मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Sunday, 5 April 2015

आधार और बुज़ुर्गों की समस्या

                                            देश में नागरिकों की पहचान के लिए शुरू की गयी परियोजना आधार ने जहाँ बहुत सारी योजनाओं के सफलतापूर्वक क्रियान्वयन में बहुत बड़ा योगदान देना शुरू कर दिया है वहीं इसमें कुछ ऐसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं जिनसे निपटने के लिए सरकार और आधार प्राधिकरण को कोई सही और स्थायी रास्ता खोजना ही पड़ेगा. यूपी के बहराइच जनपद से एक खबर के अनुसार बुजुर्गों की उँगलियों के निशान हलके हो जाने के कारण कई लोगों को आधार कैम्पों से वापस लौटना पड़ा क्योंकि आज की व्यवस्था के तहत उनकी उँगलियों के निशान मशीन से स्कैन ही नहीं हो पा रहे थे जिससे इन बुजुर्गों में इस बात को लेकर निराशा फ़ैल गयी कि वे अपनी आधार पहचान को कभी भी नहीं बनवा पायेंगें. वैसे देखा जाये तो आधार के लिए उँगलियों के निशान के साथ ही आँखों की पुतलियों को भी स्कैन किया जाता है जिससे व्यक्ति की बायोमेट्रिक पहचान को सुनिश्चित किया जा सके पर जिन लोगों के हाथों में इस तरह से निशान बढ़ती आयु के चलते धुंधले पड़ चुके हैं अब उनके बारे में सही तरह से सोचने और इस समस्या का विकल्प तलाशने की आवश्यकता सबके सामने आ गयी है.
                                         अभी तक सरकार द्वारा जिस तरह से विभिन्न तरह की योजनाओं में आधार के माध्यम से नागरिकों की सही पहचान करने में सफलता हासिल करनी शुरू कर दी है उसके बाद आधार को भी कानूनी आधार देना बहुत आवश्यक हो गया है क्योंकि आज भी सरकार द्वारा इसकी वैधानिकता को कानूनी रूप से सही नहीं किया गया है जिसके चलते देश की विभिन्न अदालतों में आधार को आवश्यक न बनाये जाने से सम्बंधित आदेश पारित होते ही रहते हैं. जब भी सरकार इस दिशा में इसकी वैधानिकता को कानूनी रूप से सही करने की दिशा में प्रयत्न करे तो उसे यह भी देखना होगा कि इन बुजुर्गों की समस्याओं के बारे में भी विचार करने की आवश्यकता सामने आ चुकी है क्योंकि जब यह प्रक्रिया शुरू की गयी थी तो इस बात के अंदेशे तो थे पर वे इतनी बड़ी समस्या हो जायेंगें यह किसी ने भी नहीं सोचा था तो अब इस परिस्थिति से निपटने के लिए सरकार को तकनीकी विशेषज्ञों से सलाह कर इसके अन्य विकल्पों पर विचार करे के बारे में प्रयास करने चाहिए. अब जब यह समस्या सामने आई है तो इसके विकल्प भी आसानी से तलाश लिए जायेंगें क्योंकि आज देश में तकनीकी रूप से बहुत विकास हो चुका है.
                                   सरकार के पास आधार के मौजूदा स्वरुप में बुजुर्गों की आधार पहचान को केवल आँखों के स्कैन से भी सम्बंधित किया जा सकता है पर किसी विशेष परिस्थिति में आँखों के किसी रोग के चलते क्या आँखों के स्कैन से भी पहचान साबित करने की कोशिश पूरी हो सकती है यह भी आज ही सोचना का विषय होगा. एक बेहतर विकल्प के रूप में इन बुजुर्गों के पति/ पत्नियों के आधार पहचान से इनकी पहचान को जोड़ा जा सकता है और इनके पास यह विकल्प न होने की दशा में उनके पुत्र / पुत्रियों के आधार से भी इनको लिंक किया जा सकता है जिससे उन बारे में सही जानकारी उनके बच्चों के आधार से मिल सकती है तथा इस तरह के प्रयास से पूरी प्रक्रिया में किसी विशेष परिवर्तन को करने की आवश्यकता भी नहीं पड़ने वाली है. सरकार के पास पूरा सूचना प्रौद्योगिकी विभाग तो है ही साथ ही ऐसी किसी भी परियोजना में विकल्पों पर विचार करने या उनके लिए सुझाव देने में देश के संस्थान भी पूरा सहयोग करने के बारे में आगे आ सकते हैं और यदि सरकार चाहे तो आधार के जनक और पूर्व अध्यक्ष नंदन नीलकेणी से भी इस समस्या के उचित समाधान के बारे में बात कर सकती है. 
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