मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Monday, 10 August 2015

एनआईसी की गोपनीयता ?

                                                                    विकिपीडिया की भारतीय साइट पर जिस तरह से किसी व्यक्ति ने देश के पहले पीएम जवाहर लाल नेहरू के बारे में उनके जीवन से जुड़े हुए कुछ तथ्यों को गलत तरीके से अपनी झूठी जानकारी के साथ सम्पादित किया था उसके बाद इस मुद्दे पर हंगामा मचना ही था. इस मामले में सबसे गंभीर बात जो सामने आई वह यह थी कि इस काम को अंजाम देने के लिए उस व्यक्ति ने देश की सरकारी इंटरनेट सेवा एनआईसी के इंटरनेट का दुरुपयोग किया जिसके खुलासे के बाद केंद्र सरकार और एनआईसी एकदम से जवाब देने की स्थिति में नहीं रह गए तथा इस मुद्दे पर विभिन्न स्तरों पर सरकार और सम्बंधित एजेंसी से काफी लोगों ने विरोध भी जताया जिसके बाद इस गलत जानकारी को एक बार फिर से सही कर दिया गया. विकिपीडिया पर सभी खाताधारकों को यह सुविधा दी जाती है कि वे किसी भी पन्ने पर सूचनाओं को संशोधित कर सकते हैं यहाँ पर इस सुविधा का किसी विकृत मानसिकता के व्यक्ति ने इस तरह से दुरूपयोग किया पर संभवतः उसे तकनीक की उतनी जानकारी नहीं थी कि विकिपीडिया अगर कोई सुविधा देता तो उसके बदले में आपकी इंटरनेट पर उपस्थिति को भी सार्वजनिक करता है बस यहीं से होने वाली चूक ने राष्ट्रवादी सरकार को समस्या में उलझा दिया है.
                                      आईपी एड्रेस १६४.१००.४१.२८ से इस जानकारी में छेड़खानी किये जाने की सूचना पता चलने के बाद एनआईसी से सूचना के अधिकार के तहत इसकी जानकारी मांगी गयी थी जिस उनकी तरफ से बड़ा ही हास्यास्पद जवाब दिया है कि इस जानकारी को सार्वजनिक किये जाने से सुरक्षा सम्बन्धी चिंताएं खड़ी हो सकती हैं ? क्या तब सुरक्षा से जुडी चिंताएं समाप्त हो गयी थीं जब कोई अधिकारी खुद या उसके नेटवर्क पर कोई अन्य व्यक्ति एनआईसी के नेटवर्क में सेंध लगा रहा था निश्चित तौर पर यह कहा जा सकता है कि आज सरकार में बैठे हुए लोग और उनके प्रभाव में काम करने वाले अधिकारी अपनी ज़िम्मेदारियों से पीछे हट रहे हैं और किसी संगठन विशेष की विचारधारा के अनुरूप काम करने में लगे हुए हैं. देश के लिए इस जानकारी को माँगा जाना चिंता का विषय नहीं है बल्कि उन लोगों की मानसिकता से निपटना अधिक चिंता का विषय है जो केवल दूष्राचार के माध्यम से ही विरोधियों पर वार करने में विश्वास किया करते हैं क्या इसी मानसिकता का पोषण करने वालों के सरकार में बैठे होने पर देश को सुरक्षा सम्बन्धी कोई खतरा नहीं है ?
                                       सूचना मांगने पर इस तरह की अविश्वसनीय सूचना देने पर क्या एनआईसी के खिलाफ आगे अपील नहीं की जानी चाहिए क्योंकि आज देश जानना चाहता है कि क्या देश को सर्वोपरि बताने का नारा लगाने वाले पीएम और उनकी नागपुर से संचालित राष्ट्रवाद की एक तरफ परिभाषा में दीक्षा पाये लोगों के हाथों में देश की जनता और सूचनाएँ सुरक्षित हैं या नहीं ? जनता के सामने केवल वायदों की गठरी खोलने में माहिर साबित होते जा रहे पीएम के लिए यह विश्वसनीयता का संकट भी बन सकता है क्योंकि अभी तक संघ और भाजपा केवल राष्ट्रवाद की बातें किया करते पर इस तरह के दुष्प्रचार वाले राष्ट्रवाद में क्या किसी व्यक्ति विशेष को बचाया जाना सरकार के लिए उचित है ? सवाल नेहरू के एक पन्ने पर भ्रामक बदलाव करने का नहीं है क्योंकि यह काम तो किसी भी निजी क्षेत्र के इंटरनेट का उपयोग कर किसी भी व्यक्ति के द्वारा किया जा सकता है पर महत्वपूर्ण यह है कि इस तरह की झूठी मानसिकता के साथ जीने वाले लोग आज एनआईसी जैसे संस्थान का दुरूपयोग करने की स्थिति में हैं तो क्या आने वाले समय में कोई देश से जुडी महत्वपूर्ण सूचनाओं को दूसरे देशों एक हाथों नहीं बेच लेगा इसकी गारंटी कौन दे सकता है. जनता के पीएम से सिर्फ एक सवाल कि यदि इस तरह की गलत जानकरी कोई उनके बारे में विकिपीडिया पर देने की कोशिश करे तो क्या सरकार उस भी गोपनीयता के दायरे में ही मानेगी या उस व्यक्ति को कुछ समय में ही जेल भेज देगी ?  
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