मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Tuesday, 5 January 2016

भारतीय सुरक्षा परिदृश्य

                                                                   देश भर में जिस तरह से पाक समर्थित आतंकियों द्वारा अपने मनमाने तरीके से कहीं भी बड़ा हमला किया जाना सदैव से ही संभव रहा है वहीं इस सबसे निपटने में भारत की जो तैयारियां होनी चाहिए वे अभी भी बहुत ही निचले स्तर पर हैं. २६/११ की चुनौतियों के बाद निश्चित तौर पर भारतीय नेताओं की सोच में बदलाव आया और किसी स्तर पर कुछ तैयारियों के लिए खाका भी खींचा गया क्योंकि कंधार विमान अपहरण के समय जिस तरह से हमारे नेताओं की बैठक सीएमजी और क्यूआरटी जैसी बातें केवल सतह पर ही तैर रही थीं २६/११ के समय उनमें कुछ सुधार अवश्य ही दिखा था. जम्मू कश्मीर में पूरी सीमा की बाड़ बंदी और चौकसी का स्तर बहुत ही ऊंचा कर दिए जाने के बाद से ही आतंकी संगठनों के लिए वहां से अपने जेहादियों को भेजना आसान नहीं रहा गया है इसलिए वे अब नजदीकी राज्य पंजाब और राजस्थान की सीमाओं पर एक बार फिर से नज़रें गड़ाने में लग गए हैं. इस परिस्थिति में अब सरकार को यह सोचना ही होगा की १९८४ में जब पंजाब आतंक की चपेट में था तो कैसे सीमा सुरक्षित करके आतंकियों को पाक से मिलने वाली मदद को काटा गया था.
                       किसी भी आतंकी हमले के बारे में क्या हमारे विभिन्न राज्यों की पुलिस के पास उतना प्रशिक्षण है जिसकी ऐसे समय में आवश्यकता होती है यह प्रश्न इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि जब भी कोई आतंकी हमला होता है तो असैन्य क्षेत्र में होने की स्थिति में लगभग हर राज्य को सेना की कुशल टीमों की मदद की जरूरत तो होती है पर वे अपने राज्य के सुरक्षा बलों की पीठ थपथपाने के लिए उन्हें ही आगे रखने का काम किया करते हैं. हर राज्य सरकार को यह पता है कि इस तरह से उच्च प्रशिक्षण पाये हुए आतंकियों से लड़ने के लिए जितने प्रशिक्षित जवानों की आवश्यकता होती है उनके जवानों को वह प्रशिक्षण दिया ही नहीं जाता है. संभवतः यही कारण है कि इस बार आतंकी हमले की सूचना होने और सरकार के अनुसार उनसे निपटने की तैयारी भी होने के बाद हमारे इतने जवान शहीद हो गए. इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए अब क्या पूरे देश के हर राज्य में एक विशेष योजना के अंतर्गत प्रशिक्षित कम से कम एक यूनिट नहीं होनी चाहिए जो एनएसजी या अन्य सुरक्षा बलों के आने तक स्थिति पर यथासंभव अपने नुकसान को सीमित करते हुए नियंत्रण कर सकें.
                    राज्य और केंद्र के बीच सदैव ही ऐसे मामलों में खींचतान ही रहा करती है और केवल राजनैतिक कारणों से राज्य पुलिस एवं विशेष सुरक्षा बलों के जवान भी चाहकर केंद्रीय एजेंसियों के साथ बेहतर तालमेल से काम नहीं कर पाते हैं. अब देश के किसी भी हिस्से में आतंकी हमले से निपटने के लिए एक विशेष प्लान भी होना चाहिए जिसके अंतर्गत किसी भी घटना के बारे में पता चलते ही वहां पर उपलब्ध बल उस पर अमल कर सकें. जिला स्तर के अधिकारियों के माध्यम से केंद्र सरकार की तरफ से आने वाले बलों के साथ सामंजस्य बिठाकर कैसे आतंकियों को जवाब दिया जाये यह पूरी तरह से स्पष्ट होना चाहिए. आतंकी मानसिकता वाले लोगों से निपटना आसान नहीं होता है क्योंकि वे मरने मारने के लिए ही आते हैं पर सुरक्षा बलों को हर बात का ध्यान भी रखना होता है. राज्यों को एक विशेष और स्पष्ट निर्देश भी होना चाहिए कि जब तक सही तरह से प्रशिक्षित सहायता और निर्देश देने वाले न कहें तो बिना किसी मज़बूत तैयारी के आतंकियों से सीधे निपटने से बचना चाहिए क्योंकि उनकी सीमित संख्या हमारे अधिकतम जवानों की शहादत के लिए प्रयासरत रहती है तो जब तक अपरिहार्य न हो जाये तब तक किसी भी परिस्थिति में बिना पूरी तैयारी के आतंकियों से सीधे उलझने के स्थान पर उनको स्थान विशेष में सुरक्षित दूरी से घेरने की कोशिश करनी चाहिए.    
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

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