मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Tuesday, 23 March 2010

सांसद संसद और साइकिल

बीजू जनता दल के सांसदों ने पर्यावरण पर जागरूकता पैदा करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष से जब अनुमति मांगी थी तो लोगों ने सोचा कि शायद यह भी एक राजनैतिक शोशा ही हो पर मीरा कुमार को यह विचार इतना पसंद आया कि उन्होंने सुरक्षा विभाग से तुरंत ही इस पर सारी बातें देख कर अनुमति प्रदान करने के लिए कह दिया. आज के समय में भले ही कोई सांसद इस बात को प्रदर्शित करने के लिए ही साइकिल का उपयोग करे परन्तु कुछ लोगों द्वारा किये जा रहे प्रयास वास्तव में जनता में यह सन्देश देने में सफल हो जाते हैं कि संसद में भी अभी कुछ लोग ऐसे हैं जो जीवन में सच्चाई का सामना करने के लिए तैयार रहते हैं.
यह सही है कि कुछ सांसदों के साइकिल का उपयोग करने से बहुत बड़ा परिवर्तन तो आने वाला नहीं है पर पर्यावरण के लिए जागरूक लोगों के बारे में जब भी बात की जाएगी तब हमेशा ही उनके इस योगदान और प्रयास की चर्चा अवश्य होगी. एक बात की चर्चा यहाँ पर आवश्यक है कि जो काम हो रहा है उसमें सहयोग करके अपना नाम जोड़ लेने से ही मानवता और सहयोग की भावना दिखाई देती हैं. जिस समय समुद्र पर सेतु का निर्माण किया जा रहा था तो कहा जाता है कि एक गिलहरी भी अपने स्तर से प्रयास कर रही थी. उसके बनाने से सेतु नहीं बन सकता था पर उसने उन कर्मठ लोगों में अपना नाम तो लिखा ही लिया जो एक बहुत बड़ा काम कर रहे थे. हम पूरे पर्यावरण को बदल तो नहीं सकते और न ही सबको साइकिल से चलने के लिए बाध्य कर सकते हैं. पर हम अपने स्तर से इतना तो कर ही सकते हैं कि आवश्यकता न होने पर हम अपने वाहनों का प्रयोग न करें और जहाँ तो हो सके तो सप्ताह में एक दो दिन या कुछ निश्चित दूरी के लिए हमेशा साइकिल चलाने की आदत डालने का प्रयास करें. कोई भी काम छोटा नहीं होता और लोग शुरू में हो सकता है कि हमारा उपहास करें पर हमारी लगन भविष्य में उन्हें भी इसी रास्ते पर भी तो ला सकती है ?
 कोई भी प्रयास छोटा या बड़ा नहीं होता उसको करने की इच्छा ही सबसे बड़ी होती हैं. आशा है कि १० % सांसद तो इस बारे में जागरूक होकर अपने प्रयास से देश को कोई अच्छा सन्देश देने का प्रयास करेंगें.  
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

3 comments:

  1. अच्छी खबर की अच्छी टिप्पणी।

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  2. सही कहा-हर प्रयास की अपनी महत्ता है!!

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    हिन्दी में विशिष्ट लेखन का आपका योगदान सराहनीय है. आपको साधुवाद!!

    लेखन के साथ साथ प्रतिभा प्रोत्साहन हेतु टिप्पणी करना आपका कर्तव्य है एवं भाषा के प्रचार प्रसार हेतु अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें. यह एक निवेदन मात्र है.

    अनेक शुभकामनाएँ.

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  3. सही कहा-हर प्रयास की अपनी महत्ता है!!

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