मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Tuesday, 23 July 2013

वेटिंग टिकट पर यात्रा

                        आख़िरकार आरक्षण कराकर अपने सफ़र को आरामदायक बनाने का यात्रियों का सपना अब रेलवे के एक नए आदेश के चलते साकार होने की तरफ बढ़ ही चला है क्योंकि अब किसी भी तरह के प्रतीक्षारत टिकट पर सफ़र करने पर शयनयान श्रेणी में भी जुर्माना वसूले जाने के नियम को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है जिससे आरक्षित श्रेणी में सफ़र करना अब आने वाले समय में आसान भी होने वाला है. लम्बे समय से यह रेलवे के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में रहा है कि आरक्षित श्रेणी के शयनयान में नियमों की कमी के कारण प्रतीक्षारत टिकट वाले यात्री घुस जाया करते थे और कन्फर्म टिकट धारकों से विवाद किया करते थे जिससे रेलवे स्टाफ के साथ यात्रियों के लिए भी काफी समस्याएं उत्पन्न हो जाया करती थीं पर अब इस फ़ैसले के बाद जहाँ इस तरह से टिकट धारियों से जुर्माना भी लिया जायेगा और उन्हें डिब्बे से उतार भी दिया जाएगा जिससे कम से कम वे लोग आसानी से सफ़र कर सकेंगें जिनके पास आरक्षित टिकट होगा.
                        इस पूरी कवायद में यह देखना भी ज़रूरी होगा कि आख़िर रेलवे अपने सिस्टम में इन यात्रियों के लिए क्या व्यवस्था कर पाती है जो इस तरह के प्रतीक्षारत टिकटों पर सफ़र करने को मजबूर हुआ करते थे क्योंकि मात्र रेलवे के एक नियम बदल जाने से जहाँ कुछ यात्रियों को तो आराम हो जाएगा वहीं कम सीटों के कारण मजबूरी में विपरीत परिस्थितियों में सफ़र करने वाले यात्रियों के लिए आना जाना अब और भी मुश्किल होने वाला है. इसके लिए जब तक रेलवे अपनी हर गाड़ी की प्रतीक्षा सूची को गाड़ियों में लगने वाले डिब्बों की संख्या से नहीं जोड़ेगा तब तक इसका उसे और यात्रियों को कोई लाभ नहीं मिलने वाला है. इस नई व्यवस्था के बाद रेलवे को प्रतीक्षारत टिकटों की संख्या को भी निर्धारित करना होगा क्योंकि बिना उसके इतनी बड़ी संख्या में प्रतीक्षारत टिकट बांटे जाने का कोई औचित्य ही नहीं बनता है जब उनके लिए सीटें ही उपलब्ध न हों ? रेलवे को अपनी प्रशासनिक दक्षता में और सुधार करने की आवश्यकता है क्योंकि बिना उसके यह काम आसान नहीं होने वाला है.
                           सबसे पहले एक अभियान के तहत भीड़ भाड़ वाले मार्गों पर रेलवे को अपनी हर गाड़ी में उसकी पूरी क्षमता के साथ डिब्बे लगाने के बारे में सोचना ही होगा और साथ ही हर व्यस्त मार्ग की गाड़ी में कुर्सी यानों को प्राथमिकता भी देनी होगी क्योंकि जिन लोगों को किसी भी तरह का टिकट नहीं मिल पा रहा है यदि उन्हें कुर्सी यान में ही सफ़र करने का अवसर मिल जाए तो उनकी यात्रा काफी हद तक आसान हो जाएगी और रेलवे के राजस्व में भी सुधार होगा. अभी तक जिस तरह से केवल अधिकारियों और दलालों को ही इस बारे में पता होता है कि किस गाड़ी में कितने अतिरिक्त डिब्बे लगाये जा रहे हैं यदि २४ घंटे पहले एसएमएस द्वारा प्रतीक्षारत यात्रियों को यह भी सूचित कर दिया जाए कि किस प्रतीक्षा संख्या तक टिकट कन्फर्म होने वाले हैं तो वे अपने टिकट को समय रहते निरस्त कर सकते हैं और स्टेशनों पर अनावश्यक भीड़ को कम करने में भी मददगार साबित हो सकते हैं. अभी तक जिस तरह से पूरी पारदर्शिता के अभाव के कारण रेलवे को बदनामी झेलनी पडती है वहीं दूसरी तरफ़ यात्रियों के लिए भी समस्या बनी ही रहती है अब समय आ गया है कि पूरे आरक्षण तंत्र को आवश्यकता के अनुसार बदला जाए जिससे यात्रियों को सुविधा मिल सके.
     
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