मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Sunday, 6 July 2014

इराक से नर्सों की वापसी

                                        लगता है देश को हर बात पर राजनीति करने की आदत सी हो गयी लगती है क्योंकि जिस तरह से इराक से भारतीय नर्सों के वापस स्वदेश आने की खबर के बाद पत्रकारों ने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से पूछा था कि इस रिहाई के बदले किस तरह के प्रयास किये गए थे तो इस मामले पर प्रवक्ता ने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया था और अब इसी तरह के प्रश्न केरल के सीएम से भी पूछे जाने लगे हैं. पत्रकारों को एक बात समझनी ही होगी कि कई बार देशहित में उन्हें इस तरह के प्रश्नों को पूछने से परहेज़ भी करना चाहिए क्योंकि जिस समय इस तरह का कोई संकट सामने हो तो उस समय कूटनीतिक और अन्य मोर्चों पर क्या चल रहा है इस बात का खुलासा करने से पूरा मामले बिगड़ भी सकता है. हमारे देश में इस तरह के मुद्दों पर राजनेता और पत्रकार अपनी तरह से मामले को घुमाने के प्रयास करते हुए सदैव ही देखे जा सकते हैं.
                                                 आम तौर पर सरकारें जब चुनी हुई या दुनिया भर में मान्यता प्राप्त सरकारों से भी जब कोई कूटनीतक बातें करती हैं तो उन्हें भी साझा नहीं किया जा सकता है और इस बार मामला ऐसा था कि वहां पर कोई भी ऐसी सरकार काम नहीं कर रही थी जिससे भारत सरकार ने मान्यता दे रखी हो और उसके अभी भी किसी देश के साथ कूटनीतिक सम्बन्ध भी नहीं हैं तो उस स्थिति में भारत सरकार ने जिस भी तरह से इन नर्सों की सुरक्षित घर वापसी संभव की है उस पर किसी को भी सवाल उठाने का अभी कोई हक़ नहीं है. आज भी वहां पर बहुत सारे भारतीय जो केवल काम के सिलसिले में गए हुए थे अलग अलग जगहों पर फंसे हुए हैं कुछ को आज अपने ठिकाने सुरक्षित लग रहे हैं पर आने वाले समय में परिस्थितियों किस और घूम जाएँ इस बात को ध्यान में रखते हुए ही सरकार कोई खुलासा नहीं करना चाह रही है.
                                           केरल के सीएम ने भी मोदी सरकार और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के प्रयासों की सराहना की है क्योंकि उनकी तरह केंद्र सरकार ने भी प्रयासों में कोई कसर नहीं छोड़ी थी. केरल से बहुत सारे लोग खाड़ी देशों में काम करने के लिए जाया करते हैं और उनके वहां पर अच्छे सम्बन्ध भी हैं. बिना किसी चुनी हुई सरकार और अज्ञात प्रतिनिधियों से संपर्क कर इस तरह के संकट से पार पाना बहुत मुश्किल होता है और देश ने यह साबित कर दिया है कि समवेत प्रयासों से कोई भी कठिन काम आसानी से पूरा किया जा सकता है. इस मामले पर किसी भी राजनैतिक दल ने अभी तक कोई अनावश्यक प्रतिक्रिया भी नहीं दी है जो पूरी तरह से उचित भी है क्योंकि जब तक दुनिया के सामने देश की इस तरह की एक जुटता प्रदर्शित नहीं की जाएगी तब तक प्रयास सार्थक होने की संभावनाएं भी कम हो जायेंगीं. अब जब तक इराक से सभी भारतीय सुरक्षित स्थानों तक नहीं पहुँच जाते हैं या फिर उनकी स्वदेस वापसी नहीं हो  जाती है तब तक सभी पक्षों को ऐसा ही संयम बनाये रखना चाहिए.      
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