मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Sunday, 15 June 2014

आंतरिक और बाह्य सुरक्षा

                                                     वाराणसी में १४५ किग्रा अमोनियम नाइट्रेट के सामान्य चेकिंग के दौरान बरामद होने से एक बात तो साफ़ हो ही गयी है कि देश विरोधी तत्व किसी भी तरह से कुछ न कुछ करते ही रहना चाहते हैं पर जिस तरह से पीएम के चुनावी क्षेत्र में यह खेप पकड़ी गयी है उससे यही लगता है कि देश और समाज विरोधी तत्व अब वाराणसी में इस तरह की आतंकी घटना को अंजाम देना चाहते हैं जिससे वे दुनिया में यह सन्देश देने में सफल हो जाएँ कि भारत में सुरक्षा चिंताएं अभी भी कम नहीं हुई हैं. नरेंद्र मोदी के पीएम बनने से जहाँ बहुत से समाज विरोधियों को यह लग रहा है कि अब उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही भी की जा सकती है तो वहीं किसी भी क्रिया की प्रतिक्रिया को भी वे अपने पक्ष में देखने में लगे हुए हैं. नागरिकों को पूरी सुरक्षा मिले इससे कोई भी सरकार इंकार नहीं कर सकती है पर जब देश विरोधियों का ध्यान केवल किसी विशेष जगह पर ही ठहर जाये तो चिंताएं बढ़ना स्वाभाविक भी है.
                                                     वाराणसी देश में आने वाले विदेशी सैलानियों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान सदैव से ही रहा करता है और भारतीय सनातन धर्म के अनुयायी भी किसी न किसी कारण से भी इसे बहुत महत्व देते ही रहते हैं तो उस परिस्थिति में अब यूपी पुलिस के साथ केंद्रीय ख़ुफ़िया एजेंसियों की चुनौतियाँ और भी बढ़ने ही वाली है. भारतीय पर्यटन उद्योग को चोट पहुँचाने के लिए भी आतंकी वाराणसी पर निशाना लगाकर दो काम एक साथ करना चाहते हैं. पहले भी यह शहर आतंकी घटनाओं का शिकार बनता ही रहा है जिसमें निर्दोष नागरिकों का खून बहता ही रहा है. अब जिस तरह से मिल रहे कुछ साक्ष्यों में तालिबान और अल कायदा द्वारा भी अब अपना ध्यान कश्मीर की तरफ लगाया जा रहा है उस परिस्थिति में आतंकियों के स्लीपिंग मॉड्यूल्स के बार में देश को और भी जागरूक और सतर्क रहने की आवश्यकता भी है.
                                                     देश के नागरिकों की सुरक्षा के लिए केवल वाराणसी ही नहीं बल्कि सभी स्थानों को सुरक्षित करने की आवश्यकता है क्योंकि जब तक पूरे माहौल को ही सुधारने में सफलता नहीं मिलेगी तब तक केवल कुछ मामलों पर ध्यान दिए जाने स एकुछ भी नहीं होने वाला है. केवल राजनैतिक कारणों से ही जिस आतंक विरोधी केंद्र का अभी तक गैर कोंग्रेसी दल विरोध किया करते थे अब उसको भी अंजाम तक पहुँचाने की ज़रुरत है. आतंक के मामले में जिस तरह से देश में राजनीति की जाती है अब उससे भी आगे बढ़ने की आवश्यकता है किसी भी संदिग्ध को पकड़े जाने पर उसके ख़िलाफ़ त्वरित कार्यवाही विशेष आतंक निरोधी न्यायालयों में की जानी चाहिए जिससे निर्दोषों को कई साल बाद सबूतों के अभाव में छोड़कर देश को शर्मिंदा न होना पड़े. जो दोषी हैं उन्हें सजा देने की व्यवस्था में तेज़ी की आवश्यकता है क्योंकि अब केवल संदेह के आधार पर लोगों को जेल में रखने के खिलाफ कोर्ट भी सख्त होते जा रहे हैं. विश्वास बहाली के साथ नागरिक भी अपनी तेज़ नज़र से अपने आस पास की गतिविधियों पर नज़र रखें तभी देश पूरी तरह से सुरक्षित किया जा सकता है.        

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