मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Saturday, 31 January 2015

डिजिटल इंडिया मोबाइल युग तक

                                                 देश की बड़ी आबादी और विस्तार को देखते हुए जिस तरह से केंद्र और राज्य स्तर पर बनने वाली योजनाओं के क्रियान्वयन में बड़ी अड़चनें सदैव ही सामने आती रही हैं उनसे निपटने के लिए केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट डिजिटल इंडिया को आम नागरिकों के मोबाइल से जोड़ने और मोबाइल को ही नागरिकों की डिजिटल पहचान बनाये जाने की घोषणा से काम आसान ही होने वाला है. आधार के नामांकन के समय जिस विस्तृत जानकारी को नागरिकों से इकठ्ठा किया गया था संभवतः उसे भी पूरी तरह से ऑनलाइन उपलब्ध नहीं किया गया है जिससे आज सरकार को इस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. मूल फॉर्म्स में मोबाइल संख्या का उल्लेख करने के बारे में जानकारी मांगी गयी थी पर जिन एजेंसियों ने यह काम किया उन्होंने के केवल कुछ जानकारियों को ही अपलोड किया और शायद बाकी की जानकारियां अभी भी फॉर्म्स तक ही सीमित रह गयी हैं. आधार जैसी अति महत्वपूर्ण योजना में इस तरह की लापरवाही करने के कारण ही आज भी सरकार के पास आधा अधूरा डेटा ही उपलब्ध है.
                                     इस समस्या से निपटने के लिए अब आधार बनाने वाली एजेंसियों को स्पष्ट रूप से यह आदेश दिए जाने चाहिए कि वे अपने स्तर से फॉर्म्स में मांगी गयी जानकारियों के अधूरे होने पर नागरिकों को उसे भरने के लिए कहें तथा पूरी जानकारी ही अपलोड करें जिससे आने वाले समय में इस तरह की किसी भी कवायद को दोबारा करने से बचा जा सके. आधार जैसी महत्वपूर्ण योजना को लेकर भी देश में पहले जो राजनीति की जा चुकी है अब उससे भी आगे बढ़ने की ज़रुरत है. आधार मनमोहन सिंह की परिकल्पना थी जिसके माध्यम से सरकार को नागरिकों से जुड़े हुए मुद्दे को सुलझाने के लिए मदद मिलने वाली थी और इसे एक बेहतरीन तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलकेणी के निर्देश में पूरी तरह से बनाया गया था जिसकी उपयोगिता का एहसास आज सभी को हो रहा है. खुद पीएम ने इसे देश के नागरिकों की पहचान के लिए मुख्य रूप से आगे लाने का निश्चय किया है और इसकी महत्ता को समझते हुए इसे सरकार की मुख्य योजना के रूप में स्वीकार कर लिया है.
                                   जिन लोगों के आधार बन चुके हैं और उनके मोबाइल नंबर इसमें जोड़े नहीं गए हैं अब उनके लिए यह काम दोबारा से करना ही पड़ेगा पर साथ ही नए बनने वाले आधार के साथ यह अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए कि जिस व्यक्ति के पास मोबाइल है वह उसे अपने आधार से उसी तरह जुड़वाने का प्रयास करें जैसा गैस सब्सिडी के लिए बैंक खातों और एलपीजी आईडी के मामले में किया गया है. आने वाले समय में डिजिटल इंडिया के सपने को धरातल पर उतारने के लिए सरकार को पूरी तरह से कुछ कठोर क़दमों के साथ आगे आना पड़ेगा इस तरह से आधार के साथ मोबाइल जुड़ जाने से जहाँ फ़र्ज़ी सिम बिकने बंद हो जायेंगें वहीं दूसरी तरफ सरकार के पास वास्तविक जनसंख्या और मोबाइल धारकों की जानकारी भी उपलब्ध हो जाएगी. देश के हर नागरिक के पास इस तरह का पहचान पत्र आने और उसके हर स्तर पर बेहतर उपयोग करने से जहाँ काम करने में तेज़ी आने वाली है वहीं विभिन्न तरह की सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में तेज़ी आ जाने वाली है. सरकार के इस कदम से जहाँ आने वाले समय में पारदर्शिता पूरी तरह से बढ़ने की सम्भावना है वहीं आम लोगों को इसका पूरा लाभ भी मिलने वाला है.       
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