मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Tuesday, 24 December 2013

केजरीवाल और सुरक्षा


                                                         दिल्ली की कमान सँभालने जा रहे आप नेता अरविन्द केजरीवाल ने जिस तरह से दिल्ली पुलिस द्वारा सीएम को उपलब्ध की जाने वाली सामान्य सुरक्षा को भी लेने से मना कर दिया है दिल्ली की परिस्थितियों में उसका कोई मतलब नहीं बनता है क्योंकि दिल्ली में जिस तरह से सदैव ही आतंकियों के हमले का खतरा बना रहता है तो उस स्थिति में सीएम का इस तरह से बिना किसी सुरक्षा के आना जाना कभी भी समस्या उत्पन्न कर सकता है जिसका अंदाजा अभी केजरीवाल और आप नहीं लगा पा रहे हैं. यह सही है कि आप ने सत्ता को इन झमेलों से बहुत दूर रखने की बात अपने घोषणा पत्र में की थी पर जब सुरक्षा सम्बन्धी चिंताएं बढ़ जाती हैं तो उनका अब उस बात पर अड़ना किसी भी तरह से दिल्ली, आप और देश के लिए अच्छा नहीं हो सकता है. यह सही है कि आप के अधिकतर नेता जनता से जुड़े हुए ही हैं तो उस स्थिति में उन्हें जनता की तरफ से किसी भी खतरे की गुंजाईश कम ही है पर आम जनता से तो देश के किसी भी नेता को किसी भी तरह का कोई खतरा बिलकुल भी नहीं है और जब नेता जनता के साथ होते हैं तो वे उन समाज और देश विरोधी तत्वों के निशाने पर सबसे अधिक होते हैं.
                                                         इस मसले पर सामान्य और आवश्यक सुरक्षा से इंकार करने का कोई मतलब नहीं बनता है और वैसे भी आप ने जिस तरह से बंगला संस्कृति को अपने से दूर रखने की बात कही है और सभी नेताओं के लिए यह भी कर रखा है कि वे चुनाव के बाद भी अपने घरों से ही राजनीति करेंगें तो उससे मामला और भी आसान हो सकता है क्योंकि जब जनता के बीच में रहने वाले लोग इस तरह से नई राजनीति की की आधारशिला रखेंगें तो कुछ परिवर्तन अवश्य ही दिखायी देगा।एक प्रदेश के सीएम के पास कितने सारे अन्य आवश्यक काम भी होते हैं जो कई बार उन्हें सामान्य प्रशासनिक शिष्टाचार के कारण ही निपटाने पड़ते हैं उनसे आखिर अरविन्द केजरीवाल किस तरह से बच पायेंगें क्योंकि जब उनको इस तरह के आयोजनों और कार्यक्रमों में भाग लेना ही होगा तो उनके पास सामन्य सुरक्षा नियमों की अनदेखी करना उतना आसान नहीं रह जायेगा क्योंकि भले ही वे अपने लिए कोई सुरक्षा न चाहें पर जब वे दिल्ली कि किसी ऐसी मीटिंग में जायेंगें जहाँ पर सुरक्षा को सर्वोपरि माना जाता है तो उनके लिए समस्या पैदा हो सकती है. ऐसी स्थिति में सीएम के काफिले को छोटा रखकर जन सामान्य को होने वाली परेशानी को दूर किया जा सकता है जिससे जनता को भी अनावश्यक असुविधा का सामना न करना पड़े.
                                                          अब केजरीवाल को यह समझना ही होगा कि वे आम आदमी तो अवश्य ही है पर साथ ही वे अब दिल्ली सरकार के मुखिया भी होने जा रहे हैं तो उस स्थिति में उन्हें उन अनावश्यक ताम झाम पर रोक लगानी चाहिए जिनसे जन साधारण को समस्या होती है और यातायात को अनावश्यक रूप से रोकने का काम किया जाता है क्योंकि जनता को एक सीएम के तौर पर उन्हें मिलने वाली किसी भी सुरक्षा से कभी कोई शिकायत नहीं होने वाली है क्योंकि वह जनता की नज़रों में भी आवश्यक है पर क्या जनता अपने नेता को हर समय किसी अनदेखे खतरे के लिए खुला छोड़ सकती है ? अच्छा हो कि इस मसले पर भी आप एक सर्वेक्षण करा ले और उसके बाद उस पर ही सीएम की सुरक्षा छोड़ दे क्योंकि दिल्ली की जनता को उनसे बहुत सारी आकांक्षाएं हैं और उनको पूरा करने की ज़िम्मेदारी अब आप और केजरीवाल पर ही है तो इस तरह के सुरक्षा प्रबंधों को वे चाहकर भी कम नहीं कर पायेंगें। क्या केवल सीएम के कहने भर से सचिवालय और दिल्ली विधान सभा की सुरक्षा में ढील देकर उसे जन सामान्य के लिए खोला जा सकता है और क्या उससे सुरक्षा से जुडी अन्य चिंताएं सामने नहीं आ जाएंगीं ? जनता के साथ जुड़ना अच्छी बात है पर अपने और सुरक्षा को खतरे में डालकर ऐसे कदमों का किसी भी स्तर पर समर्थन नहीं किया जा सकता है.
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