मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Saturday, 25 January 2014

दिल्ली पुलिस पर दबाव

                                     दिल्ली में आप और वर्त्तमान में दिल्ली पुलिस की स्थिति को देखते हुए जिस तरह से कानूनी से लगाकर राजनैतिक खींचतान मची हुई है उस परिस्थिति में दिल्ली में होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह के सकुशल निपटने तक किसी के भी खिलाफ कोई बड़ी कार्यवाही होने की सम्भावना कम ही नज़र आ रही है पर जिस तरह से हर तरफ से दिल्ली पुलिस पर ही दबाव बन रहा है उसके बाद क्या दिल्ली पुलिस अनावश्यक दबाव में नहीं आने वाली है ? आप ने जिस तरह से अपने वेबसाइट पर दिल्ली पुलिस द्वारा एक लड़के की पिटाई की क्लिप लगायी है तो क्या उसे वहाँ पर लगाने के अलावा उसे दिल्ली पुलिस के ज़िम्मेदार अधिकारियों के साथ साझा किया गया था क्योंकि इस तरह से पुलिस के ख़िलाफ़ कार्यवाही की बात करने वाले लोग क्या पूरी परिस्थिति को जानने के लिए भी कहीं से उत्सुक थे कि आख़िर इस क्लिप में जो भी दिखाया गया उसके पीछे क्या कारण था क्योंकि पूरे देश में पुलिस का चेहरा कमोबेश ऐसा ही है ? फिर भी दिल्ली पुलिस ने जांच पूरी होने तक इन तीनों पुलिस कर्मियों को निलम्बित कर दिया है जिससे फिलहाल मामला जांच के अंतर्गत ही हो गया है.
                                     दिल्ली पुलिस या देश के किसी भी राज्य की पुलिस आख़िर मानवीय चेहरे के साथ जनता के सामने क्यों नहीं आना चाहती है यह आज देश में सबसे बड़ा सवाल बन गया है ? जब तक देश भर में पुलिस सुधारों को सही ढंग से लागू नहीं किया जायेगा और पुलिस को राजनैतिक हस्तक्षेप से भी निजात नहीं दी जायेगी तब तक किसी भी तरह से इसको और अधिक मानवीय बनाने की कोई भी कोशिश किसी भी स्तर से पूरी नहीं होने वाली है. आज भी जितने अधिक मामले पुलिस के खिलाफ संज्ञान में आते हैं उनमें से अधिकतर स्थानों में पुलिस किसी न किसी तरह के राजनैतिक दबाव में ही काम करती नज़र आयी है तो इस पूरी कवायद में आख़िर नेताओं को कैसे क्लीन चिट दी जा सकती है ? आप के धरने के ख़िलाफ़ जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने भी दिल्ली पुलिस, केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी की हैं उससे भी मामला कहीं न कहीं और उखड़ने की सम्भावना ही अधिक है क्योंकि जब तक नेता भी कानून के अनुपालन को प्राथमिकता नहीं देंगें अकेली पुलिस क्या कर सकती है ?
                                   सुप्रीम कोर्ट भी दिल्ली पुलिस से आज यह पूछ रहा है कि निषेधाज्ञा लागू होने के बाद भी आख़िर किस तरह से इतने लोगों को इकठ्ठा होने दिया गया तो इसका कोई भी जवाब किसी के पास नहीं है और हर तरफ से एक दूसरे को दोषी ठहरने की कोशिशें सभी जवाबों में दिखायी देने वाली हैं जिससे मूल समस्या से सभी का ध्यान हटाने की पूरी कोशिश की जायेगी. कानून के अनुपालन के लिए ज़िम्मेदार पुलिस के पास ऐसा कोई दिशा निर्देश है ही नहीं कि इस तरह की परिस्थिति में आख़िर वह किस तरह से और किसके ख़िलाफ़ कार्यवाही करने को स्वतंत्र है क्योंकि जब एक राज्य का मुखिया ही इस तरह से प्रदर्शन कर रहा हो और उसके दिल्ली जैसे राज्य में बेहद उलझे हुए समीकरण हों तो वहाँ पर किसी भी तरह की राजनीति को आख़िर कैसे रोका जा सकता है ? अच्छा हो कि इस मामले की सुनवाई करते समय कोर्ट पुलिस के लिए एक स्पष्ट दिशा निर्देश भी जारी कर दे क्योंकि इस तरह की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अब सही कदमों और दिशा निर्देशों की बहुत आवश्यकता है जिससे पुलिस अपना काम उसी के अनुसार भी कर सके और जनता की समस्या और अधिक न बढे.
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