मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Monday, 19 January 2015

ओबामा यात्रा - पाक और आतंक

                                           गणतंत्र दिवस पर भारत और अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के साथ चल रहे सुरक्षा सम्बन्धी प्रयासों के बीच अमेरिका से सीधे तौर पर जिस तरह से पाक को यह चेतावनी दी गयी है कि ओबामा की यात्रा के दौरान यदि पाक समर्थित आतंकी हमला हुआ या किसी भी आतंकी हमले के तार पाकिस्तान से जुड़ते हुए दिखाई दिए तो उसे इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा. अभी तक अमेरिका भारत के पाक समर्थित आतंकी समूहों के बारे में कोई स्पष्ट राय सामने नहीं लाता है और दक्षिण एशिया में आतंक का गढ़ और विश्व के अन्य देशों में आतंकियों का परोक्ष रूप से समर्थन करने वाला पाक सदैव ही भारत के आरोपों और चिंताओं से बाहर कर दिया जाता है. अब जब अमेरिका की सुरक्षा एजेंसियों को भारत में रहकर ओबामा की सम्पूर्ण सुरक्षा के बारे में काम करना पड़ रहा है तो उसे भी यह समझ में आने लगा है कि पाक किस तरह से भारत को अस्थिर करने के लिए आतंकियों को हर स्तर पर सहायता देने में जुटा हुआ है.
                                        इस बारे में जहाँ तक चेतावनी की बातें हैं तो वे केवल सांकेतिक भी हो सकती हैं क्योंकि भारत और चीन के पास में अपने लिये एक स्थान बनाये रखने के लिए पाक से अच्छा विकल्प अमेरिका को कभी भी नहीं मिल सकता है क्योंकि इस्लाम के नाम पर आतंकियों को समर्थन देने वाली बड़ी जनसँख्या के बावजूद पाक में आज भी बहुत ऐसे लोग भी हैं जो अपने बेहतर भविष्य के लिए यूरोप या अमेरिका जाकर आगे बढ़ने की सोचते हैं. अमेरिका और यूरोप सदैव से अरब देशों के लिए एक सपने जैसा ही रहा है इसलिए आज भी वहां के लोगों में अपने भविष्य के लिए इन देशों का रुख करना आम है पर हाल में शिक्षित मुस्लिम लोगों द्वारा भी जिस तरह से आतंकियों के साथ खड़े होना शुरू किया गया है उससे इन देशों में अब मुसलमानों पर संदेह किया जाने लगा है. पाक भारत के विरोध को किसी भी तरह से कम नहीं कर सकता है क्योंकि शांत भारत पाक के सैन्य और राजनैतिक प्रतिष्ठानों के लिए घरेलू चिंताओं को बढ़ाने वाला साबित होता है.
                         जहाँ तक अमेरिका की इस चेतावनी का मसला है तो पाक सरकार इस मामले में बहुत अधिक् घिरी हुई लगती है क्योंकि जिस तरह से घरेलू आतंकियों द्वारा आज पाक सेना को ही निशाना बनाया जाना शुरू किया जा चुका है तो यह कैसे माना जा सकता है कि पाक अपने यहाँ से इस तरह की गतिविधियों को पूरी तरह से रोक पाने में सफल हो पायेगा ? साथ ही वे आतंकी जिनके समूहों को नष्ट करने के लिए पाक सेना अभियान चला रही है वे भी ओबामा की भारत यात्रा के दौरान कुछ न कुछ करके पाक सरकार के लिए संकट को बढ़ाना ही चाहेंगें. आज भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा जिस तरह से कश्मीर घाटी में आतंकियों के छिपने की जानकारी मिलने पर उन्हें घेरा जा रहा है उससे भी कश्मीर घाटी में आतंकियों के पास करने के लिए बहुत अधिक शेष नहीं बच रहा है फिर भी वे हताशा में कोई आत्मघाती हमला करने से बाज़ नहीं आने वाले हैं और इसके माध्यम से वे पाक अमेरिका के लिए यह चुनौती भी पेश करने की कोशिश करने वाले हैं कि वे कुछ भी कर सकते हैं. फिलहाल भारतीय एजेंसियों द्वारा पूरी चौकसी बरतते हुए सुरक्षा माहौल को मज़बूत करने में लगी हुई हैं.       
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