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Thursday, 5 February 2015

आईएस और इस्लामिक विश्व

                                             आईएस के खिलाफ एक अभियान में जॉर्डन के पकडे गए पायलट कसासबेह की जघन्य हत्या करने के बाद जिस तरह से इस्लामिक विश्व में भी आईएस के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया हुई है उससे आईएस के एजेंडे बारे में और भी अधिक नज़दीकी समझ बनाये जाने की आवश्यकता है क्योंकि अभी तक केवल बर्बरता के सहारे ही विरोधियों पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम करते हुए आईएस ने यह काम किया है. जॉर्डन के लिए यह खबर एक धक्के से कम नहीं थी क्योंकि जापानी बंधक के बदले पायलट की रिहाई करने की बातचीत एक समय आगे बढ़ती हुई दिखाई दे रही थी पर उस प्रयास के असफल रहने के बाद जिस तरह से जॉर्डन में आम लोगों में आईएस के खिलाफ गुस्सा बढ़ गया है संभवतः आईएस यही चाहता भी है क्योंकि जब तक उसके खिलाफ काम करने वाली शक्तियां विरोधी होने के बाद भी एकजुट होती रहेंगीं तब तक वह अपने काम में सफल ही होता रहेगा पर यह एक ऐसा मसला है जिसमें पूरे इलाके को केवल अराजकता के अतिरिक्त कुछ भी हासिल नहीं हो सकता है.
                   आईएस के खिलाफ जिस तरह से मध्यपूर्व के कुछ देश आधे अधूरे मन से ही कार्यवाही करने के पक्ष में दिखाई देते हैं वह भी आने वाले समय में उनके लिए ही गंभीर खतरा बन जाने वाला है क्योंकि आईएस के अधिकांश लड़ाके अराजक और बर्बर हैं उनके लिए किसी भी देश की कोई कमज़ोरी हाथ में आते ही उस पर हमला करने की रणनीति बहुत ही कारगर बनी हुई है जिसका कोई तोड़ अभी तक इन देशों को नहीं मिल सका है. इस बर्बर घटना के बाद जिस तरह से काहिरा स्थिति इस्लामिक सेंटर ने भी आईएस के खिलाफ अपना गुस्सा कड़े शब्दों में ज़ाहिर करते हुए कहा है कि इन आतंकियों के टुकड़े टुकड़े कर दिए जाने चाहिए क्योंकि ये दुनिया भर में इस्लाम का नाम खराब कर रहे हैं उसमें भी कट्टरता ही अधिक नजर आती है. किसी भी केंद्र द्वारा इस तरह से आह्वाहन से आखिर किसे मदद मिलने वाली है यह भी सोचने का विषय है क्योंकि आने वाले समय में जब पूरी दुनिया में इस्लाम के इस स्वरुप और अन्य का विभाजन दिखाई देने लगेगा तो इन उदारपंथियों के साथ आतंकी कैसा सुलूक करने वाले हैं यह भी देखने का विषय है.
                 आज आईएस को इस्लाम के अंदर के शिया सुन्नी विभाजन में इसे बेहतरी के तौर पर देखने वाले सुन्नी राष्ट्रों के लिए आने वाले समय में बड़ी परेशानियां सामने आने वाली है क्योंकि अब इस तरह की ख़बरें भी सामने आने लगी हैं कि आईएस का अगला निशाना सऊदी अरब स्थिति पवित्र स्थलों मक्का-मदीना के साथ पांच अन्य महत्वपूर्ण मस्जिदों पर अपना प्रभाव ज़माने का है जिससे वे दुनिया भर के इस्लामी अनुयायियों के साथ सीधे तौर पर अपने को जोड़ सकें. यदि कहीं से भी इस तरह की कोई कोशिश होती है तो पूरी दुनिया में इस्लाम का यह अंदरूनी मसला पूरे क्षेत्र में भयानक तबाही ला सकता है. आज विश्व के प्रमुख इस्लामी केन्द्रों और राष्ट्रों पर यह ज़िम्मेदारी अधिक आ गयी है कि वे इस्लाम को इस तरह से केवल नफरत समर्थक धर्म की तरफ जाने से रोकने का पूरा प्रयास करें क्योंकि आज के समय में इन लड़ाकों के निशाने पर अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए कमज़ोर राष्ट्रों पर कब्ज़ा करना या वहां पर अराजकता फैलाना ही है जिसका लाभ वे सामरिक महत्व के तेल और अन्य संसाधनों पर कब्ज़ा करके उठाने की फ़िराक़ में रहते हैं. नफरत से नफरत को कभी भी ख़त्म नहीं किया जा सकता है इसलिए इस्लामी मूल्यों के सही तरह से प्रतिपादन की आज बहुत आवश्यकता व ज़िम्मेदारी पूरे इस्लामी जगत पर ही आ गयी है.              
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