मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Sunday, 30 August 2015

आईएस और दुनिया

                                                           पूरी दुनिया में आज आतंक के पर्याय बन चुके संगठन आईएस के चलते इस्लाम को मानने वाले लोगों पर संदेह बढ़ता ही जा रहा है जो कि कहीं न कहीं से अंत में आईएस को ही ताकत देने वाला साबित होने वाला है. आज विश्व में आतंक एक सरकारी तौर पर समर्थन और निर्यात के सबसे कुख्यात देश पाकिस्तान में भी अफगानिस्तान में आईएस के बढ़ते रसूख और पाक के कुछ हिस्सों से पुराने इस्लामिक आतंकी गुटों के आईएस के पक्ष में लामबंद होने की ख़बरों के बाद अब आईएस पर प्रतिबन्ध लगाया गया है जिसका पाक पर असर पड़ना लाजमी ही है. पिछले कुछ दशकों से पूरे विश्व में कुछ चरमपंथियों द्वारा जिस तरह से इस्लाम और इस्लामी मान्यताओं की मनमानी व्याख्या की जाने लगी है उसको देखते हुए ईरान सरकार के खर्चे पर पैगम्बर हज़रत मोहम्मद की जीवनी पर आधारित एक फिल्म तीन हिस्सों में बनायीं है जिसमें उनके समय के हालातों पर विस्तार से दिखाया गया है और उनकी मान्यताओं के बारे में भी स्पष्टीकरण देने की कोशिशें की गयी हैं क्योंकि ईरान को लगता है कि आज इस्लाम का जो स्वरुप दिखाई दे रहा है वह पैगम्बर के समय से बिलकुल ही अलग है पर इस फिल्म को भी सुन्नी समुदाय की तरफ से विरोध का सामना करना पड़ रहा है.
                                पूरे इस्लामी जगत को अब यह बात समझनी ही होगी कि आखिर वे कौन से कारण है जिसके चलते पूरे विश्व में आज उसको आतंक का पर्याय बताने की कोशिशें शुरू की जा चुकी हैं तथा किन कारणों के चलते आज युवा मुस्लिम समग्र विकास के स्थान पर केवल जेहादी बनने की सोच तक ही सीमित होने लगे हैं ? धर्म केवल तभी तक जन कल्याण सीमित तक रह सकता है जब तक उसके अनुयायी उसके बारे में खुद पढ़ते सीखते हैं पर जब भी कुछ लोगों द्वारा धर्म के व्यापक स्वरुप को केवल अपने हितों को साधने का साधन बनाया जाने लगता है तो उसकी परिणीति धर्म की बदनामी से अधिक कुछ भी नहीं हो सकती है. आज तालिबान के कमज़ोर पड़ने के बाद जिस तरह से आईएस पाकिस्तान और अफगानिस्तान में भी आगे बढ़ने में लगा हुआ है तो उससे पूरी दुनिया में चिंता बढ़नी स्वाभाविक ही है क्योंकि पाक आज एक अराजक और विफल राष्ट्र के रूप में दुनिया के लिए सरदर्द बनता जा रहा है और ऐसी स्थिति में यदि उस पर आईएस का नियंत्रण हो जाता है तो यह पूरी दुनिया के लिए घातक साबित हो सकता है. परमाणु शक्ति संपन्न होने के कारण किसी भी तरह से पाक में आईएस जैसे संगठन का प्रभुत्व कहीं भी बढ़ने के दूरगामी परिणाम होने वाले हैं और यह बात पाक की सेना और सत्ता की समझ में आने लगी है.
                         अभी तक पाक ने जिस तरह से इस्लामिक देशों से जिहाद के नाम पर मिले फण्ड का दुरूपयोग ही किया है और पाकिस्तानी सेना में भारत को परेशान करने के लिए जिस तरह से जिहाद घुट्टी को पिलाया जाता है आज वही उसके लिए बड़ी समस्या बन सकती है क्योंकि आईएस आज पूरे विश्व खिलाफत की कोशिश करने वाले संगठन के रूप में खुद को खड़ा करने में लगा है जिससे इराक और सीरिया से दूर के मुस्लिम देशों में उसको समर्थन भी मिल रहा है. आज आईएस यही चाहता है कि इन आतंकी गतिविधियों एक चलते पूरी दुनिया में मुसलमान तरक्की और सद्भाव के विरोधी मान लिए जाएँ क्योंकि तभी वह इस्लामी जगत को यह समझने में सफल हो पायेगा कि पूरी दुनिया ही इस्लाम के खिलाफ खड़ी हो रही है और इसी परिस्थति के दम पर वह अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए मुस्लिम युवकों को इकठ्ठा कर पायेगा जिनके माध्यम से वह और भी नए क्षेत्रों में अपने आतंक को बढ़ाने की कोशिशें कर सकता है. आज इस बात को ध्यान में रखते हुए ही गैर इस्लामिक देशों को अपने कदम उठाने पड़ेंगें जिससे आने वाले समय में वे अनजाने में ही आईएस की मदद करने वाले न साबित हो जाएँ.   
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