मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Monday, 18 May 2015

प्रोटोकॉल - अधिकारी और नेता

                                                    देश में असली मुद्दों से ध्यान बांटने की कोशिशों में लगे हुए मीडिया के पास संभवतः अच्छी ख़बरों का अकाल ही पड़ गया है तभी पीएम के छत्तीसगढ़ दौरे के समय वहां ड्यूटी पर तैनात एक जिलाधिकारी को सिर्फ कथित प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने के लिए नोर्टिस जारी करना उसके लिए महत्वपूर्ण खबर बन चुकी है. आज भी जिस तरह से अधिकांश मामलों में अंग्रेज़ों या फिर आज़ादी के समय के कानून ही देश में चल रहे हैं उनमें से कई अप्रासंगिक भी हो चुके हैं साथ ही यह अच्छी बात भी है कि राजग सरकार अब इनमें से अनुपयोगी हो चुके बहुत सारे कानूनों को निरस्त कर आज के समय के अनुसार नए कानून बनाये जाने की तरफ भी कदम बढ़ा चुकी है. आज़ादी के पहले से ही सरकारी अधिकारियों के लिए एक ड्रेस कोड भी इसी तरह से बनाया गया है जिसमें उनको विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों में किस तरह से कपडे पहनने हैं इस बात का स्पष्टीकरण भी किया गया है फिर भी यदा कदा यह प्रश्न भी उठते ही रहते हैं कि उक्त स्थान पर प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया गया तथा समबन्धित लोगों से एक स्पष्टीकरण भी मांग लिया जाता है पर इस बार इस बात को इतना आगए बढ़ाने का कोई तुक समझ नहीं आता है.
                                      चिलचिलाती धूप में पीएम की आगवानी के लिए खड़े एक जिलाधिकारी द्वारा जिस तरह से अपनी आँखों की सुरक्षा के लिए काला चश्मा लगाया गया और उसी पर छत्तीसगढ़ सरकार ने उन्हें प्रोटोकॉल की याद भी दिलवाई उससे यही लगता है कि उक्त अधिकारी और सरकार के बीच संभवतः सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. आज जब देश में खुद पीएम मोदी द्वारा प्रोटोकॉल के रूप में लगभग हर स्थापति परंपरा की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं तो उसका असर यदि निचले स्तर पर बैठे हुए अधिकारियों पर भी दिखाई दे रहा है तो उसे किस तरह से गलत साबित किया जा सकता है ? देश में संवैधानिक शक्ति की दृष्टि से पीएम के पास सब कुछ होता है और यदि उनकी तरफ से ही प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया जाना इस मीडिया को नहीं दिखाई देता है तो अब यह देश के लिए चिंता की बात है ओबामा कि भारत यात्रा के दौरान खुद पीएम ने किस तरह से काला चश्मा लगाया था क्या तब किसी को देश के पीएम की उस हरकत और अंतर्राष्ट्रीय प्रोटोकॉल की याद आई थी ? तब तो पिछलग्गू मीडिया केवल पीएम को फैशन आइकॉन बताने से नहीं चूक रहा था तो अब एक डीएम के इस तरह से करने पर सरकार से लगाकर मीडिया तक को यह अखर ही गया.
                                     बेशक जनता से जुड़ाव दिखाने के लिए नेता कुछ ऐसे काम भी किया करते हैं जो सामान्य प्रोटोकॉल और शिष्टाचार के दायरे में नहीं आता है पर इसका अर्थ यह तो नहीं होना चाहिए कि देश के अंदर से लगाकर विदेशों तक में अपने कार्यक्रमों में खुद पीएम भी देश की इज़्ज़त दांव पर लगाते रहें ? मोदी द्वारा विदेशों में भारतीय समुदाय को जिस तरह से सम्बोधित करते समय अपनी एक साल पुरानी सरकार की अच्छाइयों पर बात करने से अधिक पिछली सरकार की बातें करना अच्छा लगता है क्या उससे उनकी खुद की और देश की छवि विदेशों में अच्छी होती है ? अब पीएम की तरफ से लगातर अंतराष्ट्रीय स्तर पर विदेशों में अपनी बात कहने के लिए पिछली सरकार की नाकामियों का ज़िक्र करना एक आदत हो चुकी है उन्हें अभी तक यह समझ में नहीं आया है कि यदि उस सरकार की छवि इतनी अच्छी होती तो क्या वह सत्ता से बाहर हो जाती फिर विदेशों में जाकर अपने देश की राजनीति की बातें करना कहाँ से सही कहा जा सकता है और यह किस तरह से देश के पीएम के प्रोटोकॉल के अनुसार सही कहा जा सकता है ? देश के अंदर की राजनीति पर कभी भी विदेशों में कोई भी नेता बात नहीं किया करता है क्योंकि विदेशों में वो देश के पीएम के तौर पर जाते हैं न कि अपने विरोधी दलों के नेताओं की आलोचना करने पर इस तरह से मोदी विदेशों में लगातार इस तरह की बातें करके अपना और देश का मान घटाने का काम ही करने में लगे हुए हैं.         
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