मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Friday, 26 September 2014

वोट के बदले दुल्हन

                                                                      सामाजिक बुराई और प्राकृतिक नियमों से छेड़-छाड़ लम्बे समय में किसी समाज को किस तरह से प्रभावित कर सकती है इसका ताज़ा उदाहरण हरियाणा में आगामी विधान सभा चुनावों से पहले जींद में कुंवारा यूनियन का गठन किया जाना है और उसके युवा से अधेड़ होते जा रहे सदस्यों ने यह मांग रखी है कि जो भी नेता उन्हें दुल्हन दिलाने का वायदा करेगा वे उसी को अपना वोट देने वाले हैं ? इस समस्या के बारे में कुछ दिन पहले ही भाजपा के वरिष्ठ नेता ओम प्रकाश धनखड़ ने भी इस तरह का वायदा किया था कि उनकी पार्टी कुंवारों के लिए बिहार से दुल्हन लेकर आएगी तो उस पर बिहार में तो बहुत हो हल्ला मचा था पर हरियाणा के सभी राजनैतिक दल चुप्पी साध गए थे क्योंकि लड़कियों की भ्रूण हत्या करने वाले समाज में आज इन लोगों की बहुतायत हो चुकी है जिन्हें अपने लिए दुल्हन नहीं मिल रही है ? जींद में लिंगानुपात सबसे खराब स्थिति में है और वहां पर प्रति १००० केवल ८२७ लड़कियां ही है जबकि हरियाणा का औसत ८४२ का है.
                                                                आज इस मसले पर जानते हुए भी चुनाव आयोग या अन्य राजनैतिक या सामाजिक लोगों कि कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है केवल कुछ कांग्रेसी नेताओं ने दबी ज़ुबान में इसका विरोध किया है क्योंकि उन्हें भी पता है कि आने वाले चुनावों में पहले से ही दबाव में लड़ रही पार्टी के लिए सब कुछ करना आसान नहीं होने वाला है. ऐसे में इस समस्या पर आखिर नेता और आयोग के पास करने के लिए क्या शेष बचता है जबकि समाज की पिछली पीढ़ी ने ही अपनी कन्याओं की हत्या करने में कोई कसर नहीं छोड़ रखी है ? इस स्थिति को पूरे देश के सामने लाया जाना चाहिए क्योंकि आज भी देश के विभिन्न हिस्सों में लालची चिकित्सकों द्वारा भ्रूण हत्या को अंजाम दिया जा रहा है जिससे उस समाज को भी यह पता चल सके कि दो दशक पूर्व प्रकृति से जो दुर्भाव हरियाणा ने किया था वो आज उसको किस तरह से झेल रहा है और वहां यह एक बड़ी सामाजिक समस्या बन चुका है.
                                                            अब राजनैतिक दलों को भी इस तरह की किसी भी कोशिश का भरपूर विरोध करना ही होगा क्योंकि जब तक समाज के सभी वर्ग इस तरह से दुर्भाव करने वालों के खिलाफ खड़े नहीं होंगे तब तक वोटों के लालच में नेता कुछ भी बोलते रहने वाले हैं और उसका उनकी चुनावी संभावनाओं पर कुछ असर भी पड़ सकता है. इस परिस्थिति में उस समाज को ही स्वयं आगे बढ़कर कुछ सोचना होगा जिसने इस कुकृत्य को दशकों तक अंजाम दिया है क्योंकि जो गलती जहाँ से शुरु हुई है उसे वहीं से सुधारने की कोशिश ही आने वाले समय में समाज में समरसता और समानता लाने में मदद कर सकती है. सभी को यह सोचना ही होगा कि इस तरह कि हरकतों के बिहार और अन्य राज्यों में शुरू होने से आने वाले समय में हरियाणा के लड़कों को दुल्हन कहाँ से मिलेंगीं ? जाति और खाप पर मर मिटने वाले समाज के लिए दूसरे समाज की लड़कियों को स्वीकार करना कितना सहज होगा यह भी सोचने के विषय है इसलिए जो गलती हरियाणा ने की है आज उसे सुधारने का ज़िम्मा भी उन पर ही सबसे अधिक आता है.     
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