मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Saturday, 17 January 2015

ओबामा सुरक्षा और सीसीटीवी कैमरे

                                         गणतंत्र दिवस पर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के भारत आने को लेकर जिस तरह से सरकार सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद करने में लगी हुई है उसी के बीच एक ऐसी भी खबर सामने आई है जो वास्तव में विचारणीय होने के साथ शर्मनाक भी कही जा सकती है. ओबामा की सुरक्षा के मद्देनज़र निगरानी रखने के लिए जिस तरह से दिल्ली में १५००० सीसीटीवी कैमरे लगाये गए हैं उनको लेकर मामला दिल्ली हाई कोर्ट में पहुँच चुका है हालाँकि अभी तक कोर्ट ने कोई स्पष्ट आदेश तो नहीं दिया है पर जिस तरह से मौखिक टिप्पणी की है उससे यही लगता है कि अब ३० जनवरी को केंद्र और दिल्ली सरकार की तरफ से जवाब दाखिल किये जाने तक ये कैमरे लगे ही रहने वाले हैं. किसी भी राष्ट्राध्यक्ष के भारत आने पर उसको सुरक्षा सम्बन्धी खतरों को देखते हुए सम्बंधित देश की सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर भारत की सुरक्षा एजेंसियां काम किया करती हैं और इसी क्रम में इस बार ओबामा की सुरक्षा को देखते हुए यह सारी व्यवस्था की जा रही है जिससे उनकी यात्रा को निर्विघ्न रूप संपन्न किया जा सके
                                       दिल्ली हाई कोर्ट ने जिस तरह से यह प्रश्न भी किया कि जब आवश्यकता पड़ने पर एक हफ्ते में इतना काम किया जा सकता है तो देश के नागरिकों के लिए हर सुविधा उपलब्ध करने का दावा करने वाली सरकार इसे संसाधनों के अभाव का मामला बताकर खुद ही क्यों नहीं करती है ? दिल्ली पुलिस की जानकारी के अनुसार आज भी दिल्ली में रोज़ कम से कम ५ रेप होते हैं तो इस परिस्थिति में यदि सरकार इस तरह के कुछ ठोस उपाय कर सके तो अपराधियों के मन में डर तो पैदा हो ही सकता है जिससे माहौल को सुरक्षित करनेमें बहुत सहायता मिल सकती है. कोर्ट ने जिस तरह से याचिका में इस मुद्दे पर गंभीरता दिखाई है उससे यही लगता है कि अब केंद्र दिल्ली सरकार के लिए इन कैमरों को हटा पाना मुश्किल काम होने वाला है. मानसिकता को एक दम से बदला नहीं जा सकता है इसलिए सुरक्षा सम्बन्धी उपायों को बढ़ाते हुए यदि आगे के कदम उठाये जाएँ तो पूरे माहौल को सुधारने में मदद भी मिल सकती है. जहाँ तक सरकार का सवाल है वह किसी की भी दल की क्यों न हो बिना दबाव कुछ भी करने में विश्वास नहीं करती है.
                                    ओबामा को समूची सुरक्षा देने के लिए भारत सरकार को यथा संभव कोशिश करनी ही है पर कोर्ट ने जिस तरह से आम लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं ज़ाहिर की हैं वे सामयिक भी है. भारत आज अपने को दुनिया की बड़ी शक्तियों के बीच में पा रहा है तो उसे अपने यहाँ के माहौल को इन विशेष समयों पर सुरक्षित बनाये रखने के लिए कोशिशें करनी ही है. देश की प्रतिष्ठा से जुडी हुई बातों को किसी अन्य बात के साथ नहीं  रखा जा सकता है पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भारत की दुनिया भर में जिस तरह से समय समय पर किरकिरी होती रहती है आज उसे भी सुधारने की आवश्यकता है. दिल्ली में ओबामा की यात्रा के साथ जो भी अस्थायी सुरक्षा प्रबंध किये जा रहे हैं उनको ऐसे ही रहने देना चाहिए और बचे हुए हिस्सों को भी समय रहते इस सुरक्षा निगरानी में लाने के लिए सोचना चाहिए. किसी विशेष अवसर को आम लोगों की सुरक्षा के साथ जोड़कर यदि आगे बढ़ा जा सके तो पूरे देश में चरण बद्ध तरीके से इन कामों को किया जा सकता है. सरकार की प्राथमिकताएं अपनी जगह हैं पर विभिन्न स्थानों पर स्थित निजी संस्थान भी यदि इस काम में सरकार की मदद करने लगें तो यह सम्पूर्ण सुरक्षा की तरफ सही कदम हो सकता है.   
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