टेशन पर करेंट बुकिंग को शुरू किया जाए तो भी रेलवे की आमदनी को बढ़ाया जा सकता है और टिकट की मारामारी और भ्रष्टाचार को कम करने में सफलता भी मिल सकती है. आने वाले समय में यदि चल निरीक्षक के पास टेबलेट में पूरी जानकारी हो और उसे किसी भी खाली सीट को ऑनलाइन भरने की सुविधा और अनिवार्यता मिल जाए तो किसी भी ट्रेन में कोई भी सीट रेलवे की आमदनी को बढ़ाने का ही काम करेगी.      
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