मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Saturday, 14 March 2015

"प्रगति" और मोदी के प्रयास

                                              "प्रगति" मतलब 'प्रो एक्टिव गवर्नेस एंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन' कार्यक्रम के तहत केंद्र सरकार के सचिवों और राज्य सरकारों के मुख्यसचिवों के साथ हर महीने एक बार जिस तरह से पीएम मोदी ने सीधा संवाद बनाने की पहल शुरू की है वह अपने आप में एक अच्छी शुरुवात कही जा सकती है क्योंकि इसके माध्यम से केंद्र के सचिवों और राज्य के मुख्य सचिवों पर इस बात का दबाव बन सकता है कि वे बहानेबाज़ी छोड़कर विभिन्न राज्यों और केंद्र के बीच सामंजस्य की पटकथा को और भी मज़बूती के साथ सामने रखने की गंभीर कोशिश करें. अभी तक आज़ादी के बाद से ही जिस तरह का राजनैतिक और प्रशासनिक कल्चर देश में विकसित होता रहा है वह कहीं न कहीं से अंग्रेज़ों के ज़माने की उस मानसिकता से ही प्रभावित रहा करता था जिसमें उच्च पदों पर बैठे हुए लोगों को जनता के अलग मानकर सबसे अधिक महत्व दिया जाता था. आज देश में सूचना क्रांति को जन जन तक पहुँचाने के लिए शुरू की गई भारत ब्रॉडबैंड सेवा के पूरी तरह से शुरू होने के बाद पीएम के लिए भी ग्राम प्रधान तक से संपर्क करना बहुत आसान हो जायेगा.
                                       देश के विकास के लिए जिस तरह से नियमित तौर पर नए कदम उठाने की पहल सरकारों द्वारा समय समय पर की जाती रही हैं और कई बार उनके सकारात्मक परिणाम भी सामने आये हैं फिर भी सरकार की तरफ से बहुत सारी महत्वपूर्ण योजनाओं को सही तरह से नहीं चलने के कारण भी जनता के लिए किये जाने वाले बहुत सारे काम आधे रास्ते में ही दम तोड़ दिया करते हैं. एक समय यूपी के सीतापुर जिले से शुरू की गयी लोकवाणी सेवा ने आम लोगों के लिए इतनी आसानी कर दी थी कि किसी भी तरह की जानकारी केवल १० रूपये में ही हर व्यक्ति प्राप्त करने के साथ अपनी समस्या भी जिलाधिकारी तक पहुंचा सकता था जनपद में उसकी व्यापक सफलता को देखते यूपी सरकार ने उसे पूरे प्रदेश में लागू कर दिया पर बाद में सरकारों द्वारा इस पर ध्यान न दिए जाने आज उसकी हालत भी अन्य सरकारी योजनाओं जैसी ही हो गयी है. विकास की सही तरह से मॉनिटरिंग किये जाने की आज भी देश में कोई सार्थक व्यवस्था नहीं है जिसके चलते समस्याएं कम होने के स्थान पर बढ़ती हुई ही नज़र आती हैं.
                                      पीएम की यह कोशिश बहुत अच्छी कही जा सकती है पर जब तक इसमें अधिकारियों के साथ जनता की भागीदारी का समावेश नहीं किया जायेगा तब तक सरकार के लिए गुड गवर्नेंस और समन्वय दूर की कौड़ी ही रहने वाला है. ब्लॉक, तहसील जनपद स्तर पर समाज के सक्रिय लोगों की एक समिति बनाकर सरकार अपने बोझ को जनता के साथ साझा कर सकती है और यदि आज एनआईसी द्वारा चलायी जा रही हर ज़िले की वर्तमान वेबसाइट में ही जनता की आवाज़ को स्थान दिया जाने लगे तो देश के दूर दराज़ की वास्तविक समस्याएं भी सरकारों तक पहुंचना शुरू हो सकती हैं. कोई भी सरकार यह नहीं चाहती कि वह काम करने में जनता की नज़रों में फिसड्डी साबित हो जाये पर उसके द्वारा अपनी योजनाओं में जनता की खुली भागीदारी भी पता नहीं क्यों खुले मन से कभी स्वीकारी भी नहीं जाती है ? पीएम की जनता तक रेडियो और अन्य माध्यमों से पहुँच अच्छी बात है पर साथ ही जनता के पास एक ऐसा मंच भी होना चाहिए जिससे वह अपनी शिकायतों और विकास से जुडी समस्याओं को ज़िला मुख्यालय तक पहुँचाने की व्यवस्था कर सके. अधिकारियों के साथ पीएम का संवाद आधिकारिक ही अधिक होने वाला है पर निचले स्तर पर यदि जनता ने सरकार की विकास से जुडी ज़िम्मेदारियों में भागीदारी बढ़ा ली तो देश के हर क्षेत्र की प्रगति आसान हो जाने वाली है.            
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