मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Saturday, 29 November 2014

आरिफ मजीद और भारतीय मुस्लिम

                                                        इराक में आईएस के लिए जिहाद में शामिल रहने वाले मुंबई के कल्याण निवासी आरिफ मजीद का भारत वापस आना एक महत्वपूर्ण घटना है पर इस मामले से एनआईए और गृह मंत्रालय को बहुत ही संवेदनशील पर कानूनी तौर पर कठोर नियमों से निपटने की आवश्यकता है. आखिर मुंबई में रहने वाले ये तीन आम युवक किस तरह से आईएस के चंगुल में पहुंचे इस बात की जानकारी खोजने और उन तत्वों तक पहुँचने की आज देश की एजेंसियों को बहुत ज़रुरत है. इस मामले में आरिफ के परिवार द्वारा पुलिस को दिए गए सहयोग और गोपनीयता बरते जाने के बाद ही उसकी भारत वापसी संभव हो सकी है वर्ना यदि आईएस के लोगों को कहीं से भी यह पता चल जाता कि उनका पूर्व सहयोगी इस तरह से भारत वापस जाने वाला है तो वे निर्दयी आरिफ को भी मौत के घाट उतार देते. आरिफ के परिवार के बेहतर तालमेल और सहयोग के चलते और गृह मंत्रालय के सही और सटीक तालमेल से ही आज आरिफ वापस देश में आ चुका है.
                                                       इस पूरे मामले में यह देखने की बात है कि देश में किन परिस्थितियों में आईएस किस तरह से इन युवकों को अपने संगठन में जोड़ने की कवायद करने में लगी हुई है और संभवतः कुछ ऐसे लोग भी होंगें जो परदे के पीछे रहकर इस तरह की गतिविधियों में भारतीयों को झोंकने की कोशिशें करने में लगे हुए हों ? इस पूरे प्रकरण में भारत में रहकर कोई भी आसानी से ऐसा काम नहीं करेगा तो संभवतः किसी खाड़ी देश में बैठकर इंटरनेट के माध्यम से इस पूरे रैकेट का सञ्चालन किया जा रहा हो और इस्लाम के नाम पर युवाओं को भड़काकर अपने लिए कुछ मुफ्त के लड़ाके इकट्ठे करने का काम किया जा रहा हो. बेहतर होता कि इस मामले को अभी गोपनीय ही रखा जाता और आरिफ के परिवार के सहयोग के बाद मामले की तह तक पहुँचने से पहले इन बातों का इतने बड़े स्तर पर खुलासा नहीं किया जाता क्योंकि इस पूरी प्रक्रिया से इराक से आईएस के चंगुल से निकलने में लगे अन्य भारतीय लोगों की मुसीबतें बढ़ सकती हैं.
                                                       अब चूंकि आरिफ और उसके परिवार ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग किया है तो यह माना जाना चाहिए कि ये एजेंसियां उससे सामने तरह से ही पूछताछ करेंगीं. हालाँकि किसी भी आतंक रोधी दस्ते के लिए अपने पर नियंत्रण रख पाना बहुत मुश्किल होता है पर आज एनआईए कोर्ट में पेश होने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया जायेगा. एजेंसियों के सामने अब दोहरी चुनौती है क्योंकि उन्होंने आरिफ के परिवार पर भरोसा कर उसे स्वदेश वापस लाने में सफलता तो पा ली है पर इस तरह के लड़ाकों के आईएस के साथ काम करने के कारण आरिफ की बातों पर भारतीय एजेंसियां कितना भरोसा कर पाएंगीं यह तो समय ही बताएगा. केवल आईएस से सम्बन्ध के कारण ही उसे पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है और उसके खिलाफ भारत में कोई भी आतंकी मामला दर्ज़ नहीं है इसलिए अब एनआईए को भी मुक़दमा दर्ज़ करने में उसे सुधरने के मौके देने के बारे में भी सोचना चाहिए. यदि आरिफ के साथ एक नीति के तहत उदारता बरती गयी तो आने वाले समय में इराक में इस्लाम के नाम पर लड़ने वाले और भी भ्रमित लड़के सही राह पर आकर स्वदेश वापसी के बारे में सोच सकते हैं.           
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