मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Sunday, 18 January 2015

वित्तीय प्रबंधन में असफल मंत्रालय

                                                        पीएम मोदी द्वारा वित्तीय वर्ष के अंतिम वर्षों में बजट को खर्च करने की प्रवृत्ति पर लगाम लगाने को लेकर दिए गए स्पष्ट बयान के बाद भी जिस तरह से देश की आर्थिक प्रगति में बड़ा योगदान करने वाले मंत्रालयों में जिस तरह की अनुशासन हीनता दिखाई दे रही है वह देश के लिए निश्चित तौर पर चिंता का विषय है. शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और शहरी विकास मंत्रालयों को देश के राज्यों की जनसँख्या और अन्य बातों को विचार करते हुए बजट का आवंटन किया जाता है इस बार सरकार वित्तीय वर्ष के बीच में बनी है संभवतः एक यह कारण भी हो सकता है जिसके कारण बजट को राज्यों में भेजने से पहले अधिकारी इस बारे में नयी सरकार का रुख देखने के लिए प्रतीक्षा करने में लगे रहे हों ? आज भाजपा के सामने सबसे बड़ी समस्या यह भी है कि उसके मंत्री मोदी की छाया से बाहर ही नहीं निकल पा रहे हैं और वे हर काम के लिए पीएम की तरफ ताकते रहते हैं जिसका सरकार के चलाने पर स्पष्ट असर देखा जा सकता है. पीएम हर विभाग की समीक्षा खुद तो नहीं कर सकते हैं पर जो महत्वपूर्ण विभाग हैं उनमें आवश्यकता पड़ने पर वे अपने स्तर से बैठक बुलाकर चर्चा अवश्य ही कर सकते हैं पर असली दायित्व तो सम्बंधित विभाग के मंत्री का ही बनता है कि वे मामले को पूरी तरह से देखने का काम करें.
                                                    जिन मंत्रालयों द्वारा अपने आवंटित बजट को समयबद्ध तरीके से खर्च करने से देश में विकास को गति मिलती है यदि वे मंत्रालय भी विकास का पहाड़ा पढ़ते हुए अपने बजट को ही खर्च न कर पाएं तोयह विकास को किस तरह से बढ़ाने का काम कर पायेंगें अब यह चिंता की बात है. इस मामले से चिंतित वित्त मंत्रालय ने भी इन मंत्रालयों को पत्र लिखकर आवंटित बजट खर्च न होने के बारे में स्पष्टीकरण माँगा है जिसके बारे में मंत्रालय के अधिकारियों द्वारा जिस तरह से घिसापिटा जवाब दिया गया है वह किसी भी तरह से सही नहीं कहा जा सकता है. मंत्रालयों का कहना है कि इस बजट में राज्यों का हिस्सा भी होता है और उनके द्वारा पहले आवंटित धन खर्च न करने की दशा में ही यह धन रोका गया है और अब यह खर्च नहीं हो पाया है. देश में सरकार चलाने में बाबुओं की जितनी बड़ी भूमिका रहती है उसके चलते यह सदैव से ही होता रहता है पर केवल कुछ राज्य ही सीएम कड़े अनुशासन के साथ काम करते हैं वे इस धन की पूरी राशि को पाने के लिए चरणबद्ध ढंग से काम करते हुए अपने हिस्से के आवंटन का उपयोग जनता की भलाई के लिए करते रहते हैं.
                               देश के समग्र विकास के लिए जहाँ इन मंत्रालयों के भारी भरकम बजट में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त करने की दिशा में अब कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है वहीं राज्यों के साथ मिलकर उन उपायों पर भी विचार किये जाने की ज़रुरत है जिससे विकास की परियोजनाएं चरणबद्ध तरीके से बनायीं और लागू की जा सकें. किसी भी परिस्थिति में अब यह कड़े अनुशासन के रूप में लागू किया जाना चाहिए जिससे राज्यों को इस धनराशि में हेर-फेर करने से रोका जा सके साथ ही इस धनरशि को पूरे वर्ष में खर्च करने के स्थान पर तिमाही बजट बनाकर समय से खर्च करने वाले राज्यों को ही पूरी धनराशि समय से आवंटित किये जाने की व्यवस्था करने के बारे में सोचा जाना चाहिए. हालाँकि पिछली संप्रग सरकार की तरफ से बजट को साल के अंतिम तिमाही में खर्च करने की प्रवृत्ति पर लगाम लगाने के लिए बजट की यह योजना बनायीं गयी थी पर आज भी कई राज्य अपने यहाँ इस तरह की व्यवस्था नहीं बना पाये हैं जिससे राज्य के केंद्रीय बजट से विकास को गति दी जा सके. केवल पीएम के प्रयासों से ही सब कुछ नहीं सुधर सकता है और अब इसके लिए सभी विभागों को राज्यों के साथ मिलकर कड़े उपायों की तरफ बढ़ने की आवश्यकता है.
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