मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Friday, 25 April 2014

पाकिस्तान और राजनयिक शिष्टाचार

                                                               अपने जन्म के समय से ही रोज़ नए विवादों में घिरने वाले और आज दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकियों को पोषित करने में लगे हुए देश पाकिस्तान ने जिस तरह से भारतीय सिख श्रद्धालुओं के सम्मान में आयोजित भोज में अपनी मंशा को एक बार फिर से प्रदर्शित किया उससे यही पता चलता है कि वह भारत के साथ सद्भाव बढ़ाने की चाहे जितनी कसमें खा ले पर उसके मंतव्य कभी भी ऐसे नहीं हो सकते हैं कि दोनों देशों के सम्बन्ध थोड़ा सामान्य हो सकें. भारत पाक के बीच में जिस तरह से सदैव ही सम्बन्ध तनाव पूर्ण रहा करते हैं उस परिस्थिति में पाक की इस तरह की हरकत से सिख श्रद्धालुओं पर तो कोई प्रभाव नहीं पड़ा पर पाकिस्तान की मंशा अवश्य ही स्पष्ट हो गयी कि वह चाहे कुछ भी कहे पर उसकी प्राथमिकता आज भी भारत के घरेलू मामलों में उलझने से आगे नहीं बढ़ पायी है. भारतीय चुनावों के बीच जिस तरह से यात्रियों से मोदी को हराने की अपील सरकारी प्रवक्ता द्वारा की गयी उसका कोई मतलब नहीं बनता था क्योंकि ये लोग पाक की बात क्यों मानेंगें ?
                                                               यह सही है कि पूरी दुनिया के लिए सदैव ही भारतीय लोकतंत्र के इस महापर्व पर हर बार इसी तरह से निगाहें लगी रहती हैं पर इस बार जिस तरह से दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते बाज़ार भारत में सबकी दिलचस्पी बनी हुई है उससे यही लगता है कि सभी को अपनी मंशा पूरी करवाने के प्रयास करने पड़ रहे हैं. भारत की आज़ादी के समय भी कुछ देशों ने इस तरह की भविष्यवाणी की थी कि अपनी कमज़ोरियों के चलते भारत खुद ही टूट जायेगा पर उन सभी वैश्विक ठेकेदार देशों को हमने यह दिखा दिया कि हमारे में इतनी ताकत है कि हम अपने दम पर उठकर खड़े हो सकते हैं और समय आने पर अपने दुनिया को भी अपने अनुसार चलने पर मजबूर भी कर सकते हैं भले ही उसके लिए आर्थिक, सामाजिक या राजनैतिक कारण ही ज़िम्मेदार क्यों न हों ? आज भी जिस तरह से हम आगे बढ़ते ही जा रहे हैं उस परिस्थिति में किसी भी देश के लिए भारत पहले तो एक बाज़ार होता है फिर उसे वह अपने प्रतिद्वंदी के रूप में दिखाई देने लगता है.
                                                              पाक जैसे विफल देश से सामान्य, राजनयिक या कूटनैतिक शिष्टाचार की आशा लगाना भी बेकार ही है क्योंकि उसके पास करने के लिए कुछ भी नहीं है और वह आज के तेज़ी से आगे बढ़ते हुए विश्व में केवल आतंकी तत्वों का एक केंद्र ही बनकर रह गया है. क्या पाक सरकार को इतना भी शिष्टाचार नहीं आता है कि वह अपने यहाँ धार्मिक यात्रा पर आये हुए इन श्रद्धालुओं से किस तरह से बात करे ? उसके लिए बात करने के बहुत सारे अवसर भी थे पर भारतीय चुनावों के बारे में इस तरह की सलाह देने की कोशिश क्या भारत के आंतरिक मामलों में सीधा दखल नहीं है ? कोई सामान्य राजनेता या आतंकियों का पैरोकार यदि इस तरह की बातें करता तो समझ में आ सकता था पर दो देशों के बीच सरकारी प्रवक्ता के इस तरह के बयान से पाक का घटियापन ही ज़ाहिर होता है. इस पूरे परिदृश्य में सबसे बड़ी बात यह भी है कि पाक अपने यहाँ के सामान्य हालातों को सँभालने में आज पूरी तरह से विफल है और भारत के लोगों को इस तरह की सलाह देने के लिए उसकी तत्परता कितनी अधिक है यही दिखता है कि पाक जैसे पडोसी से सदैव ही सचेत रहने की आवश्यकता रहने वाली है.    
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

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