मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Sunday, 11 January 2015

नेशनल गेंडारमेरी इंटरवेंशन ग्रुप और फ्रांस

                                                         आतंक से जूझते फ्रांस के लिए एक बड़ी राहत की बात यही है उसकी एंटी होस्टेड टेरर एजेंसी नेशनल गेंडारमेरी इंटरवेंशन ग्रुप अपने आप में अभी तक हर कार्यवाही में बहुत ही कारगर साबित हुई है क्योंकि इस ग्रुप के पास अब तक ६५० से अधिक इस तरह की कार्यवाहियां करने का इतिहास है जिसमें यह  बंधकों को छुड़ाने में सदैव ही कारगर रही है. इसकी क़ाबलियत के बारे में और कुछ भी कहने से अच्छा है कि उसकी १९७९ में सऊदी अरब सरकार की गुज़ारिश पर पवित्र शहर मक्का में भी बन्धकों को आतंकियों से छुड़ाने की उस कार्यवाही को याद कर लिया जाये जिसमें इस एजेंसी ने बिना किसी जान के नुकसान के ही आतंकियों को मार गिराया था. दिसंबर १९९४ में भी एक फ़्रांसिसी विमान के अपहर्ताओं को इस एजेंसी ने मार गिराया था जबकि उसके ४ कमांडोज़ को हलकी चोटें आई थी जो कि इस तरह के किसी भी बड़े ऑपरेशन को देखते हुए बड़ी उपलब्धि ही कही जा सकती है. इनको सर्वश्रेष्ठ बनाने में वहां के कानून और लोगों के समर्पण की कहानी को भुलाया नहीं जा सकता है.
                             भारतीय परिप्रेक्ष्य में यदि इस तरह से अपने एनएसजी बल की बात की जाये तो वे भी किसी से कम नहीं ठहरते हैं पर कई बार उनके सामने काम करने में जो कठिनाइयां सामने आती हैं उसका सीधे नागरिक प्रशासन से जुड़ाव माना जा सकता है. विकसित देशों में हर महत्वपूर्ण बिल्डिंग का नक्शा मानक के अनुरूप ही बनाया जाता है और उसमें आपातकालीन व्यवस्था के लिए जो भी उपाय सुझाये जाते हैं उन पर सख्ती से अमल भी किया जाता है तथा सम्बंधित विभाग भी समय समय पर सुरक्षा के अनुरूप इन मानकों का परीक्षण भी करते ही रहते हैं. भारत में सबसे बड़ी समस्या यही है कि हम अपनी सुविधा के अनुरूप काम करने को प्राथमिकता दिया करते हैं तथा सुरक्षा सम्बन्धी आवश्यकताओं और मानकों की खुलेआम अनदेखी करने से भी नहीं चूकते हैं जिससे आवश्यकता पड़ने पर हमारी एजेंसियों को बहुत समस्या का सामना करना पड़ता है. भ्रष्टाचार के चलते भवनों के वास्तविक नक़्शे और मौजूद भवन में बहुत बड़ा अंतर होता है जिससे भी सुरक्षा बल कुछ ठिठक कर ही काम कर पाते हैं.
                           आज जब पूरी दुनिया इस तरह के अप्रत्याशित आतंक की चपेट में है तो क्या हमें अपनी इन कमियों को दूर करने की ज़रुरत नहीं है ? किसी बड़े मॉल या अन्य सार्वजनिक स्थान पर हमला होने की दिशा में उस मॉल की क्या तैयारियां हैं और क्या उन्होंने अपने पूरे नक़्शे को स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ साझा किया हुआ है ? सामान्य रूप से इस तरह के स्थानों पर केवल बिना हथियार के सुरक्षा कर्मी ही तैनात रहते हैं और किसी संकट में मॉल प्रबंधन के पास क्या विकल्प हैं यह कोई नहीं जनता है यहाँ तक उस स्थान पर काम करने कर्मचारियों को भी आपातकालीन स्थिति से निपटने की कोई ट्रेनिंग नहीं दी जाती है. इस तरह की परिस्थितियों में संकट को कम करने में कोई मदद नहीं मिलती है और सुरक्षा बलों के लिए काम करना और भी मुश्किल हो जाता है. अब समय आ गया है कि हम अपने देश में भी इस दिशा में तैयारियां करनी शुरू कर दें जिससे आने वाले समय में हमारे प्रतिष्ठान और सुरक्षा बल पूरी तरह से तैयारी कर सकें. संकट आने पर चेतने से अच्छा है कि उसके आने से पहले ही  पूरी तैयारियां करके रखी जाएँ और सम्बंधित जगहों पर काम करने वाले सभी कर्मचारियों को आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद किया जा सके.     
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

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