मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Tuesday, 7 April 2015

१०३१ - ज़िम्मेदारी और सहयोग

                                          दिल्ली के सीएम अरविन्द केजरीवाल द्वारा शुरू की गई ऐंटि करप्शन हेल्पलाइन को पहले २४ घंटो में ही जिस तरह से बहुत ज़बरदस्त रेस्पॉन्स मिला है उससे एक बात तो साबित हो ही जाती है कि चाहे देश की राजधानी दिल्ली हो या दूर दराज़ के किसी राज्य की बात पर भ्रष्टाचार के मामले में देश के हर कोने का यही हाल है. किसी भी भ्रष्टाचार निरोधी व्यवस्था को यदि पहले दिन ही बारह हज़ार से अधिक शिकायतें मिलती हैं तो ज़मीनी हकीकत को अच्छी तरह से समझा जा सकता है कि सरकारें चाहे कैसे भी दावे करती रहें पर जनता के लिए भ्रष्टाचार एक बहुत बड़ी समस्या बन चुका है और इससे निपटने के लिए अब सरकारों को एक समवेत प्रयास करने की आवश्यकता है जिसमें केंद्र और राज्यों के भेद को समाप्त कर भ्रष्टाचार से जुड़े किसी भी मामले को एक एजेंसी के माध्यम से निपटा जाना चाहिए जिससे भ्रष्टाचारियों में इस बात को लेकर कुछ डर पैदा किया जा सके कि अब उनके लिए अपनी हरकतों को जारी रख पाना उतना आसान भी नहीं रहने वाला है. भ्रष्टाचार आज एक राष्ट्रीय समस्या है और उससे निपटने के लिए पूरे देश में समग्र रूप से प्रयास करने की आवश्यकता भी है जिसकी तरफ किसी का ध्यान नहीं जा रहा है.
                   दिल्ली सरकार का यह प्रयास सराहनीय है पर क्या हम आम नागरिक के रूप में इसके उद्देश्य की पूर्ति के लिए काम करने के लिए तत्पर भी हैं या हमें केवल अपनी व्यक्तिगत समस्याओं के समाधान होने से ही मतलब रहने वाला है ? जिस तरह से पहले दिन आई इन शिकायतों में बहुत से लोगों ने फालतू की बातें की तो इससे केवल भारतीयों की उस मानसिकता का ही पता चलता है जिसमें हमें हर सुविधा तो चाहिए पर किसी भी स्तर पर किसी भी एजेंसी को हमें किसी भी तरह का सहयोग करने के लिए कुछ भी नहीं कहा जाये ? क्या देश के जागरूक नागरिकों से इस बात की अपेक्षा की जा सकती है कि वे इतनी महत्वपूर्ण बात को इतने हलके से लने की कोशिश करें किसी भी तरह से इन सुविधाओं का दुरूपयोग करने से क्या हम उन लोगों को इस सुविधा का लाभ लेने से वंचित नहीं कर रहे होते हैं जो उनके लिए कई बार जीने मरने के प्रश्न से भी अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है ? यह भी देखा जाना चाहिए कि कहीं केवल राजनैतिक प्रतिद्वंदी ही इस सेवा का भट्ठा बैठाने की कोशिशें तो नहीं कर रहे हैं क्योंकि दिल्ली के लोगों की सुविधा के लिए शुरू की गयी इस सेवा का दिल्लीवासी ही दुरूपयोग करेंगें तो उन्हें बेहतर सुविधाएँ कैसे मिल सकेंगीं ?
                  सरकार का यह प्रयास पूरे स्तर पर प्रारम्भ हो चुका है और अब इस सेल से जुड़े हुए कर्मचारियों और अधिकारियों पर जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने का दबाव भी स्वतः ही आ गया है क्योंकि पूरी गुणवत्ता और जानकरी के साथ शिकायतकर्ता की बात को जितने प्रभावी तरीके से नोट किया जायेगा सरकार को कार्यवाही करने में उतनी ही आसानी होने वाली है. किसी भी शिकायत पर सही दिशा में जांच तभी शुरू की जा सकती है जब उसके बारे में सारी जानकारी पहले ही पूरी तरह से उपलब्ध हो सके. जनता को भी फ़ोन करने से पहले अपनी शिकायत को सही प्रारूप में कर लेना चाहिए और सरकार को भी अख़बारों में इस आशय की सूचना छपवानी चाहिए कि शिकायत कर्ता के पास फ़ोन करने से पहले क्या क्या जानकारियां होनी चाहिए. देश के लिए यह बहुत सही समय है क्योंकि यदि दिल्ली में इस बार यह सेवा कारगर रही तो दूसरे राज्यों में भी इसी तरह की सेवा शुरू कर भ्रष्टाचार की कमर तोड़ी जा सकती है. भ्रष्टाचार पूरे देश की समस्या है और इससे निपटने के लिए समग्र व्यवस्था बनाये जाने की बहुत आवश्यकता है यदि दिल्ली का यह प्रयोग सफल रहता है तो आने वाले दिनों में १०३१ देश भर में एक हेल्पलाइन के तौर पर विकसित कर भ्रष्टाचारियों पर हमले करने और उनको सज़ा दिलवाने के लिए के कारगर हथियार साबित हो सकता है.       
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