मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

शनिवार, 28 दिसंबर 2013

२०१४ - राहुल के चुनावी मुद्दे

                                                 दागी सांसदों को बचाने के लिए लाये जा रहे विधेयक को अंतिम समय पर रोक कर जिस तरह से राहुल गांधी ने अपनी पार्टी के निर्धारित रुख से विपरीत पूरी तरह आक्रामक रूप से अपनी राय ज़ाहिर की थी उसके बाद विरोधी दलों ने उसे राजनैतिक नौटंकी बताया था. यदि इस तरह की नौटंकी कहीं से भी देश को अभी तक के स्थापित राजनैतिक कचरे और भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलवाने में किसी भी स्तर पर कोई मदद करता है तो उसका भी समर्थन ही किया जाना चाहिए क्योंकि राहुल के पहले मामले में इसे एक बार का दिखावा कहने वालों को अब आदर्श घोटाले के जाँच आयोग को राज्य सरकार द्वारा खारिज़ किये जाने के फैसले पर जिस तरह से राहुल ने महाराष्ट्र के सीएम पृथ्वी राज चव्हाण की मौजूदगी में असहमति दिखायी उससे अवश्य ही कॉंग्रेस शासित अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों के लिए एक संदेश तो जारी हो ही गया है कि राहुल के माध्यम से निर्णयों को करने में केंद्र से राज्यों तक राहुल की मंशा को उन्हें समझना ही होगा. राहुल द्वारा कॉग्रेस शासित राज्यों के लिए केंद्रीय लोकपाल की तर्ज़ पर राज्यों से उचित व्यवस्था करने को कहना भी एक बड़ा संदेश ही है क्योंकि अब उसके माध्यम से देश को जगाया जा सकता है.
                                                आज देश को भ्रष्टाचार मुक्त करने की बहुत आवश्यकता है और यदि सम्भव हो तो उसके लिए कड़े से कड़े कदम उठाये जाने में भी चूकने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि नैतिकता की सबसे बड़ी बड़ी बातें केवल नेताओं द्वारा ही बड़े पैमाने पर की जाती हैं पर उनका क्या असर होता है यह किसी से भी किसी भी स्तर पर छिपा भी नहीं है ? अरविन्द केजरीवाल के भ्रष्टाचार मुक्त और बेहतर काम करने वाले मॉडल की तरह ही यदि कॉग्रेस भी अपने में बदलाव लाने के लिए प्रयासरत है तो उससे देश को तो कोई परेशानी नहीं होने वाली है अलबत्ता भ्रष्टाचार पर बोलने वालों के लिए एक मुद्दा ही समाप्त हो जाने वाला है. देश के राजनैतिक खाप की अगली पीढ़ी यदि जनता की मंशा को समझते हुए इस तरह से काम करना चाहती है तो इससे आने वाले समय में देश को बहुत बड़ा अंतर दिखने भी लगेगा क्योंकि जिस तरह से राहुल के पीछे पूरी कॉंग्रेस खडी रहती है और उनके बिना अपनी कल्पना भी नहीं कर पाती है और वे इस सोच के साथ अपने निर्णयों को आगे ला रहे हैं तो यह पूरी तरह से देश की मंशा के अनुरूप ही तो है.
                                             राहुल के एक पूर्णकालिक नेता और कॉंग्रेस में महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी को सँभालने के बाद भी जिस तरह से अभी भी कॉंग्रेस में पुराने नेताओं की छवि और मानसिकता का प्रभाव ही अधिक दिखायी दे रहा था उसके बाद यह परिवर्तन सुखद ही लगता है क्योंकि यदि चुनाव आने के पूर्व कॉंग्रेस में इस तरह के परिवर्तन की आहट दिख रही है तो यह देश के लिए पूरी तरह से अच्छा ही है आख़िर अन्ना और किरण बेदी के साथ अनशन करने वाले अरविन्द की मंशा भी तो यही हुआ करती है कि देश में जनता से जुड़े वास्तविक विकास पर अधिक ध्यान दिया जाये और साथ ही भ्रष्टाचार पर कड़ी चोट की जाये और अब यह संदेश यदि देश की सबसे पुरानी और बड़ी राजनैतिक पार्टी को भविष्य में सँभालने वाले राहुल के निर्णयों में झलकने लगा है तो यह देश की ही जीत है. अभी तक लोगों को यह शिकायत रहती थी कि राहुल देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलते ही नहीं हैं पर अब यदि वे जनता से जुड़े मुद्दों पर अपनी ही सरकार पर प्रश्न चिन्ह लगाने में सफल हो रहे और उन्हें सही राह दिखाने के काम में लग रहे हैं तो उसका देश तो समर्थन ही करेगा भले ही अपनी राजनैतिक मजबूरियों के चलते कोई कुछ भी कहता रहे.
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