मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Monday, 3 November 2014

वाघा हमले का सन्देश

                                                                   वाघा सीमा पर प्रतिदिन निभायी जाने वाली झंडा उतरने की रस्म देखने जिस तरह से भारत और पाक के लोग सीमा के दोनों तरफ इकठ्ठा होते रहते हैं उससे वहां पर काफी अधिक भीड़ भी रहा करती है पर एक आतंकी द्वारा जिस तरह से कल शाम यह कार्यक्रम संपन्न होने के बाद आत्मघाती हमला किया गया उससे यह पता चलता है कि पाक के साथ लगती हुई इस सीमा पर भी पाक की तरफ से कितनी असावधानी बरती जाती है. हालाँकि किसी भी परिस्थिति में जांच चौकियों पर आत्मघाती हमलों को रोका नहीं जा सकता है पर कुछ व्यवस्था इस तरह से संचालित की जा सकती है जिससे समारोह के पहले और बाद में भी इतने अधिक लोग किसी एक गेट पर ही इकट्ठे न होने पाएं. पाक में आंतरिक हालत कैसे हैं यह इस घटना से ही पता चल जाता है क्योंकि पाकिस्तान के घरेलू आतंकियों के खिलाफ चलाये जा रहे अभियान ज़र्ब-ए-अज्ब के विरोध में कम पहचान वाले जनदुल्लाह आतंकी गट ने इसकी ज़िम्मेदारी ली है.
                                                                   इस घटना से हालाँकि भारतीय क्षेत्र पर कोई असर नहीं पड़ा पर यदि यह धमाका समारोह के समय होता तो इस तरफ भी भगदड़ मच सकती थी और कुछ भी हो सकता है. अब यह तय करना भारत सरकार का काम है कि इस तरह के इस समारोह की सुरक्षा को और भी निरापद कैसे किया जाये जिससे आने वाले लोग भी सुरक्षित रह सकें तथा सुरक्षा बलों के पास इस स्थिति से निपटने की एक व्यापक कार्ययोजना भी हो. जो भी लोग इस कार्यक्रम में जाने वाले हों उनके लिए कुछ विशेष दिशा निर्देश भी जारी किये जाने चाहिए और बैठने के स्थान के अतिरिक्त अब कुछ खुली जगह की व्यवस्था भी की जानी चाहिए जिससे किसी भी आपातकालीन स्थिति में लोगों को एक तरफ जाने के स्थान पर समूहों में अलग कर दिया जाये जिससे भगदड़ की स्थिति न बनने पाये. इस तरह की सामान्य तैयारी के साथ सुरक्षा बलों के लिए भी परिस्थिति से निपटना आसान हो जायेगा.
                                                                  इस घटना से सबसे बड़ा खतरा यह सामने आया है कि यदि किसी दिन आतंकियों का बड़ा समूह इस समारोह में पाक की तरफ से आ जाये और कुछ लोग आत्मघाती हमले कर अफरा तफरी का माहौल बना दें तो उन आतंकियों द्वारा भारतीय क्षेत्र में भी आसानी से गड़बड़ी की जा सकती है. पाक के अंदरूनी हालात चाहे जैसे भी हों पर वे भारत के अनुकूल कभी भी नहीं हो सकते हैं. लाहौर जिस तरह से पाक में धार्मिक रूप से आतंक को समर्थन करने वालों का गढ़ बना हुआ है उस स्थिति में पाक की सेना भी कुछ विशेष नहीं कर सकती है और खुद उसके द्वारा पोषित ये आतंकी समूह समय समय पर पाक के लिए इसी तरह की चुनौती खडी करने की कोशिशों में लगे रह सकते हैं. अब वाघा की पूरी स्थिति की समीक्षा तो उच्च स्तर पर की ही जाएगी पर वहां जाने वाले भारतीयों को भी वहां बिताये जाने वाले समय और आने जाने के दौरान सुरक्षा बलों के निर्देशों का पूरी तरह से पालन करना होगा तभी हम अपनी तरफ की सीमा के साथ लोगों को अधिक सुरक्षित रख पाने में सफल हो सकेंगें.

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