मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Sunday, 6 April 2014

रेल सफ़र में ऑनलाइन एफआईआर

                                        रेल यात्रा के समय किसी तरह की समस्या आ जाने के बाद जिस तरह से यात्रियों को अपनी रिपोर्ट लिखवाने में पसीने छूट जाया करते थे अब सम्भवतः रेलवे की एक नयी पहल से उनकी दुश्वारियां कुछ कम हो जाएँ. उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल ने पूरे क्षेत्र में पड़ने वाले सभी १४ जीआरपी थानों के पुलिस कर्मियों को ऑनलाइन रिपोर्ट लिखवाने के लिए प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है. अभी तक जो प्रक्रिया थी उसके तहत यात्री को स्टेशन पर थाने में जाकर रिपोर्ट लिखवानी पड़ती थी जिस समस्या के कारण और अपनी अगली यात्रा पूरी करने के चक्कर में लोग शिकायत करना पसंद ही नहीं करते थे जिसका सीधा असर यही होता था कि खुद रेलवे और पुलिस को कभी भी यह पता ही नहीं चल पता था कि वास्तव में अपराधों की संख्या कितनी है और उनके क्षेत्र में कितने लोग इस तरह की घटनाओं से प्रभावित होते रहते हैं ? अब जब यह प्रक्रिया कुछ सुधरने वाली है तो यह आशा की जा सकती है कि आने वाले समय में रेल यात्रा कुछ और सुखद हो सकेगी.
                                        क्राइम एंड क्रिमनल ट्रैकिंग मैनेजमेंट सिस्टम (सीसीटीएमएस) ने पूरे देश के रेल नेटवर्क को अब इस सुविधा से जोड़ने का काम शुरू कर दिया है जिससे आने वाले समय में रेल में होने वाले अपराधों को रोकने के लिए कुछ कारगर उपाय भी किये जा सकते हैं. सामान्य तौर पर यदि देखा जाये तो रेल के कोच में यात्रियों की सुरक्षा के लिए केवल नाममात्र के सिपाही तैनात होते हैं और उनका भी मुख्य ध्यान केवल अवैध रूप से रेलवे के द्वारा सामान ढोने वालों पर ही लगा रहता है जिससे भी अपराधी आराम से अपराध कर निकल जाया करते हैं और यात्रियों के लिए बड़ी समस्या उत्पन हो जाती है. रिपोर्ट लिखवाने में जिस तरह से अभी तक हर रेलवे थाना क्षेत्र कोताही किया करता था अब उससे भी यात्रियों को मुक्ति मिल जायेगी क्योंकि रेलवे इस सुविधा को लगभग हर स्टेशन पर आने वाले समय में देने की कोशिश करने में लग चुकी है जिससे अपराधियों पर कड़ी निगरानी के माध्यम से नज़र रखने में आसानी होने वाली है.
                                         अपराध होने के बाद यात्रियों को रिपोर्ट लिखवाने में सुविधा हो इससे कोई इंकार नहीं करता है पर अब इस तरफ भी ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है कि आने वाले समय में विभिन्न मार्गों पर दौड़ती हुई गाड़ियों को और भी सुरक्षित कैसे किया जा सके ? अभी हाल ही में यूपी में हुई एक ट्रैन डकैती में डकैत घंटो तक उत्पात करते रहे और यात्रियों के विरोध करने पर उन पर गोलियां भी चलायी गयीं और कहा जाता है कि सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मियों ने अपने को शौचालयों में बंद कर लिया था ? इस संबंध में अब रेलवे के साथ यात्रियों को भी अपनी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखना चाहिए क्योंकि जब तक हम भी अपनी सुरक्षा के लिए सचेत नहीं होंगें तब तक पूरी तरह से सुरक्षित भी नहीं हो पायेंगें. रात के सफ़र में सभी यात्रियों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वे किसी भी दरवाज़े को आवश्यक रूप से खुला न छोड़ें क्योंकि खुले हुए दरवाज़ों के माध्यम से अपराधी आसानी से अंदर आ सकते हैं और यात्रियों के लिए बड़ी समस्या खड़ी कर सकते हैं.
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

1 comment:

  1. बहुत अच्छा प्रयास है, सुविधा देगा।

    ReplyDelete