मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Wednesday, 28 May 2014

यूपी सरकार की तेज़ी

                                      आम चुनावों में मिशन २०१४ के धूल में मिल जाने के बाद से ही जिस तरह से ख़ामोशी के बाद समाजवादी पार्टी के स्तर पर सुधार का ज़िम्मा मुलायम सिंह पर छोड़ अखिलेश ने सरकार के पेंच कसने शुरू कर दिए हैं उनका उन्हें २०१७ के चुनावों में कितना लाभ मिलेगा यह तो समय ही बताएगा पर आने वाले समय में यह कवायद यदि सही ढंग से की जा सकी तो जनता को प्रदेश में एक सरकार ही होने का एहसास अवश्य ही होने लगेगा. देश भर में संभवतः यूपी की समाजवादी पार्टी ही एक मात्र ऐसा दल है जिसके सत्ता में आने के साथ ही अराजक तत्वों के हौसले बुलंद हो जाया करते हैं और आम लोगों का जीना कठिन होने लगता है. अभी तक जिस तरह से २०१२ के विधानसभा चुनावों की जीत के नशे में डूबी हुई पार्टी के लिए जिस तरह का परिणाम सामने आया है वह उसके लिए बहुत ही शर्मनाक है क्योंकि इससे पहले उसका प्रदर्शन इतने निचले स्तर तक कभी भी नहीं गया था.
                                       हर तरह के मोर्चे पर सपा सरकार की जो हालत रहा करती थी आज भी वह उससे भिन्न नहीं है पर जिस तरह से अखिलेश ने अब १० जून को प्रदेश भर के आला अधिकारियों की बैठक लखनऊ में बुलाई है उससे यही लगता है कि आने वाले समय में अब वे कुछ ठोस करने की योजना के साथ सामने आने वाले हैं. प्रदेश की कानून व्यवस्था के साथ हर क्षेत्र में बड़ी विफलता के बाद यह लगने लगा था कि अखिलेश बहुत ही कमज़ोर प्रशासक साबित होने वाले हैं पर अब जिस तरह से उन्होंने अपने तेवर कुछ सख्त करने शुरू कर दिए हैं तो आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प भी होगा कि यह परिवर्तन स्थायी रह भी पाता है या नहीं ? समाजवादी सरकार में स्थानीय नेता जिस तरह से पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाकर कुछ भी सही गलत पाने की कोशिशें किया करते हैं वह जनता की नज़रों में खटकता ही रहता है और जनता समय आने पर अपने मंतव्य को चुनाव में प्रदर्शित भी कर दिया करती है.
                                      इस तरह की समीक्षा बैठक करने को हर तरह से सही कहा जा सकता है पर अब जब अखिलेश सरकार हर मोर्चे पर फेल ही दिख रही है तो खुद मुख्यमंत्री को मंत्रियों के पर कतरते हुए कमान अपने हाथ में लेनी चाहिए और लखनऊ में बैठक करने के स्थान पर मंडलीय समीक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए क्योंकि लखनऊ में अफसरों की भीड़ में केवल भाषण ही दिया जा सकता है और उससे कुछ विशेष हासिल नहीं किया जा सकता है. मंडल स्तर पर बैठक करने से जहाँ अधिकारियों से सीधा संवाद भी हो सकेगा वहीं अधिकारी भी मंडल विशेष की समस्याओं पर विचार विमर्श करने में सफल हो सकेंगें. जनता को एक बात समझ में नहीं आती है कि आखिर सीएम नेताओं के व्यक्तिगत कार्यक्रमों में तो जाने में संकोच नहीं करते हैं पर जब विकास की समीक्षा की बात होती है तो वे लखनऊ से बाहर निकलना ही नहीं चाहते हैं ? अच्छा हो कि जिन स्थानों के लिए रात्रिकालीन ट्रेन उपलब्ध हैं सीएम खुद ट्रेन यात्रा करके उन मंडलों तक जाएँ क्योंकि उनके इस तरह से यात्रा करने की दशा में मार्ग भर के ज़िलों में अधिकारी अपने आप ही सचेत रहेंगे और उसका असर भी दिखाई देगा.      
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