मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Monday, 1 July 2013

विकास और आधारभूत संरचनाएं

                                      देश में कभी तेज़ी तो कभी धीमी गति से बढ़ते हुए आर्थिक परिदृश्य के बीच जिस तरह से पीएम ने योजना आयोग के माध्यम से ५० राज्यों में छोटे हवाई अड्डों समेत रेलवे की रुकी हुई परियोजनाओं पर तेज़ी से काम करने के निर्देश जारी किए हैं यदि उन पर कुछ साल पहले विचार कर लिया गया होता तो आज विकास की गति और देश में पैदा होने वाले रोज़गार को भी बढ़ाया जा सकता था पर विभिन्न राजनैतिक कारणों से अनिर्णय की स्थिति में जिस तरह से आधारभूत विकास को पूरी तरह से पिछली सीट पर रखा गया था उसक कारण भी देश में आर्थिक परिदृश्य धुंधला दिखाई देने लगा. आज देश के छोटे महानगरों में जिस तरह से आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ती ही जा रही है उस स्थिति में इन स्थानों से देश और विदेश से बेहतर संपर्क बनाये रखने के लिए यदि देश में मंडल स्तर पर छोटे हवाई अड्डों का विकास किया जाए और विभिन्न विमानन कम्पनियों को वहां से परिचालन शुरू करने में करों में छूट दी जाए तो इससे जहाँ एक तरफ़ बड़े शहरों की तरफ़ जाने वाली भीड़ को रोक जा सकेगा और विकास की गति को भी बढाया जा सकेगा.
                                      कभी विश्व में बहुत तेज़ी से आगे बढ़ती हुई भारतीय अर्थव्यवस्था पर इधर कुछ सुस्ती का असर भी दिखाई दे रहा है और इसे कुछ प्रोत्साहन के माध्यम से ही सुधारने की कोशिशें की जा सकती हैं जिन पर यदि पीएम ध्यान देना चाहते हैं तो यह देश के लिए अच्छा ही है पर जिस तरह से चुनावी वर्ष में प्रवेश करने के बाद ऐसे निर्णयों को लिया जाता है तो सरकार की मंशा पर संदेह उत्पन्न होता है क्योंकि यदि सरकारें वास्तव में ऐसा करना चाहती हैं तो उन्हें इसके लिए संसद से बाकायदा काम पूरा होने तक इनके लिए धन उपलब्ध करने की व्यवस्था भी करनी चाहिए और इसके लिए किसी भी सरकार के लिए कुछ बाध्यता भी होनी चाहिए क्योंकि आज तक देश में चलने वाली बहुत सारी परियोजनाओं को सरकारें और दल अपने अनुसार बदलने में कोई चूक नहीं करते हैं जबकि वास्तविकता यह है की देश के किसी भी हिस्से आवश्यक आधारभूत संरचनाओं को मज़बूत करने से पूरे देश को ही उसका लाभ मिलता है और हर तरह की गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सकता है.
                                        आज जिस तरह से आर्थिक गतिविधियों को संचालित करने के लिए अच्छे राजमार्गों और बेहतर रेल नेटवर्क के साथ हवाई सेवाओं की उपलब्धता का महत्त्व बढ़ता ही जा रहा है उससे भी देश को लम्बे समय में काफी लाभ मिल सकता है पर जब हम इस मसले पर निरपेक्ष भाव से आवश्यकताओं पर विचार कर उनको पूरा करने की तरफ़ बढ़ना शुरू कर पाएं क्योंकि अधिकांश बार यही देखा जाता है कि राजनैतिक इच्छाओं और उनकी पूर्ति करने के चक्कर में हमारे नेता आवश्यकताओं पर विचार करना ही नहीं चाहते हैं जिससे कई बार कुछ ऐसा विकास ऐसे स्थानों पर भी हो जाता है जहाँ पर उसकी आवश्यकता ही नहीं होती है और आने वाले समय में वह देश और सरकार के लिए सफ़ेद हाथी ही साबित होते हैं. आज देश के नेताओं में जो समझ विकसित होनी चाहिए वह नहीं दिखाई देती है क्योंकि उन्हें भी अपने दल के हितों से आगे कुछ भी दिखाई नहीं देता है ? ऐसी परिस्थितियों में देश के विकास की आवश्यकताएं कहीं पीछे ही रह जाया करती हैं और राजनीति आगे बढ़कर पूरे विकास के चक्के को रोकने का काम करे लगती है. पीएम द्वारा जिन परियोजनाओं पर प्राथमिकता से काम करने को कहा गया है यदि उसके लिए धन भी समय से उपलब्ध कराया जाता रहे तो विकास की गाड़ी को फिर से पार्टी पर वापस लाया जा सकता है.      
  
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