मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Monday, 2 February 2015

फ्री डिश और प्रसार भारती

                                                                  देश के दूर दराज़ के क्षेत्रों में लोगों तक प्रभावी पहुँच बनाने के लिए प्रसार भारती द्वारा जिस तरह से अपनी फ्री टू एयर सेवा फ्री डिश को निरंतर नए चैनेल्स के माध्यम से और लोकप्रिय बनाने का काम शुरु से ही जारी रखा जा रहा है अब उसमें नए सिरे से परिवर्तन की आवश्यकता भी महसूस की जा रही है. देश का सार्वजनिक चैनल होने के कारण जहाँ दूरदर्शन और प्रसार भारती पर सामाजिक सरोकारों को आगे बढ़ाने की बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है वहीं उसके लिए कुछ ऐसा करने की भी बहुत आवश्यकता है जो उसे आर्थिक रूप से कुछ सहारा देने का काम भी कर सके. अभी तक अपने संसाधनों के लिए उसे सरकार की सहायता के लिए ताकना पड़ता है और कई बार कुछ अधिकारियों या मंत्रियों की लापरवाही के चलते यह काम बहुत ही मुश्किल हो जाता है और दूरदर्शन की प्रभावी उपस्थिति पर असर पड़ने लगता है. अब समय आ गया है कि मंत्रालय के साथ प्रसार भारती भी अपने को आर्थिक रूप से स्वावलम्बी बनाने के लिए नए सिरे से रणनीति बनाने के बारे में सोचना शुरू करे.
                                                         आज जब देश में उपलब्ध अन्य सैटलाइट टीवी सेवा प्रदाता अपने स्तर से रोज़ ही नए प्रयोग करने में लगे हुए हैं तो दूसरी तरफ सरकारी क्षेत्र के दूरदर्शन के पास नीतियों के अभाव में आगे बढ़ने की कोशिशें कई बार कमज़ोर सी लगने लगती हैं. अभी तक दूरदर्शन के पास स्लॉट की उपलब्धता नहीं थी जिसके चलते उसके लिए नए चैनेल्स को जोड़ पाना एक कठिन समस्या ही रहा करती थी पर अब जब उसके पास स्लॉट उपलब्ध हैं और वह नए चैनेल्स को अपनी सेवा में जोड़ने के लिए तैयार भी दिखाई दे रहा है तो अब इस पूरे मामले में आगे बढ़कर नए सिरे से परिवर्तन करने के बारे में सोचना चाहिए. एक सबसे साधारण काम जो तुरंत ही किया जा सकता है कि प्रायोगिक तौर पर इस सेवा में कुछ पेड चैनेल्स को भी समाहित किया जाये और उसके लिए कुछ मामूली शुल्क भी लगाया जाये जिससे जो लोग दूरदर्शन के इस स्थान पर और भी अधिक कार्यक्रम देख सकें. अपने फ्री चैनेल्स को दिखाने के साथ ही स्मार्ट कार्ड लगने वाले सेटटॉप बॉक्स प्रयोग में लेकर इस परिवर्तन को करने की दिशा में काम किया जा सकता है.
                             जिन लोगों के पास आज इस तरह की सुविधा तो है पर वे निजी सेवाओं के मंहगा होने और देश के दूरदराज़ के क्षेत्रों में बिजली की उपलब्धता के चलते ही दूरदर्शन की इस सेवा को उपयोग करने में लगे हुए हैं उनके लिए भी यह सब आसान होना चाहिए. यदि कुछ धन लेकर लोगों को इस सेवा की तरफ आकर्षित किया जा सके तो इससे एक तरफ प्रसार भारती को कुछ आमदनी भी होने लगेगी वहीं दूसरी तरफ लोगों के पास एक और विकल्प भी उपलब्ध हो जायेगा. फ़्री डिश के सेटटॉप बॉक्स इस तरह से बनाये जाने चाहिए कि उनमे किसी भी सेवा प्रदाता का स्मार्ट कार्ड लगाये जाने की व्यवस्था भी हो और जब भी कोई चाहे तो स्मार्ट कार्ड खरीद कर इन पेड चैनेल्स का लाभ भी उठा सके वर्ना फ्री सेवा तो उसके लिए उपलब्ध ही रहने वाली है. इस सेवा को उपयोग करने वालों को किसी भी तरह की तकनीकी समस्या से बचाने के लिए इन्हें रिचार्ज करने का विकल्प डाकघरों में भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए जिससे हर क्षेत्र के लोगों के लिए इन्हें चार्ज करना आसान रहे. आज जो फ़्रीडिश विभाग काम कर रहा है उसे भी मज़बूत कर लोगों के सामने एक सार्वजनिक क्षेत्र का मनोरंजक विकल्प उपलब्ध करने से प्रसार भारती और नागरिकों का दोहरा लाभ हो सकता है.   
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