मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Monday, 28 May 2012

संस्कृत राष्ट्रीय आदर्श

         केंद्र सरकार ने जिस तरह से संस्कृत को भारत के राष्ट्रीय आदर्श की तरह संयुक्त राष्ट्र में प्रस्तुत करने का फैसला किया है उससे यही लगता है कि आने वाले समय में इस प्राचीन भारतीय भाषा को विश्व स्तर पर नयी ऊँचाइयाँ मिल सकती हैं. संयुक्त राष्ट्र में इस बात का प्रावधान है कि विभिन्न देश अपने यहाँ की इस तरह की खूबियों को राष्ट्रीय आदर्श के रूप में दुनिया के सामने रख सकते हैं. इस कार्यक्रम के तहत सरकार संस्कृत के बारे में विश्व में जागरूकता बढ़ाने का काम भी करने वाली है क्योंकि अधिकांश आधुनिक भारतीय भाषाएँ भी इसी मुख्य भाषा से निकल कर सामने आई हैं इस स्थिति में अगर संस्कृत के बारे में दुनिया भर में जागरूकता और जानकारी बढ़ेगी तो उसका असर पूरी दुनिया में दिखाई देगा. जिस तरह से नासा अपने विशेष प्रयोगों में यह सिद्ध कर चुका है कि संस्कृत ही एक मात्र ऐसी वैश्विक भाषा है जिसमें कंप्यूटर पर काम करना बहुत आसान है और जिस तरह से कंप्यूटर और संस्कृत को लेकर नासा आज भी प्रयोग करने में लगा हुआ है उससे यही लगता है कि आने वाले समय में इस भाषा को सरकार से समर्थन मिलने पर यह पूरी दुनिया में अपने को सबसे आगे ला सकती है.
         जिस तरह से आज हर काम में कंप्यूटर का उपयोग बढ़ता ही जा रहा है और इतने सारे कामों को एक साथ करने के लिए संस्कृत के माध्यम से जिस तरह से काम करने की स्पीड को बढ़ाया जा सकता है और कंप्यूटर की कार्यकुशलता को बढ़ाने में मदद मिल रही है उसे देखते हुए अमेरिका ने अपने यहाँ कंप्यूटर के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए इस भाषा को साथ में सीखने के बारे में कह रखा है उसका असर अगले २० वर्षों में दिखाई देने लगेगा. भारतीय मेधा पूरी दुनिया में अपना काम करती जा रही है पर आज भी हमारी दूर दराज़ के इलाकों में रहने वाली आबादी के लिए अंग्रेजी सीख कर आगे बढ़ना आसान नहीं है इस स्थिति में अगर भारतीय भाषाओं में इस तरह के शोध यहाँ पर भी शुरू कर दिए जाएँ तो स्थानीय मेधा के लिए काम करना आसान हो जायेगा और वे पूरी दुनिया को अपने काम से बहुत कुछ दे पाने में सफल हो सकेंगें. इस सबके साथ हम सभी को भी यह समझना ही होगा कि भाषाओं का ज्ञान आवश्यक है पर अपनी भाषाओं को भूलकर हम दुनिया के सामने नए आदर्श नहीं प्रस्तुत कर सकते हैं.
    अच्छा ही है कि सरकार ने इस बारे में सोचना तो शुरू कर दिया है अब आवश्यकता इस बात की है कि इस मसले पर केवल दुनिया को संस्कृत की अच्छाइयां बताने एक स्थान पर सरकार देश में भी इसके विकास के लिए एक सुनिश्चित समयबद्ध योजना बनाये जिससे जो काम अमेरिका लोग पहले संस्कृत सीखकर करने की सोच रहे हैं उसे हम अपनी भाषा के दम पर पहले ही कर पाने में सफल हो सकें ? सरकार को देश के विश्विद्यालयों में संस्कृत की पढ़ाई करवाने पर गुणवत्तापरक सुधार करने की दिशा में अब सोचना ही होगा क्योंकि जब अमेरिका यह कहे कि संस्कृत में तो  बड़ा दम है और वह इसके माध्यम से विज्ञान में नयी ऊँचाइयाँ छू ले तब हम चेतेंगें तो इससे देश का बड़ा नुक्सान हो जायेगा. देश में सरकार को आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कृत विश्व विद्यालय खोलने चाहिए जिससे एक स्थान पर ही विज्ञान के विषयों की पढ़ाई करने का अवसर छात्रों को मिल सके और आने वाले समय में हमें किसी संस्कृत के बारे में अमेरिकी शोध के लिए इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा जिससे देश की मेधा अपनी भाषा में आगे बढ़कर पूरी दुनिया के लिए और अच्छी मिसालें कायम करने में सफल हो सकेंगी.      

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