मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Friday, 11 May 2012

नारे और यथार्थ

     आख़िर में यूपी सरकार ने जिस तरह से वास्तविकता को स्वीकारते हुए बेरोज़गारी भत्ते देने में जिस तरह से कड़े मानदंड निर्धारित किये उससे यही लगता है कि आज भी हमारे नेता बोलने के समय कुछ भी कह दिया करते हैं और उन वादों को कभी भी वास्तविकता के धरातल पर नहीं तौला जाता है. आज जब अखिलेश के पास पूरा बहुमत है तो उनसे यह आशा करना ग़लत भी नहीं है कि वे भी आगे से किसी भी घोषणा के बारे में कुछ भी बोलने से पहले प्रदेश की सही स्थिति की जानकारी करने का प्रयास करेंगें. चुनाव के समय उन्होंने जो वादा किया था वह प्रदेश में बेरोज़गारी की स्थिति को देखते हुए किसी भी तरह से ग़लत नहीं कहा जा सकता है पर इस सरकारी घोषणा पर अमल करने के बाद जिस तरह से १५ से ६० वर्ष तक के लोगों ने रोज़गार दफ्तरों में लाइन लगा दीं उसका क्या औचित्य था ? सरकार अगर वास्तव में किसी की मदद करना चाहती है तो क्या हम नागरिकों का कोई कर्तव्य नहीं बनता है कि हम भी अपने हितों पर प्रदेश और देश के हितों से समझौता न करें ? जिन लोगों ने बेरोजगार होने के लिए पंजीकरण कराया है अगर उसकी सत्यता की जांच ही करवा दी जाये तो उन सभी लोगों के लिए जवाब देना मुश्किल हो जायेगा.
      इस तरह की योजनाओं को बनाते समय सबसे पहले इस बात का भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि इसका वास्तविक लोगों तक लाभ कैसे पहुँचाया जाया क्योंकि जिस तरह से विभिन्न पार्टियों से जुड़े लोग हर सरकारी योजना में अपनी सरकार के चलते अनुचित लाभ उठाने को अपना हक़ मानते हैं उस स्थिति में और क्या किया जा सकता है ? दूसरों पर ऊँगली उठाने से पहले हम सभी को अपने गिरेबान में झांक कर देखने का प्रयास करना चहिये कि क्या हम इस तरह के किसी अनुचित लाभ की कोशिश में तो नहीं लगे हुए हैं ? इतने बड़े प्रदेश में किसी भी सरकार के लिए सब कुछ करना आसान नहीं है फिर भी यदि जनता चाहे तो अपने बीच से उन लोगों का चयन कर ही सकती है जिन्हें वास्तव में इसकी ज़रुरत है ? आख़िर हर काम के लिए हम नागरिक केवल सरकारों की तरफ़ ही क्यों ताकते रहते हैं हमारी किसी भी योजना के प्रति यह आसक्ति आख़िर प्रदेश के उन लोगों का कैसे भला कर पायेगी जिन्हें वास्तव में इसकी आवश्यकता है ? जनता के जागरूक होने का यह सही समय है क्योंकि अभी तक प्रदेश क्या देश में भी ऐसी कोई व्यवस्था लागू नहीं है जिसके द्वारा यह निर्धारित किया जा सके किसी अपात्र को किसी योजना का लाभ दिए जाने की स्थिति में किससे शिकायत की जाये और उस शिकायत को कैसे निपटाया जाया ?
       यदि सरकार चाहे तो अपनी पूरी मशीनरी को अच्छी तरह से जुटाकर पूरे प्रदेश में सही आंकड़े तो बना ही सकती है जिससे उसे यह पता चल सके कि प्रदेश की जनता की वास्तविक स्थिति क्या है और उसे किस तरह के प्रयासों से सुधारा जा सकता है ? अब आलोचनाएँ करने का समय नहीं बचा है सपा को जनता ने एक बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का अवसर दिया है तो सपा ने प्रदेश को युवा सीएम देकर सही काम किया है. अब समय है कि अखिलेश केवल लोकलुभावन नीतियों से बाहर आकर प्रदेश के लिए कुछ कठोर कदम उठाने का साहस भी दिखाएँ क्योंकि जनता को मुलायम और अखिलेश का अंतर दिखाई भी देना चाहिए बिना उसके जनता में सही सन्देश भेजने में अखिलेश को बहुत दिक्कत आएगी. यह बिलकुल सही समय है क्योंकि अभी सुधार करने के लिए अखिलेश के हर कदम के साथ जनता है और बेमतलब की राजनीति से बाहर आकर सरकार को ठोस काम करने चाहिए जिससे आने वाले समय में इसके असर भी दिखाई देने लगें और लोकसभा या विधान सभा आने पर सरकार के लिएइ लोक लुभावन घोषणा करने में दिक्कतें भी कम हों ? भत्ते देने में जिस दृढ़ता की ज़रुरत है अभी भी वह अखिलेश द्वारा नहीं दिखाई जा रही है सरकार के इस कदम से आने वाले समय में अखिलेश की मज़बूती और निर्णय लेने की क्षमता का सही आंकलन भी किया जा सकेगा और प्रदेश का भी कुछ भला हो जायेगा.  
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

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