मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Thursday, 5 December 2013

चुनाव और जागरूकता

                                            पांच राज्यों में चल रही चुनावी प्रक्रिया में जिस तरह से दिल्ली के मतदाताओं ने भी पूरे उत्साह के साथ भाग लिया उससे अब देश के मतदाता के बारे में पहले से बनी हुई धारणा को बदलने का समय आता प्रतीत हो रहा है क्योंकि अभी तक ग्रामीण क्षेत्रों के मुक़ाबले शहरी और अर्ध शहरी क्षेत्रों में जिस तरह से कम मतदान हुआ करता था वह देश के लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं था पर पिछले कुछ चुनावों से जिस तरह से मतदान प्रतिशत में बढ़ोत्तरी देखाई दे रही है उससे यही लगता है कि अब देश के बारे में सोचकर मतदान करने वाले भी वास्तव में मतदान करने के लिए निकलने लगे हैं. भारत जैसे विविधता भरे देश में लोकतंत्र के नाम पर आज़ादी के चौथे दशक में जिस तरह से अराजनक तत्वों ने लोकतंत्र की हत्या करनी शुरू की और एक दौर ऐसा भी आया जब आम लोग वोट देने ही नहीं जाते थे तो उसका असर सीधे जीते हुए प्रत्याशियों की सोच पर पड़ा और लोग जेलों से भी चुनाव जीतकर आने लगे पर शेषन द्वारा शुरू किये गए चुनावी सुधारों ने १९९१ के बाद से परिदृश्य में बड़ा बदलाव कर दिया.
                                           देश के लोकतंत्र की जीत तभी सुनिश्चित की जा सकती है जब अधिकांश लोग अपने मताधिकार का प्रयोग कर सरकार को चुनने के लिए आगे आयें और उन लोगों को करारा जवाब भी दें जो देश के लिए सोचने के स्थान पर केवल अपने लिए ही सोचते रहते हैं ? पिछले कुछ चुनावों से अच्छा काम करने वाली सरकारों को जनता ने दोबारा सत्ता भी सौंपी है और उम्मीदों पर खरा न उतर पाने वाले नेताओं को उनकी स्थिति का एहसास भी कराया है कि अब जनता किसी भी परिस्थिति में कुछ भी सहने के लिए तैयार नहीं है. इस तरह की परिस्थिति में जब पूरा परिदृश्य ही बदला हुआ सा लगता है तो आने वाले समय में काम करने वाले नेताओं के लिए देश को और अच्छे से संवारने का समय भी आने वाला है क्योंकि नीतियां वही सफल हो सकती हैं जो जन आकांक्षाओं के अनुरूप बनायीं जाएँ और जिनमें देश की मूल भावना के तत्वों को भी समाहित भी किया जाये जिससे आने वाले समय में देश प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ना भी सीख सके.
                                           देश का लोकतंत्र किसी धर्म, जाति, नेता या दल की बपौती नहीं है और इस बात को देश की जनता ने कई मौकों पर सिद्ध भी किया है और उससे ही दुनिया भर में यह संदेश जाता है कि भारतीय लोकतंत्र चाहे कितना भी लचीला क्यों न दिखायी देता हो पर उसकी जनता ने अपने लोकतंत्र को लगातार परिपक्व करने का ज़िम्मा उठा रखा है और आने वाले समय में जनता को यह भी पता है कि किसे पुरुस्कृत किया जाना चाहिए और किसे दण्डित ? देश में अधिक मतदान होने से जहाँ अब देश को सही नेतृत्व मिलने की तरफ बात जाती हुई दिखती है वहीं कम वोट प्रतिशत पर सरकारें चलाने वाले दलों के लिए भी खतरे की घंटी बजती हुई दिखायी दे रही है. जब अधिक लोग चुनाव में भाग लेंगें तो उनमें से वही लोग चुने जा सकेंगें जिन्हें देश चुनना चाहता है और कम मतदान के भरोसे कुछ भी करके सरकार बना सकने में सक्षम लोगों के लिए अब फिर से सोचने का समय आ चुका है पर भारतीय लोकतंत्र के लिए अब मतदान का यह उत्सव और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब देश अगले वर्ष देश की अगली सरकार को चुनने के लिए कतार में लगने वाला ही है.       
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