मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Sunday, 2 August 2015

सोशल मीडिया लैब्स और पुलिस

                                                            देश में तेज़ी से बढ़ते हुए इंटरनेट के प्रसार और शिक्षा के सुधरते हुए आंकड़ों के बीच एक बार फिर से वही बहस सामने आ रही है कि आज के भारत की युवा पीढ़ी को किस तरह से उन तत्वों से इंटरनेट पर बचाया जाये जो पूरी तरह से देश के माहौल को ख़राब करने की कोशिशों में लगे हुए हैं. आज देश में करोड़ों की संख्या में ऐसे लोग हैं जो सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तथा इनकी सक्रियता का स्तर समय और घटना विशेष के साथ बदलता भी रहता है जो कि केंद्र और राज्य सरकारों को अच्छी तरह से पता भी है. पिछले कुछ वर्षों में देश के कई हिस्सों में देश के भीतर सक्रिय शरारती तत्वों द्वारा जिस तरह से सोशल मीडिया का दुरूपयोग शुरू किया गया है वह अपने आप में बहुत ही चिंताजनक है क्योंकि यह सब सामाजिक, धार्मिक और वर्गीय भावना को भड़काने में आगे में घी की तरह काम करता है और उन्माद में डूबे हुए लोग सही गलत की राह से बहुत दूर केवल बदले की भावना से ही काम करने लगते हैं जिसका पूरे समाज पर बुरा असर दिखाई देता है तथा कार्यवाही के दबाव में पुलिस भी किसी को भी पकड़ने के क्रम में जुटी हुई दिखाई देती है.
                                                             इस तरह की समस्या से निपटने के लिए केंद्रीय स्तर पर नई दिल्ली में कम्प्यूटर इमरजेंसी रेस्पॉन्स टीम का गठन किया गया है जो किसी भी राज्य से आने वाली शिकायत पर किसी भी आपत्तिजनक पोस्ट को ब्लॉक करने का काम किया करती है. इस तरह की व्यवस्था वैसे तो पूरे देश में होनी चाहिए और उसे पूरे देश के सभी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के साथ ही केंद्रीय एजेंसियों के साथ जुड़ा हुआ भी होना चाहिए जिससे सभी को देश के किसी भी हिस्से में होने वाली किसी भी ऐसी घटना के बारे में समय रहते पता चल सके. २०१३ में मुंबई पुलिस कमिश्नर रहते हुए बागपत के वतर्मान सांसद डॉ सत्यपाल सिंह ने वहां इस तरह की पोस्ट्स पर नज़र रखने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने मीडिया लैब की स्थापना की थी जिसने हाल ही में काफी काम किया और आज भी वह अपने काम को बखूबी अंजाम देने में लगी हुई है पर इस लैब के पास अभी केवल आपत्तिजनक पोस्ट को दिल्ली स्थिति सेंटर तक पहुँचाने जैसा काम ही है जिससे यह पूरी तेज़ी से काम नहीं कर पा रही है इसलिए इसको और भी अच्छा बनाने के लिए केंद्रीय स्तर पर कई प्रयास किये जा रहे हैं और महाराष्ट्र में भी इसके कई अन्य केंद्र पूरी सुविधा के साथ खोलने पर विचार किया जा रहा है.
                                                 आज देश के सामने जिस तरह की चुनौतियाँ हैं उनसे निपटने के लिए अब ऐसा कानून भी बनाया जाना चाहिए जिसके अंतर्गत हर राज्य के पास इस तरह की पूर्ण रूप से विकसित मीडिया लैब हो तथा राज्य के आकार और संवेदनशीलता के स्तर को देखते हुए इन राज्यों के महत्वपूर्ण शहरों में भी इनकी स्थापना की जानी चाहिए जिससे आने वाले समय में पुलिस के सामने संभावित परिस्थितियों के लिए देश को अभी से तैयार किया जा सके. आज जिस तरह से अखिल भारतीय सेवाओं में जिस तरह से इंजीनियर और अन्य उच्च शिक्षित लोग अाने लगे हैं उनका सही दिशा में सरकारों को उपयोग करना चाहिए बल्कि आने वाले समय के लिए तैयार की जाने वाली अन्य बातों में अखिल भारतीय और राज्य स्तर पर एक नए कैडर को भी बनाया जाना चाहिए जिसमें कंप्यूटर विशेषज्ञों को इस तरह की बातों के लिए अलग से ही नियुक्त किया जाये . आज सरकार के पास हर ज़िले में एनआईसी के रूप में एक अच्छा मीडिया केंद्र मौजूद है तो भविष्य में इस तरह के मीडिया लैब्स को इन स्थानों पर ही आवश्यक रूप से विकसित किये जाने के बारे में काम करना चाहिए जिसमें तैनात विशेष सुरक्षा अधिकारी और जिले की पुलिस के प्रशिक्षित लोग सोशल मीडिया के इस ख़राब पहलू पर नज़र रखने का काम कर सकें.     
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