मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

शुक्रवार, 27 दिसंबर 2013

ईमानदारी और सरकारें

                               जिस तरह से दिल्ली में आप की सरकार बनने की स्पष्ट सम्भावनाएं दिखायी देने के बाद राजनैतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल देखी जा रही है उससे तो यही लगता है कि कहीं न कहीं कुछ अधिकारी ऐसे कामों में अवश्य ही लगे हुए हैं जिनके पास इस नयी सरकार से छिप पाने के अवसर बिलकुल भी नहीं बचे हैं और आने वाले समय में आप के तेवरों को देखते हुए वे किसी बड़ी जांच में दोषी भी पाये जा सकते हैं. यह सही है कि भ्रष्टाचार ने जिस तरह से अभी तक देश में चल रही राजनैतिक परंपरा के साथ अपने आप को बड़ी आसानी से सामानांतर व्यवस्था के रूप में पनपने का अवसर दिया है उससे भी किसी भी नेता के लिए एकदम से कुछ भी कर पाना बहुत आसान नहीं होने वाला है ? फिर भी यदि आप की सरकार के आने की सम्भावनाओं से ही इन भ्रष्ट लोगों के माथे पर शिकन आनी शुरू हो गयी है तो यह देश के स्थापित दलों के लिए सुधरने के एक अवसर भी होगा और यदि अभी भी उन्होंने निचले स्तर पर भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कड़े कदम नहीं उठाये तो उनके लिए जनता को जवाब देना मुश्किल ही होने वाला है.
                          अब आप की दिल्ली में सम्भावनाओं को देखते हुए बहुत सरे दलों के छोटे बड़े नेताओं के लिए इसमें जाने के अवसर भी खुल सकते हैं पर जिस तरह से कॉंग्रेस छोड़कर आप में शामिल होने का प्रयास करने वाली अलका लाम्बा को लेकर आप में मंथन शुरू हुआ है तो उससे यही लगता है कि आने वाले समय में यह प्रक्रिया इस दल में शामिल होने वालों के लिए उतनी आसान नहीं होने वाली है. आप में जिस तरह से सामूहिक नेतृत्व और सामूहिक फैसलों की इच्छा दिखायी दे रही है तो उस स्थिति में किसी भी तरह से दूसरे दलों के इन नेताओं के लिए आप में आने का रास्ता उतना आसान नहीं होने वाला है फिर भी जो लोग इन विधान सभा चुनावों से पहले ही आप में शामिल हो चुके हैं अब उनके लिए अवसर कुछ बेहतर ही होने वाला है फिर भी इन नए आने वाले नेताओं के लिए अपने पुराने दलों की स्थापित और भोगी जा रही संस्कृति को किस तरह से रोकने में आप को सफलता मिलेगी यह भी देखने का विषय होगा. वैसे जिस तरह से आप ने ज़मीनी राजनीति को वापस लाने की कोशिश को एक बार फिर से शुरु कर दिया है उससे भी देश में कुछ परिवर्तन अवश्य ही दिखायी देगा.
                         देश के समाचार टीवी चैनल जिस तरह से आज सारी बातें भूलकर आप को राजनीति करने और बचने की सलाह देने में लगे हुए  हैं उससे तो यही लगता है कि वे आप को कुछ कम करके आंकने में लगे हुए हैं और जिस भी स्तर पर वे अपनी राजनीति को चमकाने के आदी रहे हैं उसमें आप कहीं से भी फिट नहीं बैठती है तो आख़िर किस तरह वे अपने उन कामों को करवा पायेंगें जो अभी तक आसानी से हो जाया करते थे ? आप ने एक बार जिस परिवर्तन की आस जगायी है उसमें जिस तरह से ये टीवी वाले अनावश्यक दखल देने की कोशिशें करने में लगे हुए हैं उसका भी कोई मतलब नहीं बनता है क्योंकि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि हैं और जब उसके पास ही सत्ता की चाभी हमेशा के लिए संविधान ने दे रखी है तो इस तरह के अनावश्यक तमाशे का कोई मतलब नहीं बनता है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह भी है कि आप को सत्ता में आने और उसे चलाकर जनता के सामने एक नया आदर्श स्थापित करने का अवसर आया है तो उसे वह काम करने देना चाहिए और उसको बात बात में मीडिया में नहीं घसीटा जाना चाहिए जिससे वह भी अपना काम कर सके और किसी भी सरकार को बनने से पहले ही जितने सवालों का सामना करना पड़ रहा है वह देश के लिए अच्छा नहीं है क्योंकि जब वे सरकार में होंगें तो ज़िम्मेदारी उनकी ही होगी और जनता खुद ही उन पर नज़र रखने में सक्षम है. 
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