मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Saturday, 7 February 2015

विमानन क्षेत्र का विस्तार

                                                      देश के पूर्वोत्तर हिस्से, अंडमान और मझोले शहरों के हवाई अड्डों से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए सरकार को एक हज़ार करोड़ रुपयों का एक अलग कोष बनाये जाने के लिए जिस तरह का प्रस्ताव विमानन मंत्रालय ने बजट से पहले दिया है उससे यही लगता है कि सरकार की तरफ से इस बात के लिए हरी झंडी मिल चुकी है. यदि आगामी वित्तीय वर्ष में इस धनराशि का प्रबंध वित्त मंत्रालय द्वारा कर दिया गया तो आने वाले समय में इन क्षेत्रों से हवाई यात्रा के और अधिक विकल्प भी खुल सकते हैं क्योंकि आज के परिदृश्य में जिस तरह से छोटे शहरों में भी व्यापारिक गतिविधियाँ बढ़ती हुई नज़र आ रही हैं तो उस स्थिति में व्यापारियों के लिए इन शहरों तक सीधे हवाई मार्ग का विकल्प मिल जाने से व्यापार में बढ़ोत्तरी की भी पूरी संभावनाएं हैं. इसके साथ इन शहरों से पर्यटन के लिए देश विदेश जाने वाले भारतीयों को भी अपने घरों के आसपास से ही नियमित और बेहतर सुविधा उपलब्ध हो जाने के साथ ही विमानन कम्पनियों को भी अधिक यात्री मिलने की संभावनाएं प्रबल हो जाने वाली हैं.
                                                आज के परिदृश्य में देश के उत्तरी भागों में आबादी अधिक और लोगों द्वारा हवाई सेवा का लाभ उठाने की शक्ति होने के बाद भी यहाँ से हवाई सेवा के सही विकास न होने से निजी क्षेत्र की एयरलाइन्स यहाँ से काम नहीं करना चाहती हैं और एयर इंडिया को अपनी सार्वजनिक सेवाओं की पूर्ति करने के लिए सामाजिक दबाव होने के कारण घाटे में अपनी उड़ानों का सञ्चालन करना पड़ता है. यदि आने वाले समय में इस कोष की स्थापना हो जाती है और इसका उपयोग छोटे शहरों की हवाई सेवाएं सुधारने के लिए किया जाने लगता है तो इससे विमानन में यह पूरी तरह से नया क्षेत्र विकसित हो जायेगा और आने वाले समय में यहाँ से परिचालन करने वाली किसी एयरलाइन्स को अपने घाटे को नियंत्रित करने में सहायता मिल जाएगी. सरकार की तरफ से अपनी सामाजिक ज़िम्मेदारियों को पूरा करने के लिए इस तरह का कोई भी प्रयास पूरे क्षेत्र की दशा और दिशा भी बदल सकता है और इसका सीधा लाभ देश के विकास के अनुरूप आधारभूत ढांचा बनाने के रूप में भी सामने आने वाला है.
                                              आज देश के महानगरों से इन छोटे शहरों के लिए सीधी उड़ानों का अभाव है जिससे यहाँ से देश विदेश में सफर करने वाले यात्रियों को देश के बड़े हवाईअड्डों पर मजबूरी में जाना ही पड़ता है जैसे किसी को लखनऊ से दक्षिण में स्थित किसी शहर को जाना हो तो उसे दिल्ली,मुंबई,चेन्नई,हैदराबाद या बंगलुरु जाना ही पड़ेगा जिससे इन हवाई अड्डों पर अनावश्यक रूप से यात्रियों का बोझ बढ़ता है और यहाँ के ऊंचे यात्री शुल्कों के कारण भी आम लोगों का खर्च बढ़ जाता है. निसंदेह बड़े शहरों की अनदेखी नहीं की जा सकती है पर जिस तरह से आम लोगों के लिए सुविधाओं को जुटाने की बात करने पर विकास के पैमाने अक्सर ही बदल जाया करते हैं अब उनसे भी निपटने की ज़रुरत है. दक्षिण भारत की तरह अब उत्तर और पूर्वोत्तर के इन शहरों के लिए अधिक विकल्प और नयी उड़ानों को बेहतर सुविधाओं के साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता आज सामने आ चुकी है इसलिए इसमें किसी भी तरह की औद्योगिक घरानों के दबाव से आगे जाते हुए सरकार को इस तरह की किसी भी परियोजना पर तेज़ी से आगे बढ़ने की ज़रुरत को समझना ही होगा तभी देश अगले दशकों के लिए ढांचागत सुविधाओं से युक्त हो पायेगा.       
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