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रविवार, 13 जुलाई 2014

पीएम की सुरक्षा और राजनीति

                                             अहमदाबाद में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बेटे के मांगलिक कार्यों की तैयारियों के सम्बन्ध में जिस तरह से अख़बारों में ये सुर्खियां बनायीं जा रही हैं कि पीएम के वहां जाने के कार्यक्रम के चलते राजमार्ग का डिवाइडर तोड़ दिया गया है जो कि राजमार्ग प्रधिकरण के खिलाफ है उनका कोई मतलब नहीं बनता है क्योंकि अब देश के पीएम के रूप में नरेंद्र मोदी जहाँ कहीं भी जायेंगें तो उनकी सुरक्षा के मानकों को पूरा करने के लिए जो कुछ भी आवश्यक होगा उसे एसपीजी द्वारा अवश्य ही किया जाएगा. भारतीय पीएम के लिए जिस तरह से राष्ट्र प्रमुख होने के कारण सुरक्षा सम्बन्धी चिंताएं सदैव ही बनी रहती है उसमें अब किसी भी तरह की राजनीति नहीं की जानी चाहिए. किसी भी भीड़ भरे स्थान पर पीएम के आने जाने पर वैसे तो अघोषित रूप से रोक ही है पर आवश्यकता पड़ने पर आयोजित भी किये जाते रहते हैं जिससे उनके व्यक्तिगत सार्वजनिक जीवन को भी स्वतंत्र रखा जा सके.
                                            देश के पीएम की सुरक्षा के लिये कई बार दिल्ली में ही बड़े परिवर्तन किये जाते रहे हैं। लालकिले के आसपास जिस तरह से प्रतिवर्ष सड़कों को यातायात की आवश्यकतों के अनुरूप सुधारने की कोशिश की जाती है इस तरह से तो सड़कों में अस्थायी परिवर्तन को वहां पर भी अनुचित बताया जा सकता है. देश के अति महत्वपूर्ण लोग जिस स्थान पर एकत्रित हो रहे हों यदि वहां पर सुरक्षा के मद्दे नज़र इस तरह के बदलाव किये जाते है तो सुरक्षा सम्बन्धी कार्य की तरह मानकर इन पर समाचार नहीं बनाने चाहिए। देश में कुछ नया कर गुजरने की पत्रकारिता के चलते जिस तरह से हर मामले में खबर बनाने का जो चलन आज शुरू हो चुका है उससे अब पत्रकारों को दूरी बनाये जाने की आवश्यकता भी है. देश के पीएम की सुरक्षा के लिए पहले भी इस तरह के परिवर्तन किये जाते रहे हैं और इसके लिए अब आने वाले समय में इस तरह की खबरों का प्रकाशन बंद किया जाना चाहिए।
                                             मीडिया के सामने एक सबसे बड़ी दिक्कत यह भी है कि आज संभवतः वह नरेंद्र मोदी को गुजरात के सीएम से आगे कुछ नहीं मान पा रहा है और वैसे भी कई प्रदेशों में सुरक्षा सम्बन्धी चिंताओं के चलते सीएम की सुरक्षा भी बहुत महत्वपूर्ण होती है। अब समय आ चुका है कि मीडिया अधिक ज़िम्मेदारी के साथ काम करे और पीएम की नीतियों का गुण दोष के आधार पर समर्थन या विरोध करे जिससे जनता को सरकार की नीतियों के बारे में सही जानकारी मिल सके. अभी तक जिस तरह से मीडिया का रुख सामान्य समय में आम तौर पर सरकारों के प्रति उदासीन सा ही रहा करता है अब उससे भी आगे बढ़ने की बहुत आवश्यकता है. अच्छा हो कि देश का मीडिया अब और भी अधिक जागरूक और ज़िम्मेदार हो तथा आने वाले समय में सरकार का सही आंकलन करे और इस तरह के छोटे मुद्दों पर सनसनीखेज रिपोर्टिंग बंद करे.

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