मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Sunday, 11 July 2010

मुस्लिम जगत और बाक़ी दुनिया

पिछले कुछ वर्षों में इस्लाम के जिस कट्टरपंथी चेहरे को पूरे विश्व समुदाय ने देखा है उसका अंदाज़ा किसी नयी शुरुआत के समय ही पता चल पाता है. ओबामा प्रशासन की तरफ से मुस्लिम जगत से बात करने के लिए नियुक्त की गयी विशेष दूत फराह पंडित को अब इस बात का पता चल रहा है. उन्होंने मुस्लिम जगत और अमेरिका के संबंधों को सुधारने के लिए अब तक २४ से अधिक मुस्लिम बाहुल्य देशों की यात्रा की है. यह सही है कि ओबामा  प्रशासन ने जो पहल की है उसका मुस्लिम जगत को जैसा स्वागत करना चाहिए वैसा हो नहीं रहा है फिर भी आने वाले समय में इस बात पर ध्यान देना ही होगा कि विश्व के बहुत सारे मुस्लिम देशों और अन्य देशों के बीच किसी तरह की खाई बनाकर कोई विकास की बातें नहीं कर सकता है.
       आख़िर क्या ऐसा हो गया कि पूरी दुनिया के मुसलमान संदेह के घेरे में आ गए हैं ? इस बारे में बहुत बहस हो चुकी है जैसा कि हर जगह होता है सभी का एक उदारवादी चेहरा होता है तो दूसरा चेहरा बहुत खूंखार होता है. पिछले कुछ समय से इस्लाम की कमान ऐसे लोगों के हाथों में चली गयी जो केवल बन्दूक और बदले में विश्वास करते हैं. इन ग़लत लोगों के हाथ में सारा कुछ जाने से उन्होंने इसका ग़लत इस्तेमाल भी शुरू कर दिया. हर बात के लिए बदले की बातें की जाने लगीं और स्वयं इस्लामी जगत में विवाद इतने बढ़ गए कि दूसरे देशों को उनमें से अपना हित साधने का अवसर मिल गया ? कोई भी दूसरा देश बाहर से आकर मूल देश के बारे में उतनी संजीदगी से नहीं सोच सकता जितनी संजीदगी वहां के बाशिंदों में होती है ? कुछ देशों में नेताओं ने अपने को सबसे ऊपर सोचना और समझना शुरू कर दिया और अपने ही देश के नागरिकों पर ज़ुल्म ढाने शुरू कर दिए जिससे किसी बाहरी तत्व के आने पर नागरिकों ने अपने शासकों का ही विरोध किया और आने वाले तत्वों और देशों ने अपने हितों को साधना चालू रखा.
       अब भी समय है कि इस्लाम के उदारवादी लोग सामने आयें वर्ना अगले कुछ वर्षों तक अगर सारा कुछ ऐसे ही चलता रहा तो आने वाली पीढ़ी ही पूरे इस्लाम को कट्टर और बहुत उग्र मानने लगेगी जिससे आने वाले समय में इस तरह के तनाव और भी अधिक बढ़ जायेंगें. आज यह ज़िम्मेदारी मुस्लिम जगत पर अधिक है कि वे अपनी विश्वसनीयता को साबित करें साथ ही हर छोटी बड़ी शासकीय बातों में इस्लाम के इस्तेमाल से परहेज़ भी करें क्योंकि किसी भी फैसले पर जो इस्लाम विरोधी ताकतें हैं वे अपने को सही साबित करने के लिए इन सभी बातों का सहारा लेना शुरू कर देते हैं. मुस्लिम जगत में भटके कुछ लोग तो आतंकवादी हो सकते हैं पर पूरा मुस्लिम जगत आतंकी नहीं है अब इस बात को पूरी दुनिया को समझाने की ज़िम्मेदारी भी मुस्लिम जगत पर ही है.        

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